उत्तर प्रदेश चुनाव: बीजेपी और समाजवादी पार्टी के चुनावी वादों में कितना अंतर है

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- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
मंगलवार को उत्तर प्रदेश के 2022 के चुनाव के पहले चरण के मतदान के ठीक दो दिन पहले भाजपा और सपा ने लखनऊ में अपना घोषणापत्र जारी किया.
गृह मंत्री अमित शाह ने लखनऊ ने इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में पार्टी के 12 पन्नों का चुनावी घोषणा पत्र जारी किया जिसके अंदर आठ पन्नों में पार्टी ने अपने चुनावी वादों को संक्षेप में रखने की कोशिश की.
पार्टी का घोषणापत्र जारी करते हुए केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि पार्टी 2017 में की गई 212 घोषणाओं में से 92 प्रतिशत वादे पूरे कर चुकी है.
समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पहले ही कह चुके थे कि वो सपा का घोषणापत्र भाजपा के घोषणापत्र जारी होने बाद जारी करेंगे और उन्होंने भाजपा के संकल्प पत्र जारी होने के चंद घंटों में ही समाजवादी पार्टी का वचन पत्र लखनऊ में प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर जारी कर दिया.
87 पन्नों के घोषणापत्र में योजनाओं की लम्बी फ़ेहरिस्त है और उन्हें विस्तार से बताने की कोशिश की गई है.
लेकिन पहले कोशिश करते हैं भाजपा के 2022 के लोक कल्याण संकल्प पत्र के कुछ पहलुओं को आंकने की और क्या थे 2017 में इनसे जुड़े वादे.

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भाजपा: किसान को मिलेगी सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली
तीन कृषि क़ानूनों की वापसी के बावजूद किसानों की नाराज़गी झेल रही बीजेपी का सबसे पहला और सबसे बड़ा चुनावी वादा है कि अगले 5 सालों में वो सभी किसानों को सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली मुहैया कराएगी.
कृषि को और 'समृद्ध बनाने के लिए' वैसे तो पार्टी ने कुल 13 वादे किये लेकिन, पश्चिम उत्तर प्रदेश और तराई के गन्ना किसानों और गन्ने की ख़रीद और भुगतान से जुड़े विवादों को ध्यान में रखते हुए इस बार भाजपा ने फिर यह वादा किया किया है कि वो किसानों को 14 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित कराएगी. ऐसा हूबहू भाजपा ने 2017 में भी कहा था.
इससे आगे बढ़ कर, देरी से होने वाली गन्ना ख़रीद के भुगतान के लिए चीनी मिलों से ब्याज वसूल कर गन्ना किसानों को ब्याज समेत भुगतान करने का वादा किया गया है. इसके अलावा भाजपा ने यह भी वादा किया है कि वो अगले 5 वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर गेहूं एवं धान की ख़रीद को और मज़बूत करने की कोशिश करेगी.

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बार-बार अलग अलग मंचों से और सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ यह कह चुके हैं कि, "भाजपा सरकार ने गन्ना किसानों को 1 लाख 51 हज़ार करोड़ के गन्ना मूल्य का भुगतान किया है.
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इस रोडमैप के बनने का ज़िक्र सार्वजनिक तौर पर किसी सरकारी सूत्र से नहीं मिल पाया, लेकिन समय-समय पर किसानों से जुड़ी योजनाओं जैसे कि 'प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि' से किसानों को होने वाले लाभ को किसानों की आय दुगनी होने के लक्ष्य से जोड़ कर बताया जाता है.
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क्या भाजपा के संकल्प से गाय इस बार ग़ायब है ?
भाजपा ने अपने 2022 संकल्प पत्र में दुग्ध विकास के बारे में सिर्फ़ यह लिखा है कि अगले 5 सालों में भाजपा "1,000 करोड़ की लागत से प्रदेश को, नन्द बाबा दुग्ध मिशन के अन्तर्गत, दुग्ध उत्पादन में अग्रणी राज्य बनाए रखेगी. इसके लिए गाँवों में दुग्ध सहकारी समितियां का गठन कर दुग्ध उत्पादकों को गाँव में ही उनके दूध के उचित मूल्य पर विक्रय की सुविधा उपलब्ध कराएगी."
