हरिद्वार के बाद अब रायपुर की ‘धर्म संसद’ की क्यों हो रही है चर्चा

धर्म संसद

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    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

पिछले सप्ताह हरिद्वार में आयोजित 'धर्म संसद' में दिए गये भाषणों के बाद शुरू हुआ विवाद अभी थमा भी नहीं है कि रविवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी ऐसी ही एक 'धर्म संसद' में महात्मा गांधी को अपशब्द कहे जाने के बाद विवाद शुरू हो गया है.

हालांकि महात्मा गांधी को अपशब्द कहने वाले कालीचरण महाराज के ख़िलाफ़ इस 'धर्म संसद' के आयोजनकर्ताओं में से ही एक रायपुर नगर निगम के सभापति और कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है.

इधर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और विधायक मोहन मरकाम ने भी पुलिस में शिकायत दर्ज की है.

प्रमोद दुबे ने बीबीसी से कहा, "जिस तरह से महात्मा गांधी को मंच से गाली दी गई, उसकी हमने कल्पना नहीं की थी. मुझे लगा कि यह प्रायोजित एजेंडे के तहत किया गया है."

मोहन मरकाम ने कहा कि महात्मा गांधी के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले बाबा के ख़िलाफ़ राजद्रोह का मामला दर्ज किया जाना चाहिए.

कालीचरण महाराज के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराते मोहन मरकाम

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इस 'धर्म संसद' का आयोजन नीलकंठ त्रिपाठी की नीलकंठ सेवा संस्थान ने किया था. जबकि इस धर्म संसद के संरक्षक कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक और रायपुर के दूधाधारी मठ के महंत रामसुंदर दास थे. रामसुंदर दास अभी राज्य गौसेवा आयोग के अध्यक्ष भी हैं.

नीलकंठ त्रिपाठी ने बीबीसी से कहा, "हमने छह बिंदुओं पर इस धर्म संसद का आयोजन किया था जिसकी आयोजन समिति में कांग्रेस के बड़े नेताओं के अलावा भाजपा के नेता भी शामिल थे. सनातनी हिंदुओं की ओर से आयोजित इस धर्म संसद का मुख्य बिंदु हिंदू राष्ट्र था. संसद में जिस तरह सबको अपने विचार व्यक्त करने की छूट रहती है, उसी तरह इस आयोजन में भी सबने अपने-अपने विचार प्रकट किये. लेकिन महात्मा गांधी को लेकर जो कहा गया, उससे मैं सहमत नहीं हूं."

गोडसे की प्रशंसा और महात्मा गांधी को अपशब्द

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इस दो दिवसीय धर्म संसद में देश के अलग-अलग इलाकों से आये हुए साधु-संतों ने हिंदू राष्ट्र, कथित रूप से हिंदुओं की कम होती संख्या, हिंदुत्व, धर्मांतरण जैसे विषयों पर भाषण दिए. कई साधुओं ने अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए विवादित भाषण भी दिए.

कई साधुओं ने हिंदू धर्म के ख़तरे में होने की बात कही तो कुछ साधुओं ने यह भी दावा किया कि पेंटागन समेत पूरे यूरोप पर हिंदुओं का क़ब्ज़ा हो चुका है और यूरोप की बड़ी आबादी हिंदू बन चुकी है. साध्वी विभानंद गिरि ने तो आरक्षण को ही ख़त्म करने की वकालत की और 'ऑनर किलिंग' को जायज़ ठहराया.

रविवार को कार्यक्रम के अंतिम दौर में अकोला, महाराष्ट्र से आये कालीचरण महाराज नामक एक साधु ने अल्पसंख्यकों पर हमला बोलते हुए कई विवादास्पद बातें कहीं.

पिछले साल मध्य प्रदेश के भोजपुर के मंदिर में 'शिवतांडव स्त्रोतम' गाकर सोशल मीडिया में चर्चित हुए कालीचरण महाराज ने 'जो हिंदू हित की बात करेगा, वही देश पर राज करेगा' के नारे के साथ कहा, "हमारे घर की औरतें बड़ी सुशील और सभ्य हैं. ये वोट देने नहीं जाती हैं....सामूहिक बलात्कार जब होंगे तब, तब तुम्हारी घर की औरतों का क्या होगा? महामूर्ख हो. आपको नहीं बोल रहा हूं, ये उन लोगों को बोल रहा हूं, जो वोटिंग को नहीं निकलते."

