गलवान पर है भारत का ही झंडा- नरेंद्र मोदी सरकार के मंत्रियों का जवाब, राहुल गांधी से पूछा- चीन का समर्थन क्यों?

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद प्रधान ने मंगलवार को कहा कि गलवान पर 'भारत का ही झंडा है.' विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन ने भी तस्वीर जारी करते हुए बताया है कि नए साल के मौके पर 'भारतीय सेना के जवानों ने गलवान घाटी में तिरंगा लहराया.'
धर्मेंद्र प्रधान ने एक सवाल भी किया है, " चीनी प्रोपेगेंडा का समर्थन राहुल गांधी किस मजबूरी में करते हैं."
प्रधान ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से समाचार एजेंसी एएनआई के ट्वीट को रीट्वीट किया है.
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एनएनआई ने अपने इस ट्वीट में तिरंगे झंडे के साथ भारतीय सैनिकों की दो तस्वीरें पोस्ट की हैं और लिखा है, " नए साल पर गलवान घाटी में भारतीय सेना के जवान. " एनएनआई ने इन तस्वीरों का क्रेडिट 'सुरक्षा तंत्र के सूत्रों' को दिया है.
विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने भी तिरंगे के साथ भारतीय सैनिकों की तीन तस्वीर जारी की हैं. उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, "नए साल 2022 के मौके पर गलवान घाटी में भारतीय सेना के बहादुर जवान. "
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बीजेपी के कई नेताओं ने भी तिरंगे के साथ भारतीय सैनिकों की तस्वीर पोस्ट की है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से सवाल पूछे हैं.

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राहुल गांधी के सवाल
दरअसल, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने दो जनवरी को ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ट्वीट किया था.
राहुल गांधी ने लिखा था, "गलवान पर हमारा तिरंगा ही अच्छा लगता है. चीन को जवाब देना होगा. मोदी जी, चुप्पी तोड़ो! "
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भारत और चीन के सैनिकों के बीच जून 2020 में हुए संघर्ष के बाद से लद्दाख की गलवान घाटी चर्चा में रही है. विपक्षी दल इसे लेकर लगातार केंद्र सरकार से सवाल पूछते रहे हैं.
राहुल गांधी ने मंगलवार को भी एक ट्वीट किया और प्रधानमंत्री की 'चुप्पी' पर सवाल उठाए. उन्होंने अपने ट्वीट के साथ एक न्यूज़ रिपोर्ट का हिस्सा भी पोस्ट किया.
इस रिपोर्ट में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा के करीब पैंगोंग झील में चीन की ओर से कथित तौर पर पुल बनाए जाने की जानकारी दी गई है. कांग्रेस पार्टी ने भी मंगलवार को इसे लेकर केंद्र सरकार से सवाल पूछे हैं.
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चीनी अख़बार का दावा
गलवान घाटी में झंडा फहराने को लेकर सोमवार को कांग्रेस के दूसरे नेताओं और अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से सवाल पूछे थे.
दरअसल, एक जनवरी को चीन के अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की. इस रिपोर्ट में दावा किया गया गया कि नए साल के मौक़े पर गलवान घाटी में चीन का झंडा फहराया गया.
रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 2022 के पहले दिन,देश भर में चीन का पाँच सितारों वाला लाल झंडा फहराया गया. इनमें 'हॉंगकाँग का विशेष प्रशासित क्षेत्र और गलवान घाटी' भी शामिल थे. ग्लोबल टाइम्स को चीन की सत्ताधारी चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माना जाता है.
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इसके बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के दूसरे नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से सवाल पूछे.
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को कहा, "चीन का ये दुस्साहस कि वो ये कहें कि हम चीन का झंडा गलवान वैली पर लहराएंगे और प्रधानमंत्री (नरेंद्र) मोदी जी और मोदी सरकार चुप रहे. कहां है रक्षा मंत्री? कहां हैं प्रधानमंत्री? देश जानना चाहता है."

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'चीन को लेकर पर्देदारी क्यों?'
कई और दलों ने भी इसे लेकर सवाल उठाए. राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा ने कहा कि सरकार चीन को लेकर बहुत सी बातें पर्दे में रख रही है.
मनोज झा कहा, "चीन के बरक्स हमारी नीति ढुलमुल होती जा रही है. मुझे कहने में कोई संकोच नहीं कि ये वही देश था कि 1962 में युद्ध के मध्य संसद में खुलकर चर्चा हुई थी. आज पर्दादारी होती है. अरुणाचल प्रदेश में कई इलाकों के नाम बदल दिए. और हमारे लोग कहां लगे हुए हैं, फ़ैजाबाद अयोध्या, मुगलसराय, दीनदयाल उपाध्याय, सड़कों के नाम, अरे आप देखिए तो चुनौती कितनी बड़ी है,उस चुनौती के बरक्स वो लाल आंखें, किसानों के लिए दिखी थीं मुझे सरहद पर नहीं दिख रही. "
ग्लोबल टाइम्स ने दिसंबर में एक रिपोर्ट छापी थी जिसके मुताबिक चीन के नागरिक मामलों के मंत्रालय ने घोषणा थी कि उसने जांगनान (अरुणाचल प्रदेश का चीनी नाम) के 15 स्थानों के नामों को चीनी, तिब्बती और रोमन में जारी किया है.
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर सख़्त आपत्ति जताई थी और कहा कि अरुणाचल प्रदेश हमेशा से भारत का अभिन्न अंग रहा है और आगे भी रहेगा.
विदेश मंत्रालय ने इस बारे में आई रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चीन ऐसा पहले भी कर चुका है, मगर इससे तथ्य नहीं बदल जाते.

