राजस्थानः अलवर में बुलडोज़र से मंदिर तोड़े जाने पर बीजेपी-कांग्रेस में घमासान, क्या है पूरा मामला

राजस्थान, अरवल

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    • Author, मोहर सिंह मीणा
    • पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए

राजस्थान में दो अप्रैल को करौली में हुई सांप्रदायिक हिंसा का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब अलवर ज़िले में बुलडोज़र से मंदिर तोड़ने के मामले से विवाद हो गया है.

दरअसल, 22 अप्रैल, 2022 के दिन एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. वीडियो में बुलडोजर से एक मंदिर को तोड़ते हुए दिखाया जा रहा है.

ये वीडियो राजस्थान के अलवर ज़िले में राजगढ़ नगर पालिका की ओर से हुई कार्रवाई का है.

अलवर ज़िले के राजगढ़ में 17 और 18 अप्रैल को नगर पालिका ने सड़क चौड़ी कर गौरव पथ बनाने के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की.

इस दौरान राजगढ़ मेला के चौराहे से गोल चक्कर तक की सड़क के दोनों ओर से मकान, दुकान और तीन मंदिरों समेत कऱीब 85 इमारतों को बुलडोजर से ध्वस्त किया गया. इस कार्रवाई के पांच दिन बाद तक किसी तरह की चर्चा और ना ही किसी तरह का विरोध सामने आया.

लेकिन, वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ा. भारतीय जनता पार्टी के राज्य से लेकर दिल्ली तक के नेताओं ने प्रतिक्रिया दी.

बीजेपी ने इस कार्रवाई का विरोध किया और मंदिर पर बुलडोजर की कार्रवाई के लिए राज्य की अशोक गहलोत सरकार को दोषी ठहरा रही है.

बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं और उन्होंने आपसी सौहार्द बिगाड़ने और मंदिर तोड़ने की घटना के लिए बीजेपी को ज़िम्मेदार बताया.

बीजेपी के राज्य सभा सांसद डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा शुक्रवार रात राजगढ़ पुलिस थाने में

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बीजेपी कांग्रेस का आरोप-प्रत्यारोप

22 अप्रैल की शाम में मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ा. दोनों ही पार्टियों के नेताओं ने प्रेस वार्ता कर एक दूसरे पर आरोप लगाए.

इस बीच बीजेपी के राज्यसभा सांसद डॉक्टर किरोड़ी लाल मीणा राजगढ़ पहुंच गए. दोषियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर रात से ही राजगढ़ पुलिस थाने के बाहर धरने पर बैठ गए हैं.

मामला गहराता देख अलवर ज़िला कलेक्टर शिवप्रसाद नकाते और राजगढ़ एसडीएम केशव कुमार मीणा ने 22 अप्रैल की शाम ही तथ्यात्मक रिपोर्ट ज़िक्र करते हुए कहा कि नगर पालिका की सर्वसाधारण सभा की दूसरी बैठक में निर्णय के आधार पर ही नगर पालिका ने यह कार्रवाई की है.

इस पूरे मामले में राजगढ़ पुलिस को एक परिवाद दिया गया है जिसकी जांच जारी है.

राजगढ़ थानाध्यक्ष विनोद शर्मा ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "इस मामले में अभी कोई एफ़आईआर दर्ज नहीं की गई है. एक परिवाद दिया गया है, जिसकी जांच जारी है."

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राजगढ़ नगर पालिका में बीजेपी

अलवर ज़िला मुख्यालय से राजगढ़ क़रीब चालीस किलोमीटर दूर है. यहां राजगढ़ नगर पालिका में 35 पार्षद सीट हैं. इसमें बीजेपी के 24 पार्षद हैं और 10 निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन बीजेपी को ही है. जबकि कांग्रेस का एक पार्षद है.

34 पार्षदों के समर्थन के साथ नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी के बोर्ड में सतीश दुहरिया चेयरमैन हैं.

चेयरमैन सतीश दुहरिया ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "कांग्रेस बीजेपी की बोर्ड को बदनाम कर रही है. यह गौरव पथ बनाने के लिए अतिक्रमण हटाने का निर्णय सर्व सम्मति से लिया गया था. बैठक में कांग्रेस के राजगढ़ विधायक जौहरी लाल मीणा और एसडीएम भी मौजूद थे."

उन्होंने कहा, "जिस दिन यह कार्रवाई हुई थी मैं राजगढ़ में था ही नहीं. बताया जा रहा है कि तीन मंदिरों को तोड़ा गया है."

चेयरमैन सतीश से पूछे गए सवाल कि बीजेपी तोड़े गए शिव मंदिर को तीन सौ साल पुराना होने का दावा कर रही है. क्या कोई आधिकारिक जानकारी है. वे कहते हैं, "शिव मंदिर को तीन सौ साल पुराना बताया जाता है. इस से संबंधित कोई आधिकारिक जानकारी तो मौजूद नहीं है."

