जयशंकर ने जब भारत को नसीहत देने पर अमेरिका और यूरोप को सुनाई खरी-खरी

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यूक्रेन के खिलाफ़ रूस की आक्रामकता की निंदा ना करने को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना झेल रहे भारत ने मंगलवार को यूरोप और अमेरिका पर पलटवार किया और उन पर सालों से एशिया में चीन के आक्रामक व्यवहार की अनदेखी करने और तालिबान के साथ समझौता कर 'अफ़ग़ानिस्तान को संकट में धकेलने' का आरोप लगाया.
जयशंकर ने कहा, "आपने यूक्रेन के बारे में बात की. मुझे याद है, एक साल से भी कम समय पहले, अफ़ग़ानिस्तान में क्या हुआ था, जहां नागरिकों को दुनिया ने एक संकट की ओर धकेल दिया."
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन देर लियेन के दौरे के एक दिन बाद विदेश मंत्री ने ये बयान दिया है. वॉन देर ने अपने दौरे के दौरान बूचा में हुई हत्याओं को "अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन" बताया और कहा कि यूक्रेन में युद्ध के परिणाम न केवल यूरोप के भविष्य को निर्धारित करेंगे बल्कि भारत-प्रशांत क्षेत्र और पूरी दुनिया को "गहराई से प्रभावित करेंगे."
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सभी सदस्यों से स्थायी शांति के प्रयासों का समर्थन करने का आग्रह किया और भारत के समर्थन की अपील भी की.
यूरोप और अमेरिका को जयशंकर की दो टूक
रायसीना डायलॉग में लक्ज़मबर्ग के विदेश मंत्री जीन एस्सेलबोर्न के एक अन्य सवाल के जवाब में जयशंकर ने कहा. "अगर मैं इन चुनौतियों को सिद्धांतों के संदर्भ में रखूं और जब एशिया में ऐसी ही एक चुनौती हमारे सामने थी (चीन के अक्रामक रवैये के कारण) तो हमें यूरोप से जो सलाह मिली वह थी- (चीन के साथ) व्यापार बढ़ाओ. कम से कम हम आपको वो सलाह तो नहीं दे रहे हैं. और अफ़ग़ानिस्तान के संदर्भ में मुझे बताया जाए कि आखिर कौन से नियम-आधारित आदेशों को दुनिया ने वहां लागू किया?"
भारत ये कहता रहा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों ने न केवल भारत के ख़िलाफ़, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अन्य देशों के ख़िलाफ़ भी चीन के बढ़ते अक्रामक रवैये की अनदेखी की है.

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विदेश मंत्री जयशंकर की ये टिप्पणी यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लियेन के रायसीना डायलॉग में दिए गए भाषण पर आई है. जिसमें उन्होंने भारत को यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस की अक्रामकता की आलोचना से बचने की अपनी नीति को छोड़ने लिए कहा और पूर्व रूस और चीन के बीच गहराते संबंधों को लेकर चेतावनी दी.
'ये एशिया को लेकर यूरोप के लिए वेकअप कॉल है'
भारत रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को ख़त्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति का सहारा लेने के लिए कहता रहा है. हालांकि भारत ने अब तक यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू करने के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के क़दम की निंदा नहीं की है.
रूस के साथ भारत की दशकों पुरानी रणनीतिक साझेदारी और सैन्य हथियारों को लेकर भारत की रूस पर निर्भरता को देखते हुए भारत ने युद्ध पर अपना रुख़ काफ़ी सतर्क रखा है.
स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री कार्ल बिल्ड्ट ने भी जयशंकर से सवाल पूछा कि यूक्रेन के ख़िलाफ़ रूस के युद्ध से चीन क्या निष्कर्ष निकाल सकता है और क्या कम्युनिस्ट पार्टी स्थिति का फ़ायदा उठा सकती है और एशिया में अपने अक्रामक रुख़ को और बढ़ा सकती है?

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इसके जवाब में जयशंकर ने कहा, " पिछले एक दशक से एशिया दुनिया का एक आसान हिस्सा नहीं रहा है और यह दुनिया का एक ऐसा हिस्सा है जहां सीमाएं तय नहीं हुई हैं, जहां आतंकवाद अभी भी प्रचलित है, अक्सर देश ही इसे प्रायोजित करते हैं. यह दुनिया का वो हिस्सा है जहां एक दशक से अधिक समय से नियमों पर आधारित व्यवस्था लगातार तनाव और संकट में है और मुझे लगता है कि एशिया के बाहर, बाकी दुनिया के लिए आज इसे पहचानना महत्वपूर्ण है. "
भारत ने स्पष्ट रूप से उस बिंदु पर का ज़िक्र किया जिस पर यूरोप ने ध्यान देने में देर कर दी और वो है चीन का रवैया, भारत ने बताया कि चीन पहले से ही एशिया में नियम-आधारित व्यवस्था को चुनौती दे रहा है, न केवल भारत के साथ विवादित सीमा पर अपनी आक्रामकता के ज़रिए बल्कि दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर और ताइवान खाड़ी के साथ-साथ पूरे भारत-प्रशांत क्षेत्र में वो ऐसा कर रहा है.
जयशंकर ने कहा, "पिछले 10 सालों से एशिया में ऐसी चीज़ें हो रही हैं. यूरोप ने शायद इसे नहीं देखा होगा तो ये यूरोप के लिए भी एशिया को देखने के लिए एक वेक-अप कॉल हो सकता है."
कॉपी: कीर्ति दुबे
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