राजस्थान: अशोक गहलोत ने कहा, 'मैं ख़ुद ही विश्वास प्रस्ताव रखूँगा'

सचिन पायलट और अशोक गहलोत

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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि वो शुक्रवार से शुरू होने वाले विधानसभा के अधिवेशन में ख़ुद ही विश्वास प्रस्ताव रखेंगे.

गुरुवार को जयपुर स्थित उनके निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में गहलोत ने कहा, "हमलोग उन 19 विधायकों (सचिन पायलट और उनके 18 समर्थक) के बग़ैर भी सदन में बहुमत साबित कर देते, लेकिन उससे हमें ख़ुशी नहीं होती, क्योंकि अपने तो अपने होते हैं."

उधर विपक्षी पार्टी बीजेपी ने कहा है कि वो गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आएगी.

उधर बीएसपी ने अपने छह विधायकों को व्हिप जारी कर कहा है कि अगर विश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होता है तो उन्हें गहलोत सरकार के ख़िलाफ़ वोटिंग करना है.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा ने व्हिप जारी किया.

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राजस्थान विधानसभा में बीएसपी के छह विधायक चुनकर आए थे लेकिन बाद में छह के छह विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए थे और विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने उनके कांग्रेस में विलय को अपनी मंज़ूरी भी दे दी थी.

लेकिन अब एक साल के बाद जब सचिन पायलट के बग़ावती तेवर के बाद ऐसा लग रहा था कि गहलोत सरकार संकट में आ सकती है और एक-एक विधायक का वोट बहुत महर्वपूर्ण हो सकता है तो अचानक बीएसपी को अपने छह विधायकों की याद आ गई.

पार्टी ने अपने छह विधायकों के कांग्रेस में शामिल होने को न केवल अनुचित बताया बल्कि उसके ख़िलाफ़ अदालत का भी दरवाज़ा खटखटाया.

फ़िलहाल मामला राजस्थान हाईकोर्ट में है. बीएसपी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट भी गई थी लेकिन सर्वोच्च अदालत ने हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया क्योंकि राजस्थान हाईकोर्ट को अभी इस पर फ़ैसला देना बाक़ी है.

लेकिन गहलोत सरकार के लिए एक अच्छी ख़बर ये है कि हाईकोर्ट ने उन विधायकों को वोट डालने से मना नहीं किया है.

सचिन और गहलोत की मुलाक़ात

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गहलोत ने विधायकों से पुरानी बातों को भूलने के लिए कहा. बैठक में पूर्व उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश अधय्क्ष सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकों के साथ बैठक में शामिल हुए.

सचिन पायलट और अशोक गहलोत ने एक दूसरे से मुस्कुराते हुए हाथ मिलाया.

पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल और केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय माकन और प्रदेश के प्रभारी अविनाश पांडेय भी बैठक में मौजूद थे.

पार्टी ने दो विधायकों भंवरलाल शर्मा और विश्वेंद्र सिंह के निलंबन को भी वापस ले लिया.

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इस मौक़े पर विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि वो हमेशा से कांग्रेसी थे और वहीं रहेंगे. पत्रकारों से बात करते हुए विश्वेंद्र सिंह ने कहा, "सच्चाई आपके सामने है. एक महीने तक हम लोगों पर जो गुज़री वो किसी से छुपा नहीं है. लेकिन हमलोगों ने अपनी मर्यादा बनाए रखी और हममें से किसी ने कुछ नहीं कहा. हमलोगों पर आरोप लगाए गए और मुक़दमे भी दर्ज किए गए. लेकिन मैं बहुत साफ़ तौर पर कहना चाहता हूं कि मैं कांग्रेसी था, हूँ और आगे भी कांग्रेसी ही रहूँगा."

दिल्ली से पर्यवेक्षक बनकर जयपुर गए पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, "सबकुछ ठीक हो गया. अब कांग्रेस परिवार एकजुट है. हमलोग बीजेपी की गंदी राजनीति का मुक़ाबला करेंगे. कल विधानसभा में कांग्रेस पार्टी एक साथ खड़ी रहेगी."

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सचिन पायलट की बग़ावत

और इस तरह राजस्थान सरकार में पिछले एक महीने से चल रहा गतिरोध ख़त्म हो गया. सचिन पायलट ने बग़ावती तेवर दिखाते हुए क़रीब एक महीने पहले कहा था कि उनके पास क़रीब विधायकों का समर्थन हासिल है और गहलोत सरकार अल्पमत में आ चुकी है.

कांग्रेस विधायक दल की बैठक

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पार्टी ने सचिन के इस बग़ावती तेवर को ख़ारिज करते हुए उन्हें उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटा दिया.

उनके दो समर्थक विधायकों को पार्टी से सस्पेंड भी कर दिया गया था.

लेकिन सचिन बार-बार ये कह रहे थे कि वो बीजेपी में नहीं शामिल होंगे और शायद इसी कारण दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान ख़ासकर प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के ज़रिए उन्हें मनाने की बैकडोर कोशिश भी जारी थीं.

उसका नतीजा भी इसी हफ़्ते निकला जब सचिन ने राहुल गांधी से मुलाक़ात की और अपनी नाराज़गी ख़त्म करते हुए पार्टी और सरकार के पक्ष में काम करने की घोषणा की.

उनकी और उनके समर्थक विधायकों की नाराज़गी दूर करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अहमद पटेल, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल तीन लोगों की एक कमेटी बना दी है.

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