केरल की खिलाड़ी ने बिहार में की 'आत्महत्या' - क्या है मामला

मलयालम भाषा में लिखा लिथारा केसी का खत

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    • Author, सीटू तिवारी
    • पदनाम, पटना से, बीबीसी हिंदी के लिए

"तुम पहले जैसी नहीं रही, तुम कितनी बदल गई हो. तुम कितना हँसती और बोलती थी. किसी के मिलने पर उससे बात करने पर खुश होती थी. तुम्हें मालूम है मैं उस 'पुरानी तुम' से कितना प्यार करती हूं..."

"लेकिन आज तुमने खुद को समेट लिया है. तुमने बात करना बंद कर दिया है जैसे तुमने खुद को कहीं खो दिया है. तुम वापस आओगी. मैं चाहती हूं कि तुम वापस लौटो कुछ यादें बनाने के लिए."

मलयालम भाषा में लिखा ये आख़िरी खत लिथारा केसी का है.

23 साल की लिथारा केसी ने 26 अप्रैल को पटना के राजीव नगर स्थित अपने किराए के कमरे में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी.

जिसके बाद केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को इस संबंध में पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की मांग की है.

साथी खिलाड़ियों के साथ लिथारा केसी

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क्या है मामला

मूल रूप से केरल के कोझीकोड के कक्काटिल की रहने वाली लिथारा बास्केटबॉल की राष्ट्रीय खिलाड़ी थीं. वो साल 2018 में राष्ट्रीय स्तर पर बास्केटबॉल फेडरेशन कप जीतने वाली केरल टीम की सदस्य थी.

उन्हें स्पोर्ट्स कोटे से रेलवे में नौकरी मिली थी. लिथारा पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर डिवीजन के पर्सनल डिपार्टमेंट (कार्मिक विभाग) में जूनियर क्लर्क के तौर पर 15 नवंबर 2019 से काम कर रही थीं.

26 अप्रैल को लिथारा अपने घर शाम तकरीबन 6 बजे लौटी और खुद को कमरे में बंद कर लिया. केरल में रह रहे उनके माता पिता ने उनसे रात को संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन वो असफल रहे.

जिसके बाद परेशान होकर उन्होंने लिथारा के किराए के घर के पास रहने वाले एक जान पहचान के व्यक्ति से संपर्क किया. लेकिन जान पहचान के व्यक्ति का फ़ोन भी लिथारा ने नहीं उठाया.

जिसके बाद लिथारा के घर जाकर देखने पर आत्महत्या की बात सामने आई.

लिथारा के परिवार को इस घटना की सूचना दी गई जिसके बाद लिथारा के मामा राजीवन और उनके एक पड़ोसी निशांथ पटना आए. जिन्हें पोस्टमॉर्टम करके शव सौंप दिया गया.

लिथारा केसी

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कौन है लिथारा केसी

कोझीकोड में रहने वाले लिथारा के पिता करूनान केसी दैनिक मजदूरी करते हैं. उनकी पत्नी यानी लिथारा की मां कैंसर की मरीज हैं.

इस दंपति के तीन बच्चे हैं जिसमें से दो लड़कियों यानी लिथारा की दो बहनों की शादी हो चुकी है. लिथारा सबसे छोटी संतान थीं और अपने माता-पिता का अकेला आर्थिक सहारा भी.

उनके पड़ोसी निशांथ ने बीबीसी हिंदी को बताया, "लिथारा का परिवार आर्थिक तौर पर बहुत कमजोर बैकग्रांउड से आता है. चूंकि वो सरकारी नौकरी में थीं तो परिवार के लिए वहीं एक उम्मीद थीं. उसने शायद अभी कुछ लाख का लोन भी लिया था. वो थोड़े दिनों पहले ही 11 अप्रैल को घर आई थीं और तीन दिन रहने के बाद पटना काम पर लौट गई थी. वो एक खुशमिजाज लड़की थीं."

लिथारा केसी

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कोच रवि सिंह पर आरोप

निशांथ बताते है कि लिथारा ने अपने परिवार से कई बार ये जिक्र किया था कि कोच रवि सिंह लिथारा को लगातार परेशान करते थे. वो कहते है, "हम लोगों VS उसके साथ खेलने वाले खिलाड़ियों से भी बात की तो उन्होंने बताया कि लिथारा कोच से परेशान थीं."

लिथारा के मामा राजीवन ने पटना के राजीव नगर थाने में 27 अप्रैल को जो नामजद एफआईआर कराई है उसमें भी लिखा है, "लिथारा ने मुझे पूर्व में फोन पर बताया था कि मेरे बॉस्केटबॉल कोच के द्वारा शारीरिक और मानसिक शोषण किया जाता है. मेरे ऊपर भी वो दबाव बना रहे हैं. उनकी ऊपर तक पहुंच होने के चलते मैं उनके विरुद्ध कंप्लेन नहीं कर पा रही हूं. मुझे (राजीवन) को पूर्ण विश्वास है कि लिथारा ने अपने कोच रवि सिंह के उकसाने/प्रताड़ित करने के कारण ही मानसिक रूप से परेशान होकर आत्महत्या कर ली है."

