राजस्थान: दौसा की डॉक्टर अर्चना की 'ख़ुदकुशी' से बवाल, घटना का पूरा सच क्या है: ग्राउंड रिपोर्ट

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- Author, मोहर सिंह मीणा
- पदनाम, जयपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
राजस्थान के दौसा में एक महिला डॉक्टर की कथित सुसाइड का मामला गर्माता जा रहा है. डॉक्टरों में घटना को लेकर रोष है. वो सड़क पर उतर कर विरोध कर रहे हैं.
वहीं, पुलिस ने इस मामले में बीजेपी के एक नेता को गिरफ़्तार किया है और मामले की जांच शुरू कर दी है. घटना के सामने आने के बाद ग्राउंड पर जाकर बीबीसी ने पता लगाया कि पूरा मामला क्या है.
घटना
पिछले दिनों दौसा ज़िले के लालसोट में एक गर्भवती महिला की बच्चे को जन्म देने के बाद मृत्यु हो गई. इसके बाद कुछ स्थानीय लोगों और कुछ बीजेपी नेताओं की ओर से ऑपरेशन करने वाली महिला डॉक्टर के ख़िलाफ़ हत्या का मुक़दमा दर्ज करने की मांग की गई.
पुलिस ने महिला डॉक्टर के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 302 (हत्या) के तहत मुक़दमा दर्ज किया.
उसके बाद डॉक्टर के परिवार का दावा है कि इस घटना की वजह से ऑपरेशन करने वाली डॉक्टर अर्चना शर्मा डिप्रेशन में आ गईं और उन्होंने अपने निजी अस्पताल में आत्महत्या कर ली. इस आत्महत्या के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है.

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मृतका डॉक्टर के घरवालों का पक्ष
जयपुर से क़रीब सौ किलोमीटर दूर लालसोट में कोथून रोड पर आनंद अस्पताल है जहां 29 मार्च को डॉक्टर अर्चना शर्मा ने आत्महत्या की. अस्पताल अब सूनसान पड़ा है.
अस्पताल से कुछ ही दूरी पर मृतका डॉक्टर का घर है. उनके पति भी डॉक्टर हैं. पति-पत्नी मिलकर अपना निजी अस्पताल चलाते थे.
मृतका के पति सुनीत उपाध्याय ने कहा, "उसने हमें कोई संकेत नहीं दिया. उसने कहा आज मैं रेस्ट करना चाहती हूं. उसके भाई ने बताया कि वह फ़ोन नहीं उठा रही हैं. मैंने ऊपर जाकर दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन नहीं खुला. फिर मैं दरवाज़ा तोड़कर अंदर घुसा तो फंदे पर लटकी हुई थी."
सुनीत यह बताते हुए फूट-फूट कर रोने लगे.
कुछ देर बाद ख़ुद को संभालते हुए उन्होंने कहा, "आशा देवी बैरवा का पिछला ऑपरेशन हमारे ही अस्पताल में हुआ था. वो जुड़वा बच्चों की डिलीवरी थी. वो उस समय भी कॉम्प्लीकेटेड पेशेंट थी. उनका फ़ोन आया कि हमारे तीन लड़कियां हैं और अब चौथी डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पताल में गए तो नसबंदी कर देंगे. आप नसबंदी नहीं करोगे तो हम आपके पास आ जाते हैं."
"आशा देवी बैरवा 27 मार्च की रात क़रीब 11 बजे अस्पताल आई थीं. वह पहले लालसोट के सरकारी अस्पताल और फिर दौसा के सरकारी अस्पताल गई थीं. वहां से उन्हें जयपुर रेफ़र कर दिया गया था."
उन्होंने कहा, "28 मार्च को सुबह नौ बजे उनका ऑपरेशन हुआ, लड़के को जन्म दिया. उस समय सब ठीक था. दस बजे उनको ऑपरेशन थिएटर से वॉर्ड में शिफ़्ट कर दिया गया. 11 बजे डॉक्टर ने उसको देखा तो ब्लीडिंग हो रही थी, एक बार तो कंट्रोल हो गई. फिर दोबारा ब्लीडिंग शुरू हो गई. उनके परिजनों ने भी देखा कि दो घंटे हम उसे बचाने के लिए जूझते रहे, इस दौरान दो यूनिट ब्लड भी चढ़ाया गया. दिन में क़रीब एक बजे उनकी मौत हो गई. घर वाले एंबुलेंस से घर ले गए."

