मोदी सरकार का 'क्रांतिकारी' डिजिटल हेल्थ कार्ड - क्या हैं फ़ायदे और चिंताएँ

डिजिटल हेल्थ कार्ड

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    • Author, कमलेश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन की शुरुआत की. इसके तहत अब भारत के नागरिकों को एक डिजिटल हेल्थ आईडी दिया जाएगा.

ये एक डिजिटल हेल्थ कार्ड होगा जिसमें लोगों का हेल्थ रिकॉर्ड यानी स्वास्थ्य से संबंधित जानकारियां डिजिटली सुरक्षित रहेंगी.

ये एक यूनीक आईडी कार्ड होगा जिसमें आपकी बीमारी, इलाज और मेडिकल टेस्ट से जुड़ी सभी जानकारियां दर्ज होंगी.

इसकी शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे स्वास्थ्य के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने वाला बताया.

पीएम मोदी ने कहा, "बीते सात वर्षों में देश की स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने का जो अभियान चल रहा है, वह आज से एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है. आज एक ऐसे मिशन की शुरुआत हो रही है, जिसमें भारत की स्वास्थ्य सुविधाओं में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने की बहुत बड़ी ताकत है."

"आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन अस्पतालों में प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ ही ईज़ ऑफ़ लिविंग भी बढ़ाएगा. वर्तमान में अस्पतालों में तकनीक का इस्तेमाल एक ही अस्पताल या ग्रुप तक सीमित रहता है लेकिन, यह मिशन अब पूरे देश के अस्पतालों के डिजिटल हेल्थ सोल्यूशंस को एक-दूसरे से जोड़ेगा. इसके तहत देशवासियों को अब एक डिजिटल हेल्थ आईडी मिलेगी. हर नागरिक का हेल्थ रिकॉर्ड डिजिटली सुरक्षित रहेगा."

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पीएम नरेंद्र मोदी

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क्या है हेल्थ कार्ड

डिजिटल हेल्थ कार्ड एक तरह से आधार कार्ड की तरह होगा. इस कार्ड पर आपको 14 अंकों का एक नंबर मिलेग. इसी नंबर से स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यक्ति की पहचान होगी. इसके ज़रिए किसी मरीज की मेडिकल हिस्ट्री का पता चल सकेगा.

ये एक तरह से आपकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों का खाता है. इसमें स्वास्थ्य से जुड़ी कई जानकारियां दर्ज होंगी. जैसे किसी व्यक्ति की कौन-सी बीमारी का इलाज हुआ, किस अस्पताल में हुआ, क्या टेस्ट कराए गए, दवाइयां दी गईं, मरीज को कौन-कौन सी स्वास्थ्य समस्याएं हैं और क्या मरीज किसी स्वास्थ्य योजना से जुड़ा है आदि.

डिजिटल डाटा

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कैसे बनेगा कार्ड

  • ये आधार कार्ड या मोबाइल नंबर के ज़रिए बनाया जा सकता है.
  • हेल्थ कार्ड बनाने के लिए ndhm.gov.in वेबसाइट पर जाना होगा. वहां पर "हेल्थ आईडी" नाम से एक शीर्षक दिखेगा.
  • यहां आप इस सुविधा के बारे में और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और 'क्रिएट हेल्थ आईडी' विकल्प पर क्लिक कर कार्ड बनाने के लिए आगे बढ़ सकते हैं.
  • अगले वेबपेज पर आपको आधार के ज़रिए या मोबाइल फोन से हेल्थ कार्ड जनरेट करने का विकल्प मिलेगा. आधार नंबर या फोन नंबर डालने पर एक ओटीपी प्राप्त होगा. ओटीपी भरकर आपको इसे वेरिफाई करना होगा.
  • आपके सामने एक फॉर्म खुलेगा जिसमें आपको अपने प्रोफाइल के लिए एक फोटो, अपनी जन्म तिथि और पता समेत कुछ और जानकारियां देनी होंगी.
  • सारी जानकारियां भरते ही एक हेल्थ आर्डी कार्ड बनकर आ जाएगा जिसमें आपसे जुड़ी जानकारियां, फोटो और एक क्यूआर कोड होगा.
  • जो लोग हेल्थ कार्ड खुद से बनाने में सक्षम नहीं हैं वो सरकारी अस्पताल, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में या नेशनल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर रजिस्ट्री से जुड़े ऐसे हेल्थकेयर प्रोवाइडर से अपना हेल्थ कार्ड बनवा सकते हैं.
एनडीएचएम हेल्थ रिकॉर्ड्स

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कैसे दर्ज होगा डाटा

इस डिजिटल हेल्थ कार्ड में किसी मरीज का पूरा मेडिकल डाटा रखने के लिए अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर्स को एक सेंट्रल सर्वर से जोड़ा जाएगा. इसमें अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर भी पंजीकृत होंगे.

इसके लिए आपको 'एनडीएचएम हेल्थ रिकॉर्ड्स ऐप' डाउनलोड करना होगा. इसमें आप अपने हेल्थ आईडी या पीएचआर एड्रेस और पासवर्ड के ज़रिए लॉगिन कर सकते हैं.

इस ऐप में आपको उस अस्पताल या हेल्थ फैसिलिटी को ढूंढकर लिंक करना होगा जहाँ आपने इलाज कराया है. उनके पास मौजूद आपका स्वास्थ्य संबंधी डाटा इस मोबाइल ऐप पर आ जाएगा. अस्पतालों में लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके भी अस्पताल को लिंक किया जा सकता है.