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राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश

नगर पालिका की दूसरी सर्वसाधारण सभा में 8 सितंबर 2021 को सर्वसम्मति से हुए निर्णय के आधार पर ही अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई है.

बीजेपी के बोर्ड वाले नगर पालिका के निर्णय पर हुई इस कार्रवाई के बाद अब भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस भी मुखर हो गई है और बीजेपी को इस मुद्दे पर घेर रही है.

हालांकि, अपने ही बोर्ड वाले नगर पालिका की कार्रवाई में तोड़े गए मंदिर पर बीजेपी बैकफुट पर है.

लेकिन, पूरे मामले को देखें तो बीजेपी ज़रूर अशोक गहलोत सरकार पर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास कर रही है.

तोड़े गए शिव मंदिर को बीजेपी तीन सौ वर्ष पुराना होने का दावा कर रही है. हालांकि, इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है.

वसुंधरा राजे सरकार के दौरान राजधानी जयपुए में भी हुए विकास कार्यों के दौरान बड़ी संख्या में मंदिर हटाए गए थे. अब कांग्रेस ने उस दौरान हुई कार्रवाई पर भी बीजेपी पर हमला बोला है.

अलवर ज़िला कलेक्टर शिवप्रसाद नकाते

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ज़िला प्रशासन की रिपोर्ट

मामला बढ़ता देख ज़िला प्रशासन ने एक तथ्यात्मक रिपोर्ट सार्वजनिक की है.

अलवर ज़िलाधिकारी शिवप्रसाद नकाते ने बीबीसी से कहा, "राजगढ़ नगर पालिका चेयरमैन की सर्व साधारण सभा में यह निर्णय लिया गया कि अतिक्रमण हटाने हैं. इसमें चाहें मंदिर आएं या दुकानें आएं. सर्व साधारण सभा की बैठक के मिनट्स हमारे पास हैं."

प्रशासन की रिपोर्ट में बताया गया कि, 'राजगढ़ नगर पालिका बोर्ड की दूसरी बैठक में मेला का चौराहा से गोल चक्कर तक के मुख्य रास्ते से मास्टर प्लान के बाधा व गौरव पथ में अवैध अतिक्रमण हटाए जाने का प्रस्ताव साधारण सभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया. बैठक में 9 सितंबर 2021 को यह निर्णय लिया गया."

ज़िला प्रशासन के मुताबिक, "अतिक्रमण करने वालों को 6 अप्रैल को नोटिस दिए गए और 17-18 अप्रैल को कार्रवाई की गई. एक निजी मंदिर हाल ही में बनाया गया था, जो वर्तमान नाले के ऊपर निर्मित था. मंदिर निर्माणकर्ताओं ने मूर्तियों को हटा लिया था और बताया था कि मूर्तियों को पुनर्स्थापित करवा दिया जाएगा."

"दूसरा मंदिर रास्ते में अवरोधक होने के कारण उसका आंशिक हिस्सा ही हटाया गया है, गर्भगृह सुरक्षित है. सभी मूर्तियों को विधिपूर्वक हटाया गया और नगर पालिका की पर से हटाई गई मूर्तियों की स्थापना नए स्थान पर विधिपूर्वक करवाई जा रही है."

बीजेपी की राज्य इकाई के अध्यक्ष सतीश पूनिया

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300 साल पुराना मंदिर?

राजगढ़ में बीजेपी के बोर्ड पर लगाए जा रहे कांग्रेस के आरोप पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनिया ने कहा, "तीन सौ वर्ष पुराने शिव मंदिर को तोड़ने की तोहमत कांग्रेस के लोग बेजीपी के बोर्ड पर लगा रहे हैं. क्या सिर्फ़ बोर्ड ही अतिक्रमण को तोड़ने का फ़ैसला करता है. प्रशासन, सरकार और अधिकारी यह एक लंबी परंपरा है जिस के आधार पर इस तरह के निर्णय होते हैं."

उन्होंने कहा, क्या तीन सौ साल पुराना मंदिर अतिक्रमण है. सरकार और मुख्यमंत्री की यह तुष्टिकरण की नीति है वो बड़ा कारण है कि अपने वोट बैंक को खुश करना है, वो खुश तभी होंगे जब बुलडोजर चलेगा हिंदू की आस्था पर.

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कांग्रेस ने लगाया आरोप

अध्यक्ष डॉ पूनिया ने स्थानीय कांग्रेस विधायक जौहरी लाल मीणा पर हमला बोला.

