हरिद्वार की घटना पर विदेशों से भारत के लिए आ रही ऐसी प्रतिक्रिया

यति नरसिम्हानंद

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इमेज कैप्शन, यति नरसिम्हानंद

भारत में कट्टर हिन्दुत्ववादी नेताओं के मुस्लिम विरोधी अभियान की विदेशी मीडिया में काफ़ी आलोचना हो रही है. कहा जा रहा है कि मुस्लिम विरोधी नफ़रत पर मोदी सरकार ने चुप्पी साध रखी है.

मुसलानों के ख़िलाफ़ खुलेआम नफ़रत भरी बातें करने वाले कट्टर हिन्दुत्ववादी नेता यति नरसिम्हानंद ने पिछले हफ़्ते हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर तक धर्म संसद का आयोजन किया था.

इस धर्म संसद में दिए गए भाषण के वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं. वीडियो क्लिप में मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा और हिन्दुओं को हथियार उठाने के लिए कहा जा रहा है.

गुरुवार को इस मामले में उत्तराखंड पुलिस ने वसीम रिज़वी उर्फ़ जितेंद्र नारायण त्यागी समेत अन्य लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है. वसीम रिज़वी उत्तर प्रदेश सेंट्रल शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन थे. रिज़वी ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि उन्होंने इस्लाम छोड़ हिन्दू धर्म अपना लिया है. हरिद्वार की धर्म संसद में रिज़वी की क्या भूमिका थी, ये स्पष्ट नहीं है.

इसी वीडियो क्लिप को शेयर करते हुए सोशल मीडिया पर विदेश के लोग भी भारत सरकार को आड़े हाथों ले रहे हैं.

इसके अलावा विदेशी मीडिया में इसे अच्छी ख़ासी कवरेज मिली है. यति नरसिम्हानंद के लिए यह पहली बार नहीं है, जब उन्होंने मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा की बात कही है. इससे पहले वो पैग़ंबर मोहम्मद पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं.

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ब्रिटेन की सांसद नाज़ शाह ने मुसलमानों के ख़िलाफ़ नफ़रत वाले हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यक्रम का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, ''यह 1941 का नाज़ी जर्मनी नहीं है. यह 2021 का भारत है. मुसलमानों को मारने की अपील की जा रही है. यह अब हो रहा है. जो इसे अतिवादी समूह कह रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि हिटलर ने भी शुरुआत ऐसे ही की थी. इस मामले में वैश्विक विरोध कहाँ है?''

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वहीं बाइलाइन टाइम्स के विदेशी संवाददाता सीजे वरलेमन ने दिल्ली में हिन्दू युवा वाहिनी के कार्यक्रम का वीडियो क्लिप ट्विटर पर पोस्ट किया है. इस क्लिप में कट्टर हिन्दूवादी नेताओं के भाषण का अंग्रेज़ी में अनुवाद भी है. वरलेमन ने वीडियो क्लिप की एक लाइन अंग्रेज़ी में लिखी है- हिन्दू राष्ट्र के लिए हम लड़ने और मारने के लिए तैयार हैं.

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न्यू जर्सी स्थित रकर्स यूनिवर्सिटी में दक्षिण एशियाई इतिहास की प्रोफ़ेसर ऑड्री ट्रुश्के ने भी इससे जुड़ी ख़बर को ट्वीट करते हुए लिखा है, ''एक समाज जनसंहार को रोकना चाहता है. इससे जुड़े कार्यक्रमों को रोका जाता है और गिरफ़्तारियां होती हैं ताकि फिर से ना हो. मोदी के भारत में? बीजेपी के नेता ऐसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं और कोई गिरफ़्तारी नहीं होती है.''

धर्म संसद

17 से 19 दिसंबर तक हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में दिल्ली बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय भी शामिल हुए थे. इसी धर्म संसद के वीडियो में दिख रहा है कि हिन्दुत्ववादी नेता और साधु, मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिन्दुओं से हथियार उठाने की अपील कर रहे हैं.

