प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक का मामला, गृह मंत्रालय ने बनाई जांच कमेटी, केंद्र सरकार ने कहा-उठाएंगे कड़े कदम

प्रधानमंत्री का काफिला

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक के मामले की जांच के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक कमेटी बनाई है. गृह मंत्रालय ने गुरुवार को जानकारी दी कि इस तीन सदस्यीय समिति से कहा गया है कि वो जल्दी से जल्दी अपनी रिपोर्ट दे.

गृह मंत्रालय ने बताया, "तीन सदस्यों वाली इस कमेटी सुधीर कुमार सक्सेना, सचिव (सिक्योरिटी), कैबिनेट सेक्रेटेरियट, इंटेलीजेंस ब्यूरो के संयुक्त निदेशक बलबीर सिंह और एसपीजी के आईजी एस सुरेश शामिल हैं. समिति का नेतृत्व सुधीर कुमार करेंगे. "

इसके पहले, गृह मंत्रालय ने बुधवार को जानकारी दी कि पंजाब में प्रधानमंत्री 'नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में चूक हुई है और इस कारण वो फ़िरोज़पुर की रैली में नहीं जा सके.'

गृह मंत्रालय के मुताबिक, ''हुसैनीवाला से 30 किलोमीटर पहले पीएम का काफ़िला एक फ़्लाईओवर पर पहुँचा तो पाया गया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़क जाम कर रखी है. प्रधानमंत्री फ्लाईओवर पर 15 से 20 मिनट तक फँसे रहे. यह प्रधानमंत्री की सुरक्षा में बड़ी चूक थी.'' गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से रिपोर्ट देने को भी कहा था.

इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "प्रधानमंत्री के दौरे की सुरक्षा प्रक्रिया में ऐसी लापरवाही पूरी तरह नाक़ाबिले बर्दाश्त है और इसमें जवाबदेही तय की जाएगी. "

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा में हुई चूक पर चिंता जाहिर की.

पंजाब की चरणजीत सिंह चन्नी सरकार ने भी इस मामले की जांच कराने का एलान किया है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई है जिस पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है.

वहीं, इस मामले पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाज़ी और आरोपों का दौर भी जारी है तो बहुजन समाज पार्टी नेता मायावती ने कहा है कि ऐसे 'गंभीर मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए.'

भारत सरकार

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'केंद्र कड़े फ़ैसले लेगा'

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने गुरुवार शाम एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि पंजाब में जो हुआ, उसके बारे में केंद्र सरकार पूरी सूचना जुटा रही है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट मंगाई है.

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस मामले में ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ जितना ज़रूरी होगा, वैसे 'बड़े और कड़े कदम उठाएगी.'

अनुराग ठाकुर ने कहा, ''पीएम की सुरक्षा में कल पंजाब में बड़ी चूक हुई. इस मामले में कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट गए हैं. देश की न्यायपालिका सबको न्याय देगी.''

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, गुरुवार को सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके अदालत से अनुरोध किया कि उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई की जाए.

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याचिका में उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच होनी चाहिए ताकि ऐसा दोबारा न हो.

सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट सिंह से अपनी याचिका की कॉपी को केंद्र और पंजाब सरकारों को भी देने को कहा. इस मामले में शुक्रवार को सुनवाई हो सकती है.

राष्ट्रपति

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राष्ट्रपति से मिले पीएम

इस बीच, पीएम मोदी ने गुरुवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाक़ात की. इस मुलाक़ात के दौरान राष्ट्रपति कोविंद ने सुरक्षा चूक पर चिंता जाहिर की.

राष्ट्रपति भवन ने ट्विटर पर जानकारी दी, ''राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आज राष्ट्रपति भवन में मुलाक़ात की. और कल पंजाब में उनके काफ़िले के साथ हुई सुरक्षा चूक की जानकारी ली. राष्ट्रपति ने इस गंभीर चूक पर अपनी चिंता व्यक्त की है.''

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बाद में प्रधानमंत्री मोदी के ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट में कहा गया, ''राष्ट्रपति जी से मुलाक़ात की. उनकी ओर से जाहिर की गई चिंता के उनका धन्यवाद. उनकी शुभकामनाओं के लिए आभारी हूं, जो हमेशा ताक़त का स्रोत होती है.''

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उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी गुरुवार को पीएम मोदी से बात की और सुरक्षा में चूक होने पर गंभीर चिंता जताई.

उन्होंने ट्वीट करके उम्मीद जाहिर की कि इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाए जाएंगे ताकि आगे फिर कभी ऐसी घटना न हो.