कालीचरण महाराज

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उन्होंने कहा, "इस्लाम का टारगेट राजनीति के द्वारा राष्ट्र क़ब्ज़ाना है. उन्होंने हमारी आंखों के सामने 47 में क़ब्ज़ा लिया भइया. दो-दो क़ब्ज़ाया हमारी आंखों के सामने. ईरान, इराक़, अफ़ग़ानिस्तान तो पहले ही क़ब्ज़ा चुके थे. बांग्लादेश और पाकिस्तान हमारे सामने क़ब्ज़ाया उन्होंने, राजनीति के द्वारा क़ब्ज़ाया."

इसके बाद महात्मा गांधी के बारे में कालीचरण महाराज ने कहा, "मोहनदास करमचंद गांधी ने सत्यानाश कर दिया. नाथूराम गोडसे जी को नमस्कार है. मार डाला उस...को. देखो, ऑपरेशन करना बहुत ज़रूरी होता है, इन फोड़े-फुंसियों का. वरना ये कैंसर बन जाते हैं."

भाषण दे कर कालीचरण महाराज सभा स्थल से चले गये. इसके बाद धर्म संसद के संरक्षक और कांग्रेस नेता महंत रामसुंदर दास ने अपने भाषण में महात्मा गांधी को गाली दिए जाने पर आपत्ति की और अपने को इस धर्म संसद से अलग करने की बात कही.

इसके बाद देर शाम कांग्रेस नेताओं ने कालीचरण महाराज के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई.

हिंदू एजेंडा

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छत्तीसगढ़ में 15 साल बाद भाजपा को हटाकर सत्ता में आई कांग्रेस पार्टी, पिछले तीन सालों से लगातार धर्म और आस्था से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय है.

इन तीन सालों में भूपेश बघेल की सरकार ने 2260 किलोमीटर लंबा राम वनगमन पथ, राम रथ यात्रा, कौशल्या माता मंदिर जीर्णोद्धार, गांव स्तर पर मानस प्रतियोगिता, गोबर ख़रीदी जैसे कई धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों पर काम किया है.

हालत ये हुई है कि गोबर ख़रीदी जैसी योजनाओं के बाद तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेताओं ने मुख्यमंत्री का सार्वजनिक अभिनंदन किया है.

राजनीतिक गलियारों में तो यहां तक कहा गया कि कांग्रेस पार्टी की सरकार भाजपा से उसके मुद्दे छीन रही है. लेकिन पिछले साल भर से भारतीय जनता पार्टी ने धर्मांतरण को मुद्दा बनाकर सरकार को घेरना शुरू किया है.

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कोई भी महीना ऐसा नहीं गुज़रता जब धर्मांतरण या धर्म से जुड़े मुद्दे पर राज्य के किसी न किसी हिस्से में तनाव और उपद्रव की स्थिति न बनी हो.

पिछले ही महीने कबीरधाम ज़िले में एक खंभे से झंडा उतारने के बाद ज़िले में कर्फ़्यू लगाने की नौबत आ गई. बाद में हिंदू संगठनों ने जब कबीरधाम में 108 फ़ीट ऊंचा भगवा झंडा लहराया तो झंडा लहराने के लिए आयोजित कार्यक्रम में आए साधुओं का स्वागत करते हुए कांग्रेस के नेताओं ने अख़बारों में बड़े-बड़े विज्ञापन जारी किए.

रायपुर में आयोजित धर्म संसद को लेकर भी कहा जा रहा है कि इस आयोजन में मुख्य भूमिका सरकार और कांग्रेस के नेताओं की थी.

नीलकंठ सेवा संस्थान के नीलकंठ त्रिपाठी ने कहा, "हम पहले सनातन हिंदू हैं, बाद में राजनीतिक दल का स्थान आता है. ऐसे मे इस आयोजन को किसी ख़ास राजनीतिक दल से जोड़ा जाना ठीक नहीं है. रही बात मदद की तो इस आयोजन में सभी का सहयोग मिला है."

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