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वह आगे बताते हैं, "फिर तीन बजे डेड बॉडी को अस्पताल के बाहर रखकर वे लोग नारेबाज़ी करने लगे - 'डॉक्टर को गिरफ़्तार करो', 'हत्या का मामला दर्ज करो', 'लाइसेंस सीज़ करो'. मेरे पापा को बहुत गंदी गालियां दे रहे थे, वो अंदर सीसीटीवी पर सब देख रही थी. वो ज़बर्दस्त डिप्रेशन में आ गई."
आत्महत्या से पहले डॉक्टर अर्चना शर्मा का लिखा हुआ भावुक नोट भी मिला है. परिवार इसे मृतका का सुसाइड नोट होने का दावा कर रहा है. हालांकि बीबीसी से बातचीत में राजस्थान पुलिस के एडिशनल डायरेक्टर गोविंद पारीक ने बताया, "अभी उस नोट की जांच चल रही है."
इस नोट में डॉक्टर अर्चना शर्मा ने लिखा है, "मैं मेरे पति, मेरे बच्चों से बहुत प्यार करती हूं. प्लीज़ मेरे मरने के बाद इन्हें परेशान नहीं करना. मैंने कोई ग़लती नहीं की, किसी को नहीं मारा. पीपीएच कॉम्प्लिकेशन हैं. इसके लिए डॉक्टर को इतना प्रताड़ित करना बंद करो. मेरा मरना शायद मेरी बेगुनाही साबित कर दे. डोंट हैरेस इनोसेंट डॉक्टर्स प्लीज़."
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आनंद अस्पताल से क़रीब आठ किलोमीटर दूर गंगापुर रोड के नज़दीक खेमावास गांव है. यहां रेलवे ट्रैक के साथ और फिर रेतीली राह से होकर हम आशा देवी बैरवा के घर पहुंचे जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई थी.
परिचित सांत्वना देने के लिए उनके घर पहुंचे हुए थे. महिलाओं के रोने की आवाज़ें ही सुनाई दे रही थीं. एक कुर्सी पर आशा देवी की तस्वीर रखी हुई थी. बिल्कुल उस कुर्सी के बगल में अपनी तीन बेटियों के साथ बैठे हुए थे आशा देवी के पति 29 साल के लालू राम बैरवा.
दसवीं तक पढ़े लालू राम मज़दूरी करते हैं. तीन बेटियों के पिता हैं. बेटे को जन्म देने के कुछ घंटों बाद ही पत्नी आशा देवी की मौत हो गई. उनका नवजात बच्चा दौसा के ज़िला अस्पताल में भर्ती है, जो अब कभी अपनी मां को नहीं देख पाएगा.

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इलाज के दौरान जिस महिला की जान गई, उनके परिवार का क्या कहना है
लालू राम बैरवा बेहद धीमी आवाज़ में हमसे बात करते हुए पूरी घटना बताते हुए कहते हैं, "उसे लालसोट के सरकारी अस्पताल में एक दिन भर्ती किया. फिर दौसा रेफ़र कर दिया. दौसा में भर्ती किया और फिर वहां से महिला चिकित्सालय जयपुर के लिए रेफ़र किया गया. फिर जयपुर में भर्ती कराया उसे."
वह बताते हैं, "पहले तीन बेटियां और अब चौथी डिलीवरी थी. जयपुर अस्पताल में बोला कि इनकी नसबंदी करनी होगी. मैंने बीवी से सलाह ली, बीवी ने मना कर दिया. फिर मैंने डॉक्टर अर्चना मैडम से सलाह ली. 28 तारीख़ को मैं नौ बजे जयपुर से लालसोट के लिए निकला और लगभग 11 बजे आनंद अस्पताल में भर्ती करवाया. यहां उनकी जांच की गई, जांच के बाद मैडम ने कहा कि इन्हें ख़ून चढ़ेगा."
"सुबह क़रीब सवा आठ बजे मैडम ने अचानक बोला कि ऑपरेशन होगा, मैंने बोला 'कर दो ऑपरेशन'. नौ बजे के लगभग बच्चा हुआ. क़रीब एक घंटे बाद ब्लीडिंग चालू हो गई. डॉक्टर आए और मुझे बोला कि इनका बचना मुश्किल है, बच्चेदानी का ऑपरेशन करना होगा. मैंने बोला कर दो ऑपरेशन, जान बच जाए बस. मैं बाहर आ गया. फिर मैं बेहोश हो गया, जिसके बाद मुझे गाड़ी में डाल कर घर ले आए."
"होश आने पर देखा कि घर में सब रो रहे हैं, डेडबॉडी के साथ ही दो घंटे पहले जन्मे बच्चे को भी साथ ही भेज दिया. जब मुझसे ऑपरेशन करने के लिए बोला था, तब ठीक थी. बच्चे और डेडबॉडी को मैं गाड़ी से वापस अस्पताल ले गया."

