स्कूल परिसर में नमाज़ पर प्रज्ञा ठाकुर की आपत्ति, क्या है पूरा मामला

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- Author, शुरैह नियाज़ी
- पदनाम, भोपाल से बीबीसी हिंदी के लिए
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक सेंट्रल स्कूल के कैम्पस में बनी एक मस्जिद को लेकर विवाद पैदा हो गया है. शुक्रवार को परिसर में हो रही नमाज़ के वक्त स्थानीय सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर पहुंच गईं और उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल से इस मामले में पूछताछ की. अब सांसद इस मामले को लेकर प्रिंसिपल को ज़िम्मेदार मान रही हैं. वहीं उस मस्जिद में पढ़ने वाले लोगों को दावा है कि यह मस्जिद 1966 से इस जगह पर है.
यह पूरा मामला शहर के केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2 का है जो 7 नंबर क्षेत्र में है. जानकारी के मुताबिक़ इस क्षेत्र में पहले सिंचाई विभाग का दफ़्तर हुआ करता था. क्षेत्र के मुसलमानों ने उस वक़्त के अधिकारियों से अस्थाई रूप से नमाज़ पढ़ने के लिए इजाज़त ली थी क्योंकि क़रीब में कोई मस्जिद नहीं थी.
उसके बाद सिंचाई विभाग का दफ़्तर वहां से हट गया और 1994 में सेंट्रल स्कूल शुरू हो गया. उसके बाद यह धार्मिक स्थल सेंट्रल स्कूल की हद में आ गया. इसलिए नमाज़ के समय स्कूल के पीछे के गेट को खोल दिया जाता था ताकि लोग नमाज़ पढ़ सकें.

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प्रज्ञा ठाकुर ने क्या कहा?
सांसद प्रज्ञा ठाकुर को इस बात की शिकायत की गई थी कि इस परिसर में बनी मस्जिद में नमाज़ अदा की जा रही है.
सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने बताया, "स्कूल में नमाज़ पढ़ने के लिए जिस तरह से लोगों को आने दिया जा रहा था वो ग़लत है. वहीं स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता बाहर ही खड़े रहते हैं."
उन्होंने कहा, "इस तरह बच्चों की सुरक्षा को ख़तरा है, लेकिन इसकी शिकायत कभी भी स्कूल प्रिंसिपल ने नहीं की."
वैसे अब तक स्कूल परिसर में छात्रों की सुरक्षा से जुड़ा कोई मामला सामने नहीं आया है.
इस स्कूल के चारों तरफ़ शिक्षा संस्थाएं हैं और क़रीब में ही लड़कियों का कॉलेज भी है. प्रज्ञा ठाकुर का कहना है कि धार्मिक स्थल की वजह से लड़कियों के लिए ख़तरा बढ़ जाता है.
वहीं स्कूल प्रिंसिपल सूर्यकांत पाठक का कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ उस जगह पर यथास्थिति बनाए रखी है.
उन्होंने कहा, "सिर्फ़ यथास्थिति बनाए रखी गई. यहां पर पहले भी कई प्रिंसिपल रहे, लेकिन उन्होंने भी इसमें कोई बदलाव नहीं किया."

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सांसद को इसी बात से एतराज़ था कि प्रिंसिपल ने इस मामले की शिकायत क्यों नहीं की. वहीं उन्होंने इस मुद्दे पर प्रिंसिपल से कई सवाल किए और उनका आरोप है कि प्रिंसिपल बचाव ही करते रहे.
वहीं सांसद ने केंद्रीय विद्यालय समिति की होने वाली बैठक की भी जानकारी मांगी है ताकि यह पता चल सके कि क्या उन्होंने कभी इस धार्मिक स्थल के बारे में शिकायत की थी.
प्रिंसिपल पर अब आरोप लग रहा है कि उन्होंने स्कूल के बाहर लगाई गई गुमटियों की शिकायत तो ज़रूर की, लेकिन कभी भी धार्मिक स्थल का मामला नहीं उठाया.
बताया जा रहा है कि सांसद से शिकायत करने वालों में कुछ गुमटी वाले हैं जिनको हटाने की बात प्रिंसिपल कर रहे थे. लेकिन वो सामने नहीं आए हैं.
प्रज्ञा ठाकुर शुक्रवार की नमाज़ के दिन स्कूल परिसर में पहुंची थीं और उनका दावा है कि उस दिन लगभग 300 लोग नमाज़ पढ़ रहे थे.

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लोगों का क्या है कहना?
वहीं उस परिसर में नमाज़ पढ़ने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि वहां पर शुक्रवार को ज़्यादा लोग नमाज़ पढ़ते हैं और बाक़ी दिनों में सिर्फ़ 10-12 लोग दो वक़्त की नमाज़ पढ़ते हैं.
वहीं प्रिंसिपल ने भी सांसद को बताया था कि दो समय में लगभग 10 लोग नमाज़ पढ़ते हैं जिसके बाद नमाज़ पढ़ने वाले लोगों की संख्या को लेकर सासंद ने प्रिंसिपल से सवाल-जवाब किए थे.
इस विवाद के बाद पुलिस प्रशासन ने सिर्फ़ पांच लोगों को ही शनिवार को नमाज़ पढ़ने दी.
अब इस मस्जिद के काग़ज़ातों को देखा जा रहा है.
वक़्फ़ बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, शेख़ हसरुद्दीन का कहना है कि इस मामले में रिकॉर्ड देखकर ही मस्जिद के बारे में बताया जा सकता है.
वहीं पुलिस का कहना है कि स्कूल परिसर में क्या चल रहा है इसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.
मस्जिद में नमाज़ पढ़ने वाले ज़्यादातर लोग इस पर कुछ बोलने से बचते रहे.
नदीम ख़ान नाम के एक व्यक्ति ने बताया कि वे साल 2000 से कई बार वहां नमाज़ पढ़ चुके हैं.
नदीम कहते हैं कि वहां तीन वक़्त की नमाज़ होती थी, लेकिन लॉकडाउन के बाद से दो बार की नमाज़ ही हो रही है.
उन्होंने यह भी बताया, "शुक्रवार के दिन ही यहां पर इलाक़े के ज़्यादा लोग आते हैं. वैसे चंद लोग ही नमाज़ पढ़ते हैं."
लेकिन उनका ये भी कहना है कि ये कहना ग़लत होगा कि इसे क़ब्ज़ा किया गया है.

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वो कहते हैं, "यही वजह है कि कभी भी सेंट्रल स्कूल ने इस पर आपत्ति नहीं की क्योंकि बरसों से मुसलमान नमाज़ पढ़कर चले जाते हैं और किसी किस्म का कोई विवाद भी नहीं हुआ है."
वे कहते हैं कि लोग बमुश्किल आधा घंटे वहां रहते हैं और बरसों से यह सिलसिला चला आ रहा है.
नमाज़ पढ़ने वाले लोग पहले स्कूल के मुख्य द्वार से प्रवेश करते थे, लेकिन कुछ समय से उन्हें पीछे के दरवाज़े से आने दिया जाता है.
लेकिन भोपाल की सांसद के सामने आने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया.
प्रज्ञा ठाकुर ने अब स्कूल प्रिंसिपल की शिकायत केंद्र सरकार से करने का भी फ़ैसला किया है.
अब इस घटना के सामने आने के बाद शनिवार से स्कूल प्रशासन ने पुलिस की मौजूदगी में मात्र पांच लोगों को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त दी है. माना जा रहा है कि इस मस्जिद पर फ़ैसला होने तक यही स्थिति बनाई रखी जाएगी.
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