चरणजीत सिंह चन्नी

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पंजाब सरकार ने बनाई जांच समिति

उधर, पंजाब की चरनजीत सिंह चन्नी सरकार ने गुरुवार को इस मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का एलान किया.

इस समिति में जस्टिस (रिटायर्ड) मेहताब सिंह गिल, ज​स्टिस अनुराग वर्मा और राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव शामिल हैं. सरकार ने बताया है कि केवल तीन दिनों के भीतर यह समिति अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप देगी.

इससे पहले बुधवार को सीएम चन्नी ने कहा था, "प्रधानमंत्री के वापस लौटने पर मुझे खेद है. कुछ लोग वहां अचानक से विरोध-प्रदर्शन करने चले गए थे. इसमें कोई साज़िश जैसी बात है तो वे इस पूरे मामले की जांच कराएंगे."

जानकारों के मुताबिक़, केंद्र सरकार और बीजेपी ने जिस तरीक़े से इस मामले को उठाया है, उससे राज्य सरकार पर काफ़ी दबाव बन गया है और जांच के लिए समिति बनाकर राज्य सरकार इस दबाव को कम करने की कोशिश में है.

मायावती

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'राजनीति उचित नहीं'

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी से गुरुवार को पूरे मामले पर जानकारी लेने की ख़बरें भी आईं.

इस पर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता स्मृति इरानी ने सवाल उठाया.

स्मृति इरानी ने इसे दिखावा बताते हुए कहा, "'क्या वो जश्न आलाकमान के कहने पर मनाया जा रहा था? किसने आदेश दिया मुख्यमंत्री पंजाब को?"

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि लोग इस मामले को लेकर 'कांग्रेस को कभी माफी नहीं करेंगे.'

वहीं, बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान जो सुरक्षा चूक हुई, वो बहुत निंदनीय है और इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

मायावती ने ट्वीट कर कहा है कि इस घटना को गंभीरता से लेना चाहिए और इसकी जांच इसलिए ज़रूरी है ताकि दोषियों को सज़ा मिले और आगे ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.

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उन्होंने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के चलते इस मामले पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि राजनीति को विराम देकर मामले की गंभीरता के अनुसार निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए.

किसान नेता राकेश टिकैत ने भी इस मामले पर टिप्पणी की है और पूरी घटना पर सवाल उठाए हैं.

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बघेल

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छत्तीसगढ़ के सीएम ने पूछा- क्या किसानों पर गोली चला दी जाए?

उधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने गुरुवार को इस मामले को लेकर सवाल उठाए और पूछा कि क्या धरने पर बैठे किसानों पर गोली चलवा दें?

उन्होंने कहा कि देश पहले है और पार्टियां बाद में, इसलिए पीएम की सुरक्षा सबसे प्राथमिकता है और उसमें कोई चूक नहीं होनी चाहिए. बघेल ने तीन सवाल किए.

उन्होंने सबसे पहला सवाल किया कि क्या मौसम ख़राब होने की जानकारी मिली या नहीं. और यदि नहीं मिली तो ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई हो रही है.

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दूसरा सवाल कि जिन्होंने पीएम का कार्यक्रम बनाया, उन्होंने उन्हें हेलीकॉप्टर से ले जाने की बात तब भी क्यों सोची जब मौसम ख़राब था.

तीसरा प्रश्न ये कि पीएम ने दिल्ली से निकलते ही ये सूचना क्यों नहीं दी कि कि वे सड़क मार्ग से जाएंगे. उन्होंने सड़क से जाने का फ़ैसला एयरपोर्ट पहुंचकर क्यों लिया. उन्होंने पूछा कि पाकिस्तान बोर्डर से केवल 10 किलोमीटर की दूरी पर हमारी सुरक्षा एजेंसियां ऐसा रिस्क क्यों ले रही हैं और उनके ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई की जा रही है.

कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने क्या कहा?

सवाल कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भी उठाए. उन्होंने कहा, " प्रधानमंत्री की सुरक्षा देखने का काम संसद करती है. प्रधानमंत्री और उनके नजदीकी परिजन की सुरक्षा के लिए बहुत बढ़िया तय प्रकिया है. यदि उनकी सुरक्षा में कहीं कोई चूक हुई है तो हाई कोर्ट के मौजूदा जज से मामले की जांच होनी चाहिए."

कॉपी: चंदन शर्मा

वीडियो कैप्शन, पीएम मोदी जब बजाने लगे ढोल

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