रूसी विदेश मंत्री लावरोफ़ ने एस जयशंकर को बताया 'सच्चा देशभक्त'

सर्गेइ लवरोफ़ और एस जयशंकर (सितंबर 2020 की तस्वीर)

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इमेज कैप्शन, सर्गेइ लवरोफ़ और एस जयशंकर (सितंबर 2020 की तस्वीर)

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने मंगलवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की जमकर तारीफ़ की है. लावरोफ़ ने एस जयशंकर को 'मंझा हुआ कूटनीतिज्ञ' और 'सच्चा देशभक्त' क़रार दिया है.

सर्गेई लावरोफ़ ने भारत के विदेश मंत्री की तारीफ़ उनके हालिया अमेरिका दौरे के दौरान दिए गए बयानों और सख़्त रुख़ को लेकर की है. अंग्रेज़ी न्यूज़ चैनल इंडिया टुडे को दिए एक ख़ास इंटरव्यू में उन्होंने ये बातें कही हैं.

असल में अमेरिका में दोनों देशों के बीच पिछले हफ़्ते हुए रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच की बातचीत के बाद एस जयशंकर ने साफ़ कर दिया था कि भारत किसी के दबाव में आए बिना अपने हितों के अनुसार फ़ैसले करेगा.

रूसी विदेश मंत्री ने इस इंटरव्यू में कहा, "उन्होंने कहा कि हम अपने देश के लिए फ़ैसला इस आधार पर लेंगे कि भारत की सुरक्षा की ज़रूरतें क्या हैं. बहुत कम ही देश होंगे जो ऐसा कह सकते हैं.''

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क्या कहा लावरोफ़ ने

रूस के विदेश मंत्री ने कहा है कि वो भारत के साथ सहयोग करते रहना चाहते हैं.

भारत के साथ रूस के संबंधों पर उन्होंने कहा, ''भारत हमारा बहुत ज़्यादा पुराना दोस्त है. हम अपने संबंधों को बहुत पहले से 'स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप' कहते रहे हैं. तो क़रीब 20 साल पहले भारत ने कहा कि हम इन संबंधों को क्यों नहीं 'प्रिविलेज्ड स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप' कहते हैं. किसी भी द्विपक्षीय संबंध की यह अनूठी व्याख्या है.''

लावरोफ़

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इस दौरान लावरोफ़ ने कहा, ''रूस अपनी खाद्य सुरक्षा, रक्षा और कई रणनीतिक क्षेत्रों के लिए पश्चिमी साथियों पर निर्भर नहीं रह सकता. उन्होंने कहा कि हम उन सभी देशों से तालमेल करना चाहते हैं, जो यूएन चार्टर का उल्लंघन करके ग़ैर क़ानूनी और अवैध क़दम न उठाते हों.''

उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इंडिया' कार्यक्रम के प्रति रूसी समर्थन के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि हमने व्यापार करने के बजाय भारत में उत्पादन करने और भारत की ज़रूरतों वाले सामानों का वहीं उत्पादन करने वाले फ़ैसले लिए.

सर्गेई लावरोफ़ ने वादा किया है कि भारत की रक्षा ज़रूरतों के लिए उसे जो चाहिए वो रूस मुहैया कराएगा. उन्होंने रक्षा क्षेत्र में भारत को टेक्नोलॉजी ट्रांसफ़र का भी वादा किया है.

एस. जयशंकर

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इमेज कैप्शन, अमेरिका दौरे पर वॉशिंगटन में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर

अमेरिका में क्या कहा था एस जयशंकर ने

असल में पिछले हफ़्ते अमेरिका के दौरे के दौरान एस जयशंकर अपने जवाबों के कारण काफ़ी चर्चा में रहे. उनकी न केवल भारत के सोशल मीडिया में बल्कि पूरी दुनिया में काफ़ी तारीफ़ हुई.

पिछले दिनों भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अमेरिका में 2+2 बैठक के लिए गए हुए थे. इस बैठक में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री शामिल होते हैं.

उसी दौरान एस जयशंकर अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और वहाँ के रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन के साथ वॉशिंगटन में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे.

एक पत्रकार ने रूस से भारत के तेल ख़रीदने पर सवाल पूछा था. इसके जवाब में एस जयशंकर ने कहा था, ''आप भारत के तेल ख़रीदने से चिंतित हैं लेकिन यूरोप जितना तेल एक दोपहर में ख़रीदता है, उतना भारत एक महीने में भी नहीं ख़रीदता है. इसलिए अपनी चिंता उधर पर कर लें.'' एस जयशंकर का यह जवाब ने भारत समेत दुनिया भर के मीडिया में सुर्खियां बटोरा.

भारत-अमेरिका

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इमेज कैप्शन, अमेरिका में छात्रों से बातचीत के दौरान एस. जयशंकर और एंटनी ब्लिंकन

अमेरिका को भी लिया थाआड़े हाथ

इसी संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेंस में अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा था कि भारत में मानवाधिकारों के उल्लंघन पर उनकी नज़र है. वॉशिंगटन में जब अमेरिकी विदेश मंत्री यह बात कह रहे थे तो एस जयशंकर और राजनाथ सिंह भी मौजूद थे. तब ब्लिकंन की इस टिप्पणी पर किसी ने प्रतिक्रिया नहीं दी थी.

लेकिन पिछले बुधवार को वॉशिंगटन में भारतीय मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए एस जयशंकर ने ब्लिकंन की टिप्पणी पर दो टूक प्रतिक्रिया दी.

जयशकंर ने कहा था, ''सोमवार को वॉशिंगटन में 2+2 बैठक में भारत में मानवाधिकार को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी. लोग हमारे बारे में अपना विचार रखने का हक़ रखते हैं. लेकिन उसी तरह हमें भी उनके बारे में अपना विचार रखने का हक़ है. हमें उन हितों के अलावा लॉबियों और वोट बैंक पर भी बोलने का अधिकार है, जो इन्हें हवा देते हैं. हम इस मामले में चुप नहीं रहेंगे.''

उन्होंने आगे कहा, ''दूसरों के मानवाधिकारों को लेकर भी हमारी राय है. ख़ासकर जब इनका संबंध हमारे समुदाय से हो. मैं आपको कह सकता हूँ कि अमेरिका समेत बाक़ियों के यहाँ मानवाधिकार की स्थिति को लेकर हमारे पास भी कहने के लिए है.''

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