हार्दिक पटेल बोले- पार्टी में मेरी स्थिति नए दूल्हे की नसबंदी कराने की तरह- प्रेस रिव्यू

हार्दिक पटेल

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गुजरात में कांग्रेस के नेता हार्दिक पटेल ने पार्टी पर उनकी उपेक्षा करने का आरोप लगाया है. हार्दिक पटेल ने कहा है कि उनकी स्थिति पार्टी में उस नए दूल्हे जैसी है, जिसकी नसबंदी करा दी गई हो.

अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार, हार्दिक पटेल ने यह भी कहा कि पाटीदार समाज के नेता नरेश पटेल के बारे में कोई फ़ैसला न लेकर कांग्रेस पाटीदार समाज का अपमान कर रही है.

पार्टी पर उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाते हुए हार्दिक पटेल ने कहा, "मुझे प्रदेश कांग्रेस कमिटी की किसी भी बैठक में नहीं बुलाया जाता, कोई निर्णय लेने से पहले वो मुझसे राय-मशविरा नहीं करते, तब इस पद का क्या मतलब है."

हार्दिक पटेल ने कहा, "हाल ही में उन्होंने (कांग्रेस) राज्य में 75 नए महासचिव और 25 नए उपाध्यक्षों के नाम घोषित किए. क्या उन्होंने मुझसे एक बार भी पूछा कि हार्दिक भाई आपकी नज़र में कोई मज़बूत नेता इस सूची से ग़ायब तो नहीं है."

हार्दिक पटेल को ख़ुद राहुल गांधी ने एक युवा पाटीदार नेता के तौर पर पार्टी जॉइन करवाई थी. पटेल को साल 2020 में कांग्रेस ने कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था. हार्दिक पटेल इससे पहले भी कई बार अहम भूमिका न दिए जाने को लेकर पार्टी से नाराज़गी ज़ाहिर कर चुके हैं.

पाटीदार आंदोलन के कारण कांग्रेस ने किया अच्छा प्रदर्शन

हार्दिक पटेल ने कांग्रेस को ये भी चेताया कि साल 2015 के निकाय चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने पाटीदार आंदोलन की वजह से अच्छा प्रदर्शन किया था.

हार्दिक ने अख़बार से कहा, "लेकिन उसके बाद क्या हुआ? कांग्रेस में ही कई लोग मानते हैं कि पार्टी ने हार्दिक का सही इस्तेमाल नहीं किया." उन्होंने ये भी कहा कि शायद ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पार्टी के अंदर ही कई लोग उनसे डरते हैं.

नरेश पटेल पर हार्दिक ने कहा, "मैं टीवी पर देख रहा हूँ कि कांग्रेस 2022 चुनावों के लिए नरेश पटेल को पार्टी में लाना चाहती है. मैं उम्मीद करता हूँ कि वो 2027 चुनावों के लिए कोई और पटेल न खोजें. कांग्रेस उन लोगों का इस्तेमाल ही क्यों नहीं करती जो पार्टी में हैं?"

राहुल गांधी और हार्दिक पटेल

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गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष जगदीश ठाकोर ने कहा कि वो हार्दिक पटेल से बात करेंगे. उन्होंने नरेश पटेल को लेकर निर्णय में किसी तरह के असमंजस होने को भी ख़ारिज किया.

इंडियन एक्सप्रेस से हार्दिक पटेल ने कहा, "हाल ही में पंजाब कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं का दल पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिला. गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष को ऐसा ही सम्मान क्यों नहीं मिलता?"

नरेश पटेल को लेकर हार्दिक ने कहा कि जब बात ऐसे नेताओं को शामिल करने की आती है तो बीजेपी आक्रामक और त्वरित रवैया अपनाती है. "दो महीने से नरेश पटेल को पार्टी में शामिल करने की बात चल रही है, लेकिन कांग्रेस निर्णय नहीं ले पा रही. अगर आप किसी समुदाय का सम्मान नहीं कर सकते तो आपके पास उनका अनादर करने का भी हक़ नहीं है."

श्रीलंका को और मदद की दरकार, भारत दो अरब डॉलर देने पर कर रहा विचार

भारत-श्रीलंका

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गंभीर आर्थिक संकट में डूबे श्रीलंका को भारत दो अरब डॉलर की वित्तीय मदद देने की तैयारी कर रहा है. इसके अलावा श्रीलंका को भोजन, ईंधन जैसी मूलभूत सुविधाओं में भी भारत सहयोग दे रहा है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के हवाले से द टेलीग्राफ़ लिखता है कि बीते कुछ सालों के भीतर श्रीलंका में चीन की दख़लअंदाज़ी बढ़ने के बाद भारत अब फिर से अपनी स्थिति मज़बूत करने के मक़सद से भारत मदद देने की तैयारी कर रहा है.

