सागर यूनिवर्सिटी में नमाज़ पढ़ने वाली छात्रा बोली- डरी नहीं हूं क्योंकि कुछ ग़लत नहीं किया - प्रेस रिव्यू

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मध्य प्रदेश के सागर में डॉक्टर हरि सिंह गौड़ केंद्रीय विश्वविद्यालय में नमाज़ पढ़ने के मामले में शामिल रहीं छात्रा ने अपनी बात कही है.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' से छात्रा ने कहा है, "मुझे डरने की क्या ज़रूरत है? मुझे विश्वास था कि मैंने कुछ ग़लत नहीं किया है."

25 मार्च को विश्वविद्यालय के एक डिपार्टमेंट के ख़ाली कमरे में 22 वर्षीय छात्रा का नमाज़ पढ़ने का वीडियो वायरल हो गया था, जिसके बाद विश्वविद्यालय ने बिल्डिंग में नमाज़ पढ़ने पर रोक लगा दी थी. इस वीडियो के सामने आने के बाद हिंदू जागरण मंच ने विश्वविद्यालय को छात्रा के ख़िलाफ़ लिखित शिकायत दी थी जिसके बाद एक छह सदस्यीय जांच कमिटी गठित की गई थी.

बाद में विश्वविद्यालय ने एक बायन जारी किया जिसमें उसने छात्रा के हवाले से लिखा था कि उसे 'यह मालूम नहीं था कि डिपार्टमेंट की बिल्डिंग में धार्मिक आचरण से बचना चाहिए.'

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हिंदू जागरण मंच की आपत्ति के बाद आदेश

बीएससी-बीएड के अंतिम सेमेस्टर की छात्रा ने बताया कि जब उसने साल 2018 में विश्वविद्यालय में पढ़ना शुरू किया था तो वो तब से नमाज़ पढ़ रही थी. उन्होंने बताया कि उनके सहपाठी और कई शिक्षक भी इस बात को जानते थे लेकिन किसी ने आपत्ति नहीं की.

हिंदू जागरण मंच की आपत्ति के बाद विश्वविद्यालय ने अधिसूचना जारी करके 'सांप्रदायिक तनाव को बढ़ावा देने वाली किसी भी धार्मिक गतिविधि को प्रतिबंधित कर दिया था.' साथ ही विश्वविद्यालय ने कहा था कि जो छात्र धार्मिक गतिविधियां करना चाहते हैं वो अपने घर या आराधना स्थल पर ही करें.

विश्वविद्यालय के मीडिया ऑफ़िसर विवेक जायसवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय ने विशेष परिस्थितियों में यह आदेश दिया था, छात्रों को अपने हॉस्टल में यह धार्मिक गतिविधियां करने की अनुमति है लेकिन उनको सलाह दी गई है कि वो विभाग की बिल्डिंग में ऐसा करने से बचें.

विश्वविद्यालय की जांच समिति में शामिल रहे एक सदस्य ने अख़बार से कहा कि चुपके से किसी छात्रा का वीडियो बनाना ख़ुद साइबर अपराध के तहत आता है.

उन्होंने बताया, "हमने छात्रा से कहा था कि अगर वो एफ़आईआर दर्ज कराना चाहती है तो करा सकती है लेकिन उसने इस मामले को आगे बढ़ाने से मना कर दिया था."

हिंदू महापंचायत

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बुराड़ी और जंतर-मंतर के 'भड़काऊ कार्यक्रमों' में एक ही लोग

दिल्ली के बुराड़ी मैदान में रविवार को हुई 'हिंदू महापंचायत' में भड़काऊ बयानबाज़ी करने वाले वक्ता पहले भी कई बार ऐसे ही कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार 'हिंदुस्तान टाइम्स' अपनी रिपोर्ट में लिखता है कि बीते साल 8 अगस्त को जंतर-मंतर पर हुए 'भारत जोड़ो' कार्यक्रम में भी वही वक्ता शामिल थे जो बुराड़ी वाले कार्यक्रम में थे.

