मुस्लिम देशों के संगठन OIC पर भारत का पलटवार

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असम की घटना को लेकर इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (OIC) की निंदा के बाद इस पर भारत सरकार का बयान आया है और उसने OIC की ओलचना की है.
शुक्रवार रात भारत के विदेश मंत्रालत के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने एक सवाल के जवाब में यह बयान जारी किया है.
भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि भारत बेहद खेदपूर्ण तरीक़े से यह बताना चाहता है कि OIC ने भारत के आंतरिक मामले पर एक बार फिर टिप्पणी की है, जिसमें उसने भारत के राज्य असम की एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर तथ्यात्मक रूप से ग़लत और भ्रामक बयान जारी किया है.
इसके साथ ही बयान में कहा गया है कि भारत इस संबंध में उचित क़ानूनी कार्रवाई कर रहा है.

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बयान में लिखा है, "यहाँ यह दोहराया जाता है कि OIC को भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का कोई अधिकार नहीं है और उसे अपने मंच को निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देना चाहिए."
इसके बाद बयान की समाप्ति पर भारत ने OIC को चेताते हुए कहा है कि 'भारत सरकर इन सभी निराधार बयानों को ख़ारिज करती है और आशा करती है कि इस तरह के बयान भविष्य में नहीं दिए जाएंगे.'
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OIC ने क्या कहा था
मुस्लिम देशों के संगठन OIC ने भारत के पूर्वोत्तर राज्य असम के दरंग ज़िले में पिछले महीने सरकारी ज़मीन से 'अतिक्रमण हटाओ अभियान' के तहत सैकड़ों मुस्लिम परिवारों को कथित तौर पर बेदख़ल करने के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को 'व्यवस्थागत हिंसा और उत्पीड़न' कहा था.

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इस कार्रवाई के दौरान दो स्थानीय मुसलमान नागरिकों की मौत हुई थी. इसका एक भयावह वीडियो भी सामने आया था.
गुरुवार शाम को ट्विटर पर जारी बयान में OIC ने इस मामले की मीडिया कवरेज को शर्मनाक बताते हुए भारत सरकार से ज़िम्मेदारी भरे बर्ताव की अपील की थी.
OIC ने अपने बयान में भारत सरकार से मुसलमान अल्पसंख्यकों को सुरक्षा मुहैया कराने और उनके सभी धार्मिक और सामाजिक मौलिक अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है.
बयान में यह भी कहा गया था कि राष्ट्रीय संप्रभुता के भीतर किसी मुद्दे को सुलझाने का सबसे बेहतरीन ज़रिया आपसी बातचीत ही है.
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विदेशी मीडिया ने क्या कहा
असम की घटना की OIC ही नहीं बल्कि विदेशी मीडिया ने भी इसकी कड़ी निंदा की है.
ब्रिटेन के अख़बार फ़ाइनैंशियल टाइम्स ने इस घटना की तुलना अमेरिका के जॉर्ज फ़्लॉयड हत्या मामले से की है.
अख़बार लिखता है कि इस तरह की बर्बर घटना ख़राब पुलिस ट्रेनिंग और किसी सनकी व्यक्ति के अनैतिक व्यवहार की ओर इशारा करती है.
अख़बार ने लिखा है, "जिस तरह से मिनीपोलिस में एक पुलिस अफ़सर के हाथों जॉर्ज फ़्लॉयड के मारे जाने की घटना अमेरिका की जड़ों में समा चुकी नस्लीय असमानता और पुलिस हिंसा को दिखाता है, वहीं असम में हुई बर्बरता भारत में बढ़ रही नफ़रत, हिंसा और सज़ा से माफ़ी को दिखाता है."