बीबीसी हिंदी ने इस संदर्भ में कोच रवि सिंह से संपर्क किया जिसपर उनके परिवार वालों ने कहा, "वो अभी शादी में गए हुए है."

हालांकि लिथारा की आत्महत्या के बाद स्थानीय मीडिया से बातचीत में उन्होंने सभी आरोपों को निराधार बताया था.

उन्होने कहा था, "कुछ लड़के-लड़कियां खेलने के लिए मैदान में आती ही नहीं थीं. इस बात की शिकायत मैंने 19 अप्रैल को ही अपने वरीय अधिकारियों से लिखित तौर पर की थी. अगर उन्हें किसी प्रकार की शिकायत थी तो महिला खिलाड़ी को वरीय अधिकारियों से इस बात की शिकायत करनी चाहिए लेकिन मेरे ख़िलाफ़ ऐसी कोई शिकायत नहीं की गई है."

राजीव नगर थाना प्रभारी नीरज कुमार सिंह ने बताया, "इस मामले का अनुसंधान चल रहा है. कोच को दो बार पूछताछ के लिए बुलाया गया है."

इस मामले में पूर्व मध्य रेलवे के हाजीपुर मुख्यालय के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेन्द्र कुमार ने बताया, "ये मामला पुलिस की जांच में है. जांच के जो नतीजे आएंगे, उसके मुताबिक आगे का क़दम उठाया जाएगा. अभी फ़िलहाल रवि सिंह को कोच के पद से हटा दिया गया है."

क्या लिथारा केसी ने कभी किसी तरह की प्रताड़ना की शिकायत की थी, इस सवाल पर वीरेन्द्र कुमार कहते हैं, "मेरी जानकारी में ऐसा कुछ नहीं है."

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिख कर मृतका के परिवार को न्याय दिलाने का अनुरोध किया है.

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भाषाई दिक्कत

वैसे लिथारा बिहार में भाषाई दिक़्क़त से जूझ रही थीं. इस बात की तस्दीक उनके घरवाले और साथ काम करने वाले दोनों ही करते है.

निशांथ बताते हैं, "उसने अपने माता-पिता से कहा था कि उसको बहुत दिक़्क़त महसूस होती है, उसको हिंदी नहीं आती है."

1965 में 16 साल की आयु में पद्मश्री सुधा वर्गीज भी केरल से बिहार आई थीं. वो अब पूरे बिहार में 'साइकिल वाली दीदी' के तौर पर मशहूर हैं लेकिन एक वक्त में वो भी इस दिक़्क़त से लड़ चुकी हैं.

वो बताती है, "जब आपको पता नहीं चलता कि सामने वाला क्या बोल रहा है और आप जो बोलना चाहते है, उसको व्यक्त कैसे करना है? तो आप अजीब परेशानी में होते हैं. ये बच्ची भी अपनी परेशानी किसी को नहीं बता सकी. उसे कोई मिला ही नहीं जो उसकी बात समझ सकें. मैं भी जब आई थी तो सबसे पहली बात मेरे पिताजी ने यही कही थी कि तुमको हिंदी तो आती नहीं है. लेकिन मैं जानती थी मुझे क्या करना है."

बीते 8 मार्च को पूर्व मध्य रेलवे के हाजीपुर मुख्यालय में खेलकूद के क्षेत्र में नाम रोशन करने वाली महिला खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया था, जिसमें से लिथारा भी एक थीं.

केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने 28 अप्रैल को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जो पत्र लिखा है, उसमें लिखा है, "परिवार मानता है कि कोई भी ऐसे हालात नहीं थे जिसकी वजह से लिथारा आत्महत्या कर सकती थी. इसलिए उसकी असामयिक मृत्यु की जांच का अनुरोध परिवार ने किया है."

लिथारा का परिवार अब अपनी बेटी के लिए सिर्फ़ 'न्याय' चाहता है. लेकिन बिहार के खेल मंत्री अब तक इस घटना से अनजान है.

बीबीसी हिंदी बातचीत में खेल मंत्री आलोक रंजन झा कहते है, "ये मामला मेरे संज्ञान में नहीं है. चूंकि महिला दूसरे स्टेट की खिलाड़ी थीं और केन्द्र सरकार की नौकरी में थी, इसलिए मेरी जानकारी में नहीं है."

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महत्वपूर्ण जानकारी-

आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.

मानसिक समस्याओं का इलाज दवा और थेरेपी से संभव है. इसके लिए आपको मनोचिकित्सक से मदद लेनी चाहिए, आप इन हेल्पलाइन से भी संपर्क कर सकते हैं-

समाजिक न्याय एवं आधिकारिता मंत्रालय की हेल्पलाइन- 1800-599-0019 (13 भाषाओं में उपलब्ध)

इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यमून बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज-9868396824, 9868396841, 011-22574820

हितगुज हेल्पलाइन, मुंबई- 022- 24131212

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंस-080 - 26995000

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