जंतर-मंतर पर मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण देने के मामले में नौ लोगों को गिरफ़्तार किया गया था जिनमें से सभी ज़मानत पर हैं और दिल्ली पुलिस ने नवंबर 2021 में कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी.

अख़बार लिखता है कि जंतर-मंतर के कार्यक्रम में शामिल रहे कम से कम दो लोग बुराड़ी में हुई महापंचायत में भी शामिल थे.

जंतर मंतर पर हुए कार्यक्रम में जिन लोगों को गिरफ़्तार किया गया था उनमें सुप्रीम कोर्ट के वकील और बीजेपी के पूर्व प्रवक्ता अश्विनी उपाध्याय, हिंदू आर्मी प्रमुख सुशील कुमार तिवारी, हिंदू रक्षा दल के प्रमुख पिंकी चौधरी और दल के सदस्य उत्तम मलिक उर्फ़ उत्तम उपाध्याय और दीपक कुमार, सेव इंडिया फ़ाउंडेशन के प्रमुख प्रीत सिंह, हिंदू फ़ोर्स के सदस्य दीपक सिंह, सुदर्शन वाहिनी के सदस्य विनोद शर्मा और महाकाल यूथ ब्रिगेड के विनीत क्रांति शामिल थे.

बुराड़ी मामले की जांच कर रहे अधिकारियों ने बताया है कि सेव इंडिया फ़ाउंडेशन के प्रीत सिंह की आयोजक के रूप में पहचान हुई है. वहीं महापंचायत के कई पोस्टरों में हिंदू रक्षा दल के पिंकी चौधरी भी कार्यक्रम के संरक्षक बताए जा रहे हैं.

राहुल गांधी

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तेलंगाना कांग्रेस में संकट, राहुल गांधी ने की बैठक

तेलंगाना कांग्रेस में संकट गहराता जा रहा है. कहा जा रहा है कि तेलंगाना के कई नेता प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी के काम करने के तरीके से नाख़ुश हैं.

हाल ही में राहुल गांधी ने राज्य के कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक की थी. उन्होंने नेताओं से एकजुट होकर काम करने के लिए कहा था.

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय नेतृत्व ने रेड्डी का विरोध करने वाले नेताओं से कहा है कि उनकी परेशानियों को सुनने के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाएगा.

राज्य के क़रीब 30 नेताओं और राहुल गांधी के बीच हुई मैराथन मीटिंग के बाद यह फ़ैसला लिया गया है. एक नेता ने अख़बार को जानकारी दी कि मुद्दों पर विचार करने के लिए समिति गठित की जा सकती है.

पुरुष

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भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर WHO की रिपोर्ट

'अमर उजाला' अख़बार ने भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर आई विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट को प्रकाशित किया है.

अख़बार लिखता है कि भारत ने स्वास्थ्य क्षेत्र में काफ़ी तरक्की की है, लेकिन यहां एक जैसे बदलाव नज़र नहीं आ रहे हैं. पिछले दो साल से कोरोना महामारी का मुकाबला कर रहा भारत बीमारियों का दोहरा बोझ झेल रहा है. राज्यों में स्वास्थ्य को लेकर किए जा रहे कार्यों में काफी असमानता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकारी क्षेत्र में जहां सुविधाएं काफ़ी कम हैं, वहीं निजी क्षेत्र में इलाज काफ़ी महंगा है. इन सबसे अधिक चिंताजनक बात यह है कि देश में लोगों को गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलना काफी कठिन है.

WHO ने कहा है कि भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में एक जैसे बदलाव दिखाई नहीं दे रहे हैं. देश में निजी स्वास्थ्य क्षेत्र का काफ़ी तेज़ी से विस्तार हुआ है लेकिन यहां मरीज़ों का उपचार काफ़ी महंगा है और बड़ी आबादी को देखते हुए सभी परिवारों के लिए यह काफ़ी जटिल भी है. हालांकि यहां गुणवत्ता युक्त उपचार मिलना भी कठिन है. इसे लेकर भारत में एक मज़बूत विनियमन की आवश्यकता भी है.

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