लेकिन 2017 में भाजपा ने पशुधन से जुड़े मुद्दों को काफ़ी प्रमुखता दी थी. 2017 के घोषणापत्र में पशुधन की संख्या में गिरावट और दुधारू पशुओं की अवैध तस्करी का हवाला देते हुए कहा गया था कि उत्तर प्रदेश में डेयरी जैसे उद्योग का विकास नहीं हो पा रहा है और, " सभी अवैध बूचड़खानों को पूरी कठोरता से बंद किया जाएगा और सभी यांत्रिक बूचड़खानों पर प्रतिबंध लगाया जायेगा."
पीटीआई के हवाले से द हिन्दू में छपी ख़बर के मुताबिक़ योगी सरकार ने 2020 में अध्यादेश जारी कर गोहत्या के क़ानून को और सख़्त कर दिया था और अब गोहत्या के मामले में दोषी साबित होने पर 10 साल की सज़ा और 5 लाख जुर्माना लगाने का प्रावधान है.
इन दिनों उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या भी काफ़ी व्यापक है. गौशाला बनाने के अभियान के बावजूद पशु फ़सलों को नुक़सान पहुंचा रहे हैं और किसानों को रात भर खेतों में पहरा देना पड़ रहा है.
ग़ौरतलब है कि अपने 2017 के संकल्प पत्र में भाजपा ने फ़सल को होने वाले नुक़सान को रोकने के लिए, "ग्राम पंचायत स्तर पर पशु संरक्षण की योजना बनाने" का वादा भी किया था.
उत्तर प्रदेश में विपक्ष आवारा पशुओं की समस्या को भी चुनावी मुद्दा बना रहा है.
समाजवादी पार्टी समय समय पर इस मुद्दे को उठाते हुए आरोप लगाती है कि, "सड़कों पर पशु घूम रहे हैं. हादसे होने का डर साथ ही साथ ही किसानों की फसलों को पहुंचा रहे हैं भारी नुकसान."
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भाजपा: हर परिवार में एक रोज़गार या स्वरोज़गार 'का अवसर'
इन दिनों उत्तर प्रदेश और बिहार में युवाओं का रोष और सरकारी नौकरी से जुड़े इम्तिहानों में पेपर लीक होने का मुद्दा काफ़ी गरमाया हुआ है. लेकिन भाजपा का दावा है कि उसने पिछले पांच साल में तीन करोड़ से अधिक रोज़गार व स्वरोज़गार के अवसर प्रदान किये हैं.
अपने संकल्प पत्र में इस बार पार्टी ने यह वादा किया है कि "अगले पांच सालों में वो प्रदेश के हर परिवार को कम से कम एक रोज़गार या स्वरोज़गार का अवसर देगी. इसके अलावा वो उत्तर प्रदेश सरकार में सभी खाली पदों को जल्दी भरने के लिए प्रतिबद्ध है.''
ख़ुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट कर कहा था कि उत्तर प्रदेश में पिछले पांच सालों में रिकॉर्ड संख्या में युवाओं को रोज़गार व स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया गया है.
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उत्तर प्रदेश सरकार का यह भी दावा है कि पिछले पौने पांच वर्षों में उसने साढ़े चार लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है.
लेकिन विपक्ष इस चुनाव में रोज़गार की कमी को एक बड़ा मुद्दा बना रहा है.
प्रियंका गाँधी ने बेरोज़गारी के आंकड़ों वाली एक रिपोर्ट को साझा करते हुए आरोप लगाया कि, "उप्र के चुनावों में '80-20' जैसी बातें करना चार सौ बीसी कर युवाओं के मुद्दों से ध्यान भटकाने का तरीका है. असलियत ये है कि भाजपा सरकार में प्रति 100 लोगों में से 68 के पास काम नहीं है."