दिल्ली बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने कोलकाता से प्रकाशित अंग्रेज़ी दैनिक टेलिग्राफ़ से कहा है कि वह धर्म संसद में केवल 19 दिसंबर को 30 मिनट के लिए थे और उनके सामने नफ़रत भरा कोई भाषण नहीं दिया गया था. इसी साल अगस्त महीने में उपाध्याय को दिल्ली के जंतर मंतर पर मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा फैलाने वाले नारे लगाने के मामले में कुछ समय के लिए गिरफ़्तार किया गया था.

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पाकिस्तान के जाने-माने पत्रकार हामिद मीर ने हरिद्वार के घटना का वीडियो क्लिप रीट्वीट करते हुए लिखा है, ''यह महिला भारतीय मुसलमानों के ख़िलाफ़ खुलेआम हिंसा के लिए उकसा रही है. यह हिटलर की महिला संस्करण है, जो निकट भविष्य में जनसंहार को अंजाम देने की योजना बना रही है. यह महिला साबित कर रही है कि मोहम्मद अली जिन्ना बिल्कुल सही थे कि उन्होंने मुसलमानों के लिए अलग पाकिस्तान बनाया. शुक्रिया जिन्ना साहब.''

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हरिद्वार का वीडियो क्लिप रीट्वीट करते हुए इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने लिखा है, ''आईएमसीए हिन्दू राष्ट्रवादियों की भारत में मुसलमानों के जनसंहार की अपील की निंदा करता है. पिछले दिनों हिन्दू अतिवादी नेताओं ने धर्म संसद का आयोजन किया और इसमें मुसलमानों के ख़िलाफ़ हथियार उठाने की अपील की गई है.''

तुर्की के सरकारी प्रसारक टीआरटी ने भी इसे लेकर ख़बर प्रकाशित की है. टीआरटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''सत्ताधारी नरेंद्र मोदी की सरकार से जुड़े कट्टर दक्षिणपंथी समूह के नेताओं ने भारत में अल्पसंख्यकों के सफ़ाए की अपील की है. ख़ासकर भारत के 20 करोड़ मुसलमानों को निशाने पर लिया गया है.''

टीआरटी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''30 जनवरी, 1948 को गोडसे ने गांधी की हत्या की थी और उनका जुड़ाव भी हिन्दुत्व की विचारधारा से ही था. भारत में लव-जिहाद के नाम पर भी मुसलमानों को निशाना बनाया गया है. इसके अलावा दिल्ली से सटे गुड़गाँव में मुसलमानों को खुले में नमाज़ नहीं पढ़ने दिया जा रहा है.''

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केंद्र सरकार पर निशाना

द विल्सन सेंटर में साउथ एशिया असोसिएट और लेखक माइकल कगलमैन ने ट्वीट कर लिखा है, ''पिछले हफ़्ते भारत में तीन दिन का एक विशुद्ध नफ़रत फैलाने वाला कार्यक्रम हुआ. इसमें अल्पसंख्यकों के प्रति हिंसा के लिए भी उकसाया गया. यह डरावना है. लेकिन सरकार की ओर से कोई सख़्ती या निंदा नहीं है. दुखद सच्चाई यह है कि बहरा करने वाली चुप्पी कम से कम हैरान करने वाली नहीं है. इसमें एक वक्ता सत्ताधारी बीजेपी का था और बाक़ी लोग भी बीजेपी से जुड़े हुए हैं.''

माइकल के इस ट्वीट को पाकिस्तान के सूचना मंत्री फ़वाद चौधरी ने भी रीट्वीट किया है. पाकिस्तान के सभी अख़बारों ने इसे प्रमुखता से छापा है. अंग्रेज़ी अख़बार डॉन और एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने मोदी सरकार पर भारत के मुसलमानों से भेदभाव का आरोप लगाया है.

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मोदी राज में मुसलमानों के साथ भेदभाव की एक रिपोर्ट फ़्रांस की न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी ने भी प्रकाशित की है. एएफ़पी की रिपोर्ट में कहा गया है, ''नमाज़ के लिए जगह नहीं है. गुड़गाँव में जगह की कमी के कारण मुसलमान खुले में नमाज़ नहीं पढ़ पा रहे हैं. 2014 में मोदी ने आने से कट्टर हिन्दूवादियों को प्रोत्साहन मिला है और इन्हें लगता है कि यह हिन्दू राष्ट्र है और मुसलमानों के लिए जगह नहीं है.''

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