छत्तीसगढ़: बच्चे जिसे खिलौना समझ कर खेल रहे थे, निकला पैरा बम

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

अगर आपको पता चले कि आपका छोटा बच्चा जिसे खिलौना समझ कर खेल रहा है, वह कोई खिलौना नहीं पैरा बम है तो क्या होगा?

छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित दंतेवाड़ा में ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसके बाद लोगों में डर का माहौल बना हुआ है.

ये मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब पुलिस पर बस्तर के दूसरे हिस्सों में कथित रूप से ड्रोन से बमबारी के आरोप लगे हैं.

हालांकि दंतेवाड़ा ज़िले के पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी का कहना है कि इन पैरा बमों की मियाद पूरी हो चुकी थी और ये किसी तरह नष्टीकरण के दौरान बचे रह गये थे, जिन्हें ख़बर मिलने के बाद नष्ट कर दिया गया है.

सिद्धार्थ तिवारी ने बीबीसी से कहा, "मिसफॉयर या मियाद पूरे हो चुके आयुध समय-समय पर पूरी क़ानूनी प्रक्रिया के साथ नष्ट किये जाते हैं. जो चार पैरा बम मिले हैं, वो भी इसी श्रेणी के थे. हमारी टीम को जैसे ही मामले की जानकारी पहुंची और चारों पैरा बम को बरामद किया."

सिद्धार्थ तिवारी ने कहा कि बरामद किए गए बमों को प्रक्रिया के तहत नष्ट कर दिया गया.

लेकिन छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने पूरे मामले की जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में जिम्मेवारी तय किए जाने की ज़रूरत है.

छत्तीसगढ़ के अलग-अलग इलाकों में सुरक्षाबलों को निशाना बनाने के लिए माओवादियों द्वारा लगाए गए विस्फोटकों की बरामदगी की घटनाएं आम हैं.

लेकिन ऐसे कम ही मामले सामने आए हैं, जब सुरक्षाबलों के विस्फोटक या आयुध इस तरह आबादी वाले इलाके से बरामद हुए हैं.

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खिलौना निकला बम

दंतेवाड़ा शहर के वार्ड नंबर 9 के स्थानीय लोगों ने बीबीसी को बताया कि चूड़ीटिकरा-मांझीपदर के आंगनबाड़ी में पहुंचे छोटे बच्चे नदी से नहा कर लौटते हुए, पास के ही खेत में खेल रहे थे. खेत में ही बच्चों को चार पैरा बम मिले, जिन्हें वे खिलौना समझ कर खेलने लग गए.

थोड़ी देर बाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बच्चों के पास जा कर देखा तो उन्होंने बच्चों के हाथ से बमों को दूर किया और बस्ती के लोगों को मामले की जानकारी दी.

इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और पुलिस बल ने इन पैरा बमों को बरामद किया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि बरामदगी के कुछ घंटों के भीतर ही इन पैरा बमों को नष्ट किया गया, जिसकी आवाज़ भी लोगों ने सुनी.

हालांकि आबादी वाले इलाके में पैरा बम मिलने की घटना के बाद इलाके के आदिवासी डरे हुए हैं.

एक ग्रामीण ने कहा, "अभी महुआ और तेंदूपत्ता का मौसम है. लोग मुंहअंधेरे महुआ चुनने और तेंदूपत्ता की तोड़ाई के लिए निकलते हैं. ऐसे में अगर इस तरह के विस्फोटक खेतों में मिलते रहे तो लोगों का जीवन ख़तरे में आ सकता है. पुलिस भले कहे कि यह ख़राब हो चुके बम थे लेकिन अगर ये ख़राब हो चुके थे तो उन्हें ब्लॉस्ट करते समय आवाज़ कैसे आई? हम पुलिस से केवल इतना कहना चाहते हैं कि वे लापरवाही न बरतें."

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में लगभग 3 हज़ार ऐसे विस्फोटक या आयुध को नष्ट किया गया है, जो अनुपयोगी थे या जिनकी मियाद पूरी हो चुकी थी. उनमें कम से कम 349 पैरा बम भी थे. नष्ट करने की प्रक्रिया में ही ये किसी तरह बचे रह गये होंगे.

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जांच की मांग

नक्सलवाद पर पीएचडी कर चुकीं, बस्तर में रहने वाली मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता बेला भाटिया ने भी इस पर चिंता जताई है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "अगर इन विस्फोटकों में एक फीसदी भी ख़तरे की गुंजाइश है तो यह बड़ी लापरवाही है. मैंने इस इलाके के पार्षद से बातचीत की. उन्हें भी विस्फोटकों को शहर के इतने पास नष्ट किए जाने की कोई जानकारी नहीं थी."

बेला भाटिया ने इस तरह के मामलों में स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए जाने और यथासंभव बमों और दूसरे विस्फोटकों को निष्क्रिय किए जाने की प्रक्रिया, आबादी वाले इलाके से दूर करने की भी बात कही. उनका कहना था कि इस तरह के मामलों में लापरवाही लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है.

इधर, छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक का कहना है कि दंतेवाड़ा में भरी आबादी के बीच पैरा बम मिलने की सूचना मात्र से आमजन में दहशत का वातावरण है. यदि बम डिस्पोज भी किया जाता है तो उसके लिए पूरी सुरक्षा बरती जानी चाहिए.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा कि बस्तर जैसे माओवादी प्रभावित इलाके में इसके खिलाफ जुटे सारे लोगों को और भी संवेदनशील होने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में इस तरह की घटना न हो. इसके लिए जिम्मेदार लोगों को और संवेदनशीलता से कार्य करना चाहिए.

धरमलाल कौशिक ने कहा, "जिस तरह से पैरा बम बच्चों को मिला है, यह बेहद ही चिंता का विषय है. इसके लिए आखिरकार कौन जिम्मेदार है? इसकी जांच होना चाहिए."

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