गुजरात: डायमंड इंडस्ट्री का 'हीरा' आत्महत्या क्यों कर रहा है?

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    • Author, पार्थ पंड्या
    • पदनाम, संवाददाता, बीबीसी गुजराती

बीते 25 अक्टूबर को गुजरात के सूरत में हरिकृष्ण डायमंड कंपनी के मालिक ने 600 कर्मचारियों को दिवाली बोनस में गाड़ी गिफ़्ट की.

हीरा कारोबारी सावजी ढोलकिया हर दिवाली पर अपने कर्मचारियों को महंगे गिफ़्ट देते हैं. इसके लिए एक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए.

तभी से पूरे देश में सूरत का हीरा कारोबार चर्चा में है और इस कारोबार की आभासी छवि एक बार फिर देश के सामने है.

इसे आभासी छवि इसलिए कहा जा सकता है क्योंकि विश्व के 42 प्रतिशत हीरों की पोलिशिंग का काम जहां होती है, वहां हीरा कारोबार की सच्चाई कुछ अलग ही है.

पिछले 20 दिनों में गुजरात के हीरा कारोबार में काम कर रहे 10 मजदूरों ने खुदकुशी की है. दूसरी ओर कई डायमंड यूनिट में से मज़दूरों को काम से निकाल दिया गया है.

सफ़ल कारोबार में आत्महत्याएं क्यों?

गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन (जीडीडब्ल्यूयू) नामक मज़दूर संगठन दावा है कि गुजरात में पिछले 20 दिनों में 10 से ज़्यादा मज़दूरों ने खुदकुशी की है.

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गुजरात के स्थानीय मीडिया जैसे 'गुजरात समाचार', 'संदेश' और अन्य स्थानीय अख़बारों में प्रकाशित ख़बरों से पता चलता है कि सूरत के पुणा, वराछा, मानदरवाजा, कतारगाम और अमरौली में मज़दूरों ने आत्महत्या की है.

इसके अलावा भावनगर के घोघा, पालीताणा और राजकोट के जसदण में भी मज़दूरों ने आत्महत्या की है, और अन्य शहरों में भी कुछ ऐसी ही स्थिति है.

हज़ारों मज़दूरो को काम से निकाला

डायमंड इंडस्ट्री में काम करने वाले मज़दूर और मज़दूर संगठन के नेता कहते हैं कि बड़े पैमाने पर मज़दूरों को काम से निकाला जा रहा है और कारखाने बंद हो रहे हैं.

सूरत रत्नकलाकार विकास संघ के जयसुख गजेरा का कहना है कि पिछले एक महीने में सूरत के हीरा कारोबार में 15 से 20 हज़ार मज़दूरों को काम से निकाला गया है. इनमें से अधिकतर जगहों पर मज़दूरों को पीएफ़ इत्यादी अधिकार नहीं मिलते.

गुजरात डायमंड वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष रणमल जिलरिया कहते हैं की यह स्थिति पूरे गुजरात में है. सूरत के अलावा भावनगर और राजकोट में भी मज़दूर का हाल बेहाल है.

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रणमल ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "सूरत के वराछा में किरण एक्सपोर्ट में 300 मज़दूरों को काम से निकाल दिया गया है. दिवाली के वक़्त मज़दूर बेरोजगार हो गए हैं"

'बेरोज़गारी के कारण भाई ने आत्महत्या की'

भावनगर के हीरा कारोबार के मज़दूर विक्रम मकवाना ने 11 अक्टूबर को आत्महत्या की थी. 32 साल के विक्रम हीरे के यूनिट में काम कर रहे थे, लेकिन दो-तीन महीनों से बेरोज़गार थे.

उनके छोटे भाई जगदीश मकवाना ने बीबीसी को बताया, "मैं अहमदाबाद गया हुआ था, तब मेरे दोस्त का मुझे फोन आया और बताया कि भाई ने केरोसिन डाल कर खुद को आग लगा ली है"

"मेरे दोस्त ने मेरे भाई को जलते हुए देखा था, वो ही उसे अस्पताल ले गया. लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया."

जगदीश ने आत्महत्या का कारण बताया, "वो डायमंड यूनिट में काम करता था, कुछ वक़्त पहले काम बंद हो गया था. काम ढ़ूंढने के लिए वह सूरत भी गया था. लेकिन कुछ काम न मिला. बेरोज़गारी की चिंता में ही मेरे भाई ने आत्महत्या कर ली."

हॉस्पिटल के लिए ब्याज पर पैसे लिए

डायमंड इंडस्ट्री की मौजूदा स्थिति जानने के लिए बीबीसी ने डायमंड इंडस्ट्री के मज़दूरों से बात की.

विक्रम मकवाना

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सूरत के वराछा रोड में स्थित डायमंड यूनिट में काम करने वाले अल्पेश भाई कहते हैं, "मेरी बीवी की डिलिवरी के समय भी मुझे तनख्वाह नहीं दी. मैने हॉस्पिटल का बिल भरने के लिये ब्याज़ पर उधार लिया"

वे कहते हैं, "अभी हमारे पासे कम काम है. पहले हम मासिक 15 हज़ार रुपये वेतन घर में ले जाते थे. लेकिन अब महीने में 8-9 हज़ार रूपये ही तनख्वाह मिलती है."