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अख़बार ने लिखा है, "1947 के बँटवारे के बाद भारत धार्मिक आधार से कभी ऊपर नहीं उठ सका और यहाँ पर सांप्रदायिक पूर्वाग्रह बहुत गहरे पैठ बनाए हुए हैं. पहले राजनीतिक नेताओं ने कटुता को कम करने की कोशिशें की हैं, जिसमें सांप्रदायिक सौहार्द और विविधता में एकता को लेकर सार्वजनिक अभियान चलाए गए हैं. लेकिन दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी संगठन और सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी ने पुरानी नफ़रतों को हवा दी है, हिंदू बहुसंख्यकों के आगे मुसलमान अल्पसंख्यकों का एक ख़तरे के रूप में चित्रण किया गया है और इसके इलाज के तौर पर हिंसक उपायों को सुझाया गया है."
ब्रितानी अख़बार ने इसके अलावा भारत में 'लव जिहाद', 'कोरोना जिहाद', दिल्ली दंगों, छत्तीसगढ़ में बीते सप्ताह हिंदूवादी संगठनों द्वारा की गई हिंसा, किसान अंदोलन, अनुच्छेद 370 आदि का ज़िक्र भी किया है.
अख़बार लिखता है कि नफ़रत, ख़ून-ख़राबा और मातम के इस भयानक चक्र को समाप्त करने के कोई लक्षण नज़र नहीं आ रहे हैं.
असम की घटना का उल्लेख खाड़ी देश के मीडिया 'अल-जज़ीरा' ने भी अपनी ख़ास रिपोर्ट में किया है.
दरंग से की गई अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में अल-जज़ीरा ने इस घटना के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला है.

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इस घटना में मारे गए मोईनुल हक़ के छोटे भाई एईनुद्दीन कहते हैं कि उनके भाई के सीने में 'पुलिस ने गोली मारी थी और फ़ोटोग्राफ़र उनके सीने पर कूद रहा था जबकि वो मर चुके थे.'
अल जज़ीरा लिखता है कि असम सरकार की बागडोर हिंदू राष्ट्रवादी संगठन भारतीय जनता पार्टी के हाथों में है, उसने इस घटना की न्यायिक जांच की घोषणा की है और इस घटना से सिविल सोसाइटी को बड़ा झटका लगा है.
इस रिपोर्ट में आगे लिखा है कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने दावा किया है कि गाँव के लोगों ने पहले पुलिस पर लाठी और कुल्हाड़ी से हमला किया था और हिंसा एक साज़िश का परिणाम है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया था कि गाँव के लोगों को बाहर के लोगों ने भड़काया था.
अल जज़ीरा लिखा है कि मुख्यमंत्री सरमा ने इस घटना के दावों को लेकर कोई सबूत पेश नहीं किया. हालांकि पुलिस ने हिंसा के लिए उकसाने के लिए दो स्थानीय लोगों को ज़रूर गिरफ़्तार किया है.

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असम में क्या हुआ था
असम के दरंग ज़िले के तीन नंबर धौलपुर गांव में 23 सितंबर को 'अवैध अतिक्रमण' हटाने की पुलिस कार्रवाई के दौरान हिंसक झड़प देखने को मिली थी, जिसमें दो लोगों की मौत हुई थी.
इसमें से एक शख़्स की मौत कथित तौर पर पुलिस की गोली से लगने से हुई थी. प्रशासन के दावे के मुताबिक इस घटना में आठ पुलिसकर्मी घायल हुए थे.
इस घटना का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें मोइनुल हक़ के गिर जाने के बाद एक फ़ोटोग्राफ़र उसके सीने पर कूद रहा है. बिजॉय बनिया नामक फ़ोटो ग्राफ़र स्थानीय प्रशासन के साथ ही घटना की वीडियो ग्राफ़ी कर रहा था, जिसे बाद में हिरासत में ले लिया गया.
राज्य सरकार ने इस मामले की जाँच के आदेश दिए हैं. असम सरकार के गृह विभाग ने कहा है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज के नेतृत्व में जांच कराई जाएगी. जाँच में घटनाओं की परिस्थितियों का पता लगाया जाएगा.
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