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बीजेपी नेता क्या बोले?
गलवान घाटी में झंडा फहराने को लेकर ग्लोबल टाइम्स के हालिया दावे के बाद सोमवार (3 जनवरी) को ही कुछ मीडिया रिपोर्ट में भारतीय सैन्य सूत्रों के हवाले दावा किया गया था कि चीन ने 'अपने अधिकार क्षेत्र में ही झंडा फहराया था.'
वहीं, मंगलवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के प्रमुख मंत्रियों ने मोर्चा खोला और गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों की तिरंगा लहराते हुए तस्वीरें पोस्ट कीं.
बीजेपी के कई सीनियर नेताओं ने भी तस्वीरें पोस्ट कीं.
बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने भारतीय सैनिकों की तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की और अभिनेता अमिताभ बच्चन की फ़िल्म 'मैं आज़ाद हूं' के एक गाने की दो लाइनें भी लिखीं.
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उन्होंने लिखा, "इतने बाज़ू इतने सर गिन ले दुश्मन ध्यान से, हारेगा वो हर बाज़ी जब खेले हम जी जान से. देश की आन बान शान हमारा तिरंगा गलवान घाटी में ही नहीं पूरे देश में शान से लहरा रहा है. "
उधर, बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लिया.
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संबित पात्रा ने ट्विटर पर लिखा, " गलवान में तिरंगा है, यह राहुल को खलता है. राहुल एंड कंपनी घबराओ मत! मोदी जी के नेतृत्व में देश की हर घाटी पर भारतीय सेना के वीर जवानों द्वारा तिरंगा गर्व से लहराया जा रहा है."

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कांग्रेस ने पूछा- लाल आंख क्यों नहीं?
वहीं, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने लद्दाख की पैंगोंग झील पर चीन की ओर से कथित तौर पर पुल बनाए जाने का मुद्दा उठाया और सरकार से सवाल पूछे.
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कांग्रेस पार्टी की ओर मंगलवार को ट्विटर पर लिखा गया , "सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि पैंगोंग झील सहित पूरे अक्साई चीन को सड़कों- पुलों से चीन पाट रहा है. चीन ने जो पुल बनाया है वह पैंगोंग झील के दोनों किनारों को जोड़ता है, झील के ऊपर पुल बन जाने से चीनी सैनिकों और रसद को वहां पहुंचने के कई रास्ते खुल जाएंगे."
कांग्रेस ने सवाल किया, " न 'लाल आंख', न 'कड़ी निंदा' आखिर क्यों?"
'खुली छूट मिले'
वहीं, पूर्व मंत्री मिलिंद देवड़ा ने कहा है कि चीन को जवाब देने के लिए 'सेना को खुली छूट' मिलनी चाहिए.
चीन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, "(भारतीय) जवानों के साथ 140 करोड़ भारतीयों का पूरा भरोसा है. "उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, "चीन की आक्रामकता का जवाब देने के लिए भारतीय जवानों को खुले हाथ दिए जाने चाहिए."
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देवड़ा ने इसी ट्वीट में चीन के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीन की विश्वसनीयता तले में है. वजह ये है कि कोविड-19 की शुरुआत के मामले पर स्थिति साफ़ करने से वो इनकार करता रहा है. "

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भारत-चीन तनाव
भारत और चीन के बीच सीमा पर साल 2020 में गंभीर स्थिति पैदा हो गई.
एक मई 2020 को दोनों देशों के सौनिकों के बीच पूर्वी लद्दाख के पैंगोंग त्सो झील के नॉर्थ बैंक में झड़प हुई थी. इसमें दोनों ही पक्षों के दर्जनों सैनिक घायल हो गए थे.
इसके बाद 15 जून को गलवान घाटी में एक बार फिर दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई. इसमें दोनों तरफ़ के कई सैनिकों की मौत हुई थी.
गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हुई.
आख़िरकार दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हुई सहमति के बाद फ़रवरी 2021 में डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू की गई.
अभी तक दोनों देशों के बीच 13 दौर की सैन्य वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई बड़ा नतीजा सामने नहीं आया है.
चीन का दावा
चीन का पहले से ही लद्दाख के पूर्वी इलाक़े अक्साई चिन पर नियंत्रण है.
चीन लगातार यह कहता आया है कि मौजूदा हालात के लिए लद्दाख को लेकर भारत सरकार की आक्रामक नीति ज़िम्मेदार है जबकि भारत का कहना है कि उसने एलएसी पर एकतरफ़ा कार्रवाई करते हुए यथास्थिति बदल दी है.
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