1948 में मिली आज़ादी के बाद से श्रीलंका अब तक के सबसे बुरे आर्थिक संकट से गुज़र रहा है. हालात इतने ख़राब हैं कि श्रीलंका अपने क़र्ज़ भी चुकाने में असमर्थ है और वो भारत-चीन जैसे मित्र देशों से लगातार क्रेडिट लाइन, भोजन, ऊर्जा जैसी मदद मांग रहा है. भारत और चीन पहले से ही लाखों करोड़ों डॉलर की वित्तीय मदद का आश्वासन दे चुके हैं.

इस मामले से अवगत एक भारतीय सूत्र ने अख़बार को बताया, "हम निश्चित तौर पर उनकी मदद करना चाहते हैं और अतिरिक्त ऋण देने के इच्छुक हैं."

एक अन्य जानकार ने बताया कि श्रीलंका ने भारत से क़रीब दो अरब डॉलर की आर्थिक सहायता मांगी है ताकि वो एशियन क्लियरिंग यूनियन (एसीयू) जैसी संस्थाओं से लिए क़र्ज़ को चुका सके. सूत्र ने बताया कि भारत की ओर से इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई है.

श्रीलंका आर्थिक संकट

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इमेज कैप्शन, श्रीलंका की जनता गैस-पेट्रोलियम पदार्थों की भी भारी कमी से जूझ रही है

हालांकि, किसी भी सूत्र ने अपनी पहचान ज़ाहिर करने से इनकार कर दिया.

भारत सरकार और आरबीआई के साथ ही श्रीलंका के विदेश-वित्त मंत्रालय ने अभी तक इस मुद्दे पर जवाब नहीं दिया है.

भारत ने अब तक श्रीलंका को 1.9 अरब डॉलर का ऋण दिया है. श्रीलंका ने भारत से ईंधन के लिए 50 करोड़ डॉलर की क्रेडिट लाइन भी मांगी है.

चीन ने भी बैंक और अन्य वित्तीय संस्थाओं के ज़रिए श्रीलंका को 1.3 अरब डॉलर की मदद की है. श्रीलंका और चीन के बीच अभी और कर्ज़ के लिए बातचीत जारी है.

एक सूत्र ने बताया कि भारत चाहता है कि श्रीलंका चीन पर आश्रित न रहे. श्रीलंका पर चीन का 3.5 अरब डॉलर कर्ज़ है, जो कि इस देश के कुल ऋण का 10.8 फ़ीसदी है. बीजिंग श्रीलंका में बंदरगाह और सड़कें भी बना रहा है.

सूत्र ने कहा, "हम चाहते हैं कि वो चीन का कर्ज़ कम करें और हम उनके मज़बूत साझेदार बनना चाहते हैं."

भारत ने श्रीलंका को तमिल न्यू ईयर से पहले चीनी, चावल और गेहूं की खेप भी भेजी है.

सूत्रों ने बताया कि नई दिल्ली खुले तौर पर श्रीलंका को बीजिंग पर निर्भरता कम करने के लिए नहीं कह रहा है. बल्कि वो पड़ोसी देश को ये एहसास करवा रहा है कि मदद के लिए भारत चीन से बेहतर विकल्प है.

रामनवमी के दिन हुई हिंसा पर क्या बोलीं जेएनयू की वाइस चांसलर

जेएनयू

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रामनवमी के दिन, 10 अप्रैल को नॉनवेज खाने को लेकर हुई हिंसा को 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) की वाइस चांसलर शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने कहा है कि कैंपस में सब अपनी पसंद का खाने और पहनने को आज़ाद हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बातचीत में जेएनयू वीसी ने कहा, "विश्वविद्यालय को किसी के खाने पर कोई आपत्ति नहीं है और हर किसी के पास ये आज़ादी है कि वो अपनी पसंद का खाए और अपनी मर्ज़ी के कपड़े पहने."

जेएनयू वीसी ने ये भी कहा कि विश्वविद्यालय कोई कुश्ती का अखाड़ा या राजनीति का मैदान नहीं है. उन्होंने कहा, "अगर आपको ये करना है तो जाइए चुनाव लड़िए. जेएनयू आपके राजनीतिक करियर में मदद नहीं देगा."

हिंसा की निंदा करते हुए वाइस चांसलर पंडित ने छात्रों से कहा, "जेएनयू सरस्वती की जगह है. कृपया यहां पढ़िए, शैक्षणिक स्तर पर बहस कीजिए और लड़िए. ये राजनीति का मैदान नहीं है."

उन्होंने कहा, "हम अब भी सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटी हैं और जेएनयू से निकले 95 फ़ीसदी छात्र देश की सेवा कर रहे हैं. विदेश मंत्री, वित्त मंत्री और बहुत सारे आईएएस अधिकारी जेएनयू से ही निकले हैं. आज मैं जो हूं वो इस यूनिवर्सिटी ने बनाया है."

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