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'डेडबॉडी लेकर उनके साथ अस्पताल और कौन गया था' यह पूछने पर कहते हैं, "मेरे साथ कोई नहीं था, मैं अकेला ही गाड़ी से ले गया था, मेरे साथ कोई नहीं था."
"अचानक वहां भीड़ इकट्ठा हो गई, मैं नहीं जानता वहां कौन-कौन लोग थे. मेरी समझ में कुछ नहीं आया कि वहां क्या चल रहा था. मैं नहीं समझता 302 धारा क्या होती है. मैंने पुलिस को कोई शिकायत नहीं की है."
जब हमने पूछा कि क्या आपको मालूम है डॉक्टर अर्चना शर्मा ने आत्महत्या कर ली है, तो उन्होंने कहा, "न्यूज़ में देखा कि मैडम ने आत्महत्या कर ली है."
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भाजपा नेता समेत दो गिरफ़्तार
डॉक्टर अर्चना शर्मा की आत्महत्या के मामले में भाजपा के पूर्व विधायक जितेन्द्र गोठवाल को गुरुवार सुबह जयपुर से गिरफ़्तार कर पुलिस ने कोर्ट में पेश किया.
अदालत ने उन्हें 15 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. उन पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप है.
राजस्थान पुलिस के डीजीपी एमएल लाठर ने फ़ोन पर बताया, "जितेंद्र गोठवाल को मिलाकर दो लोग अभी तक गिरफ़्तार हैं, बाकियों की गिरफ़्तारी के प्रयास जारी हैं. एसएचओ को सस्पेंड किया गया है, डिप्टी एसपी को एपीओ (अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर) किया है और एसपी का ट्रांसफ़र कर दिया है."

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सड़क से सोशल मीडिया तक घटना का विरोध
इस घटना के बाद राज्यभर में डॉक्टरों का विरोध हो रहा है. राज्य के सभी डॉक्टर एसोसिएशन एक साथ इसके विरोध में उतरे और 30 मार्च को राजस्थान के सभी निजी अस्पतालों में कार्य बहिष्कार किया गया.
डॉक्टर सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं और प्रशासन को ज्ञापन देकर दोषियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. इसके साथ ही पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने भी इस घटना को लेकर अपनी अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने लिखा, ''दौसा में डॉक्टर अर्चना शर्मा की आत्महत्या की घटना बेहद दुखद है. हम सभी डॉक्टरों को भगवान का दर्जा देते हैं. हर डॉक्टर मरीज़ की जान बचाने के लिए अपना पूरा प्रयास करता है. परंतु कोई भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना होते ही डॉक्टर पर आरोप लगाना न्यायोचित नहीं है.''

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अब तक क्या कार्रवाई हुई
इस घटना के बाद दौसा ज़िले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) अनिल बेनिवाल का तबादला कर दिया गया है. सीओ शंकर मीणा को एपीओ कर दिया गया है और थानाधिकारी अंकेश चौधरी को निलंबित कर दिया गया है.
सीएम अशोक गहलोत ने डॉक्टर अर्चना शर्मा के पति से फ़ोन पर बात कर उन्हें कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है.
आत्महत्या के बाद पुलिस ने लगाई गई धारा 302 को हटा दिया है. घटना की गंभीरता को देखते हुए संभागीय आयुक्त दिनेश कुमार यादव इस मामले की जांच कर रहे हैं.
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले पर ट्वीट में कहा, 'इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है. दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा.'
राज्य के डॉक्टरों ने भी दोषियों पर सख़्त कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.
डॉक्टर सुनीत उपाध्याय कहते हैं, "इन लोगों को गिरफ़्तार किया जाए, पुलिस वालों पर हत्या के लिए उकसाने का मुक़दमा दर्ज किया जाए. पुलिस वालों के कारण मेरी पत्नी की हत्या हुई है. अधिकतम सज़ा मिले तभी मेरी पत्नी को न्याय मिलेगा. उसने सुसाइड नोट में भी लिखा है डॉन्ट हैरेस डॉक्टर्स."
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