उन्होंने कहा, "विधायक ने एक वीडियो में कहा कि बेजीपी बोर्ड के 34 पार्षद मेरे साथ खड़े हों नहीं तो कोई न कोई कार्रवाई होगी. दूसरी तरफ़ विधायक के बेटे के खिलाफ़ नाबालिग ने गैंग रेप का मामला दर्ज है. विधायक के बेटे पर कार्रवाई नहीं हो इसके लिए सरकार पर दबाव होता है, इसलिए विधायक, मुख्यमंत्री और सरकार के इशारे पर यह कार्रवाई हुई है."

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा, "जिस मंदिर की बात की जा रही है इस मंदिर के अतिक्रमण को हटाने की शुरुआत वसुंधरा सरकार में हुई. जिस मंदिर को हटाया गया है उसके लिए बीजेपी और उनकी नगर पालिका मंडल पूर्णतया दोषी है."

उन्होंने कहा, "वसुंधरा सरकार के दौरान 2018 में राजगढ़ के मंडल अध्यक्ष सत्येंद्र सैनी ने ज़िला कलेक्टर अलवर को चिट्ठी लिख कर इस अतिक्रमण को हटाने की बात कही."

"वसुंधरा राजे सरकार में राजधानी जयपुर में सैकड़ों मंदिर हटाए गए थे. बीजेपी की कथनी करनी में फर्क है. यह भाई को भाई से लड़ाते हैं और धार्मिक उन्माद फ़ैला कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं. जैसे जैसे चुनाव नज़दीक आएंगे यह लोग धार्मिक माहौल ख़राब करने का प्रयास करते रहेंगे."

अलवर से बीजेपी के सांसद महंत बालक नाथ

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बीजेपी का जवाब

वहीं अलवर के बीजेपी सांसद महंत बालक नाथ ने कहा, "राजस्थान में सीएम आवास से फ़तवे जारी होते हैं. यह कांग्रेस सरकार ठीक वैसे ही चल रही है जैसे मुगल हमारे देश पर आक्रमण करते थे और सबसे पहले हमारे मठ, मंदिरों को तोड़ते थे और विध्वंश करते हैं."

राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने मीडिया से कहा, "राजस्थान की धरती पर जो लोग भगवान राम और माता सीता का अपमान करते हैं उन बीजेपी के लोगों ने आज रिकॉर्ड तोड़ दिया. राजगढ़ में पूरा बोर्ड भाजपा का है. हमारा तो एक पार्षद है वहां. बीजेपी इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं कि उनका बोर्ड है और वही प्रस्ताव ले कर आए."

इस घटना पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पत्र ने भी अपने बयान और मीडिया से बातचीत में कहा, "तीन सौ से भी अधिक वर्ष पुराने एक शिव मंदिर के ऊपर जिस प्रकार से बुलडोजर चलाया गया है वो दुखद है. राहुल जी और सोनिया जी सिर्फ़ चुनाव में मंदिर मंदिर जा कर जिस तरह से ख़ुद को हिंदू दिखाने का प्रयास करते हैं, वो सब मिथ्या है."

सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौर ने अलवर मामले में मीडिया से कहा, "स्थानीय कांग्रेस विधायक ने बदला लेने की भावना से यह कार्रवाई करवाई है कि मुझे वोट नहीं देते मैं यह करूंगा. मूर्तियों को खंडित किया गया. यह सिर्फ संदेश है एक समुदाय को, एक मात्र जो इनका वोटबैंक है सिर्फ़ उसको साध रही है. राजस्थान को तालिबान बना दिया."

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विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं

उधर, राजगढ़ - लक्ष्मणगढ़ से कांग्रेस विधायक जौहरी लाल मीणा ने मीडिया में दिए बयान में कहा है, "नगर पालिका में 34 पार्षद बीजेपी के सदस्य हैं और एक ही पार्षद हमारा है. जब 34 ने फैसला कर लिया है तो मैं अकेला उसको बदलने में सक्षम नहीं हूं. प्रजातंत्र में वोटों का राज है."

उन्होंने कहा है, "बीजेपी के बोर्ड ने यह फ़ैसला लिया है. अतिक्रमण उन्होंने हटवाया है तो मंदिर भी उन्होंने ही तोड़ा है. इसमें हमारा कोई लेना देना नहीं है."

राज्य में सालासर धाम के द्वार पर बने राम दरबार को गिराने का मामला हो या फिर हाल ही में हुई करौली की सांप्रदायिक हिंसा. और अब अलवर में हुई मंदिर तोड़ने की इस घटना पर विवाद और राजनीति.

जैसे-जैसे दिसंबर, 2023 विधानसभा चुनावों का समय नज़दीक आ रहा है, वैसे ही राज्य में विवादित घटनाओं का घटित होना भी बढ़ गया है.

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