मज़दूरों का कहना है कि उनको घंटो तक बैठा कर रखते हैं और कम काम देते है. घिसे हुए हीरे की संख्या के हिसाब से ही वेतन दिया जाता है.

मज़दूरों का परिवार डर में है

सूरत में जिन मज़दूरों ने आत्महत्या की है, उनके परिवार के लोग मीडिया से बात करने से डर रहे हैं.

आत्महत्या करनेवाले एक लड़के के पिता ने बताया कि वे भी डायमंड यूनिट में काम करते हैं, अगर उनका नाम मीडिया में आ गया तो उनकी नौकरी भी चली जाएगी.

नाम न बताने की शर्त पर वे कहते हैं, "डायमंड यूनिट में मेरा बेटा भी काम करता था. उसने आत्महत्या क्यों की, ये तो नहीं पता. उसने लोगों से कर्ज़ा ले रखा था और उसका काम बंद हो गया था. शायद यही वजह थी कि उसने जहरीली दवा पी ली."

प्रतीकात्मम तस्वीर

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ऐसा कहा जाता है कि डायमंड इंडस्ट्री में मज़दूरों को अच्छी सुविधा मिलती है और अच्छा वेतन मिलता है. तो फिर ये मज़दूर आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?

बेरोज़गारी का कोई सवाल नहीं

सूरत डायमंड एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबूभाई कहते है कि डायमंड इंडस्ट्री में काम की कोई कमी नहीं है.

बाबुभाई कहते हैं, "दिवाली के वक़्त डायमंड यूनिट में ज़्यादा काम होता है, जिससे मज़दूरो की दिवाली अच्छी जाती है. तो अभी बेरोज़गारी का कोई सवाल ही नहीं उठता. किसी भी यूनिट में से मजदूरों को नहीं निकाला गया."

वे कहते हैं, "ये मज़दूर शायद पारिवारिक कारणों से आत्महत्या कर रहे हैं. डायमंड इंडस्ट्री में मज़दूरों को आत्महत्या करनी पड़े ऐसी स्थिति नहीं है."

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'लोन लेना है, सैलरी स्लिप नहीं है'

वराछा रोड के डायमंड यूनिट में काम कर रहे अल्पेशभाई कहते है कि उन्हें सैलरी स्लिप नहीं मिलती.

इसी तरह राजकोट की यूनिट में काम कर रहे अनिलभाई कहते हैं, "मुझे बैंक से लोन लेना था, लेकिन हमारे पास सैलरी स्लिप नहीं है."

"हमने मालिक से सैलरी स्लिप मांगी तो काम से निकाल देने की धमकी दे रहे थे. इसी वजह से हम आज तक लोन नहीं ले पाए."

पीपल्स ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर(पीटीआरसी) के साथ जुड़े बड़ौदा के जगदीश पटेलनी एक हीरा कारोबार से जुड़े मज़दूरों पर काफी काम किया है. उनकी एक रिपोर्ट 'स्टडी ऑफ़ लेबर कन्डिशन्स इन सूरत टेक्सटाइल इंडस्ट्री' के नाम से प्रकाशित हुई है.

इस रिपोर्ट में लिखा गया है कि सूरत के 58,400 डायमंड यूनिट में मजदूरों को प्रॉविडंड फंड नहीं दिया जाता.

इस रिपोर्ट में यह भी लिखा है कि बहुत कम मजदूरों का नाम यूनिट के रजिस्टर पर ऑन रिकॉर्ड होता है.

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'अब हमें भी डर लग रहा है'

राजकोट में हीरा कारोबार से जुड़े अनिलभाई ने बीबीसी गुजराती के साथ बात की. उन्होंने कहा, "अभी-अभी मुझे पता चला कि कभी मेरे साथ काम करने वाले एक लड़के ने खुदकुशी कर ली है."

"एक के बाद एक ऐसे किस्से सुनकर अब मुझे डर लग रहा है. दस दिन में 7 से ज़्यादा खुदकुशी के मामले सुनने में आए हैं."

हर मज़दूर खुदकुशी के चक्र से डरा हुआ है.

अल्पेशभाई कहते हैं, "अभी-अभी भावनगर में एक लड़के ने खुदकुशी की, वह मेरा दोस्त था. हीरे की यूनिट में काम करता था, काम से निकाल दिया तो उसने खुदकुशी कर ली."

राजकोट के अनिलभाई कहते हैं, "पहले हम रोजाना 150 छोटे हीरे घीसते थे, लेकिन अब 70-75 भी नहीं मिलते."

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वे बताते हैं, "एक हीरा घीसने पर हमें 3 रुपये और 60 पैसे मिलते हैं. हमें हमारे क़ानूनी अधिकार नहीं दिए जाते. हमें भी बेरोजगार हो जाने का डर लगा रहता है."

गुजरात में डायमंड इंडस्ट्री के मज़दूरों की आत्महत्या के मामलों में सबसे ज्यादा मामले सूरत के हैं.

बीबीसी ने मज़दूरों की आत्महत्या के मामलों पर सूरत के पुलिस कमिश्नर सतीश शर्मा से बात की.

उन्होंने कहा, "पिछले कुछ दिनों में खुदकुशी के मामले दर्ज़ हुए हैं. लेकिन आत्महत्या के पीछे क्या कारण हैं उस पर अभी जांच की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद ही इसके पीछे के कारणों का पता चल पायेगा "

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