आप चाहें तो खुद भी अपनी प्रेसक्रिप्शन, टेस्ट रिपोर्ट या अन्य जानकारियां इस ऐप में डाल सकते हैं. इसके लिए लॉकर की सुविधा भी दी गई है.

कोई डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और अस्पताल आपकी सहमति के साथ 14 अंकों के यूनिक आईडी के ज़रिए आपके स्वास्थ्य डाटा को देख सकेगा. आपकी सहमति अनिवार्य होगी.

यूज़र जब चाहे अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिलीट भी कर सकता है.

डॉक्टर

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क्या होंगे फायदे

  • डिजिटल कार्ड का सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसके इस्तेमाल के बाद आपको डॉक्टर के पुराने पर्चे और टेस्ट की रिपोर्ट साथ ले जाने की ज़रूरत नहीं होगी. साथ ही अगर कोई दस्तावेज़ खो गया है तो चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.
  • अगर पुराने टेस्ट की रिपोर्ट नहीं है तो डॉक्टर को फिर से सारे टेस्ट नहीं करवाने होंगे. इससे समय और पैसे की बचत होगी.
  • आप चाहे किसी भी शहर में इलाज कराएं डॉक्टर यूनीक आईडी के ज़रिए आपकी पिछली स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को देख पाएगा.
  • ये हेल्थ आईडी निशुल्क है और ये अनिवार्य नहीं होगी. हालांकि, सरकार की कोशिश है कि हर कोई इस सिस्टम का हिस्सा बने.
  • मरीज की सहमति के साथ आप अपने किसी परिचित के हेल्थ रिकॉर्ड्स को भी संभाल सकते हैं.
हैकर

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डाटा सुरक्षा को लेकर चिंताएं

इस हेल्थ कार्ड में सारा डाटा डिजिटली होगा. इसे सर्वर पर इकट्ठा किया जाएगा.

सरकार का दावा है कि लोग एक निजी, सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल में अपना डाटा डिजिटली संभालकर रख पाएंगे.

लेकिन, साइबर सिक्योरिटी के जानकार जहां इस कदम को सराहनीय मानते हैं वहीं, इससे जुड़े ख़तरे को लेकर भी आगाह करते हैं.

आपके पास मौजूद किसी दस्तावेज की सुरक्षा आप खुद करते हैं लेकिन कोई डाटा किसी सर्वर पर रखा गया है तो उसकी सुरक्षा के लिए आपकी निर्भरता सरकार पर हो जाती है.

लोगों के जीवन को सुगम बनाने के लिए सरकार नए-नए प्रयास करती है और सुरक्षा के दावे भी करती है लेकिन हर बार साइबर सिक्योरिटी का मसला सवाल बनकर खड़ा हो जाता है.

जैसे आधार कार्ड को लेकर भी डाटा के पूरी तरह सुरक्षित होने का दावा किया जाता है लेकिन ऐसे मामले भी सामने आए हैं जब हैकर्स ने आधार कार्ड के डाटा में सेंध लगाई है. तो क्या डिजिटल हेल्थ कार्ड भी ऐसी किसी सेंध का शिकार हो सकता है.

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साइबर एक्सपर्ट पवन दुग्गल कहते हैं, "डिजिटल हेल्थ कार्ड एक सराहनीय कदम है और सही उद्देश्य के साथ बनाया गया है लेकिन हेल्थ कार्ड के साथ बहुत सारी बुनियादी चुनौतियां जुड़ी हुई हैं."

"यहां पर सबसे बड़ी चुनौती डाटा में सेंधमारी की हो सकती है. स्वास्थ्य से जुड़ा डाटा साइबर अपराधियों के लिए बहुत आकर्षक हो सकता है क्योंकि इसका दाम बहुत अच्छा मिलता है. ये डाटा चुराया जा सकता है और इसमें बदलाव किया जा सकता है. डाटा में बदलाव बहुत खतरनाक है क्योंकि इससे उस व्यक्ति की बीमारी और इलाज में ही बदलाव आ जाएगा जो जानलेवा भी हो सकता है.

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डाटा सुरक्षा क़ानून की कमी

पवन दुग्गल कहते हैं कि जितनी भी घोषणाएं हो रही हैं उसमें ये पता नहीं लग पा रहा है कि साइबर सुरक्षा को लेकर क्या-क्या कदम उठाए गए हैं.

उन्होंने कहा,"भारत के पास डाटा सुरक्षा क़ानून नहीं है. केवल डाटा सुरक्षा बिल, 2019 है जो फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति के सामने है. जब क़ानून ही नहीं है तो लोगों के स्वास्थ्य डाटा को कैसे सुरक्षित रखा जाएगा. क़ानून होंगे तो उसमें सजा या जुर्माना तय हो सकता है जिससे किसी को अपराध करने से पहले डर लगेगा."

वहीं, नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन की वेबसाइट पर बताया गया है कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) आपके किसी भी स्वास्थ्य रिकॉर्ड को संग्रहित नहीं करता है.

साथ ही ये भी बताया गया है कि आपकी सहमति के बाद ही आपके रिकॉर्ड डॉक्टर या स्वास्थ्य फैसिलिटी के साथ साझा किया जाएगा. आप चाहें तो किसे कितनी देर अनुमति देनी है और कौन-से रिकॉर्ड दिखाने हैं ये खुद तय कर सकते हैं.

फिर भी कई सवाल ऐसे हैं जिन्हें लेकर आशंकाएं और चुनौतियां बनी हुई हैं.

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