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दरअसल 2017 में भाजपा ने वादा किया था कि वो पांच साल में 70 लाख रोज़गार व स्वरोज़गार के अवसर पैदा करेगी और उत्तर प्रदेश में स्थापित हर उद्योग में 90 प्रतिशत नौकरियां प्रदेश के युवाओं के लिए आरक्षित करेगी.
इसके अलावा 2017 में भाजपा ने यह भी कहा था कि वो उत्तर प्रदेश में देश का सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इन्क्यूबेटर स्थापित करेगी. उत्तर प्रदेश सरकार के पास स्टार्ट अप नीति तो है और उससे जुड़ी योजनाओं के लिए फ़ंड भी आवंटित हुआ है, लेकिन उसके लागू होने से कितना रोज़गार पैदा हुआ है इसकी जानकारी सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है.
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2022 के संकल्प पत्र में पार्टी ने अब एक स्टार्ट अप मिशन बनाने का वादा किया है जिससे अनुमानित 10 लाख रोज़गार व स्वरोज़गार मिलने की उम्मीद है. उत्तर प्रदेश को स्टार्ट अप रैंकिंग में भी नंबर एक बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
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स्कूटी, स्मार्ट फ़ोन और टैबलेट बांटने की होड़
उत्तर प्रदेश में लड़कियों को स्कूटी देने की चुनावी होड़ भी नज़र आ रही है. सबसे पहले इस बात का एलान कांग्रेस ने नवंबर, 2021 में किया था और प्रियंका गाँधी ने कहा था कि सत्ता में आने पर कांग्रेस छात्राओं को स्मार्ट फ़ोन और स्कूटी देगी.
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अब भाजपा ने भी अपने घोषणापत्र में कहा है, "कॉलेज जाने वाली मेधावी छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रानी लक्ष्मी बाई योजना के अंतर्गत मुफ़्त स्कूटी वितरित की जाएगी. साथ ही पार्टी स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तीकरण योजना के तहत 2 करोड़ टैबलेट अथवा स्मार्ट फ़ोन वितरित करेगी."
2017 में भाजपा ने वादा था कि प्रदेश के सभी युवाओं को कॉलेज में दाखिला लेने पर मुफ़्त लैपटॉप दिया जायेगा और कॉलेज में दाखिला लेने वाले सभी युवाओं को एक जीबी प्रतिमाह मुफ़्त इंटरनेट मिलेगा. जब हमने सार्वजनिक तौर पर मौजूद इससे जुड़े आंकड़े तलाशने की कोशिश की तो कुछ पुराने सरकारी ट्वीट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिर्फ़ टॉपर्स को लैपटॉप बांटते नज़र आ रहे हैं.
हालांकि दिसंबर 2021 में योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में एक बड़ा कार्यक्रम कर एक करोड़ टैबलेट और स्मार्ट फ़ोन के वितरण की योजना को लांच किया था.
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'लव जिहाद': कम से कम दस साल की सज़ा
भाजपा ने 2022 के संकल्प पत्र में कहा है कि वो लव जिहाद करने पर "कम से कम दस वर्षों की सज़ा और एक लाख के जुर्माने का प्रबंध सुनिश्चित करेगी."
फ़िलहाल 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून 2021' जिसे विवादित 'लव जिहाद' के मामलों में लागू किया जाता है, उसके तहत अपराध की अलग-अलग श्रेणियों में 3 से 10 साल तक की सज़ा हो सकती है. लेकिन अब इन मामलों में योगी सरकार कम से कम दस साल की सज़ा देने की बात कर रही है.
अक्टूबर 2021 में अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में एक हलफ़नामा दाखिल कर यह जानकारी दी थी कि जुलाई 2021 तक विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध कानून के तहत प्रदेश में कुल 79 मामले दर्ज हुए हैं जिनमे से 50 मामलों में आरोपपत्र दाख़िल हो चुके हैं, सात में क्लोज़र रिपोर्ट लग चुकी है, और 22 मामलों में जांच जारी थी.
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क्या हैं सपा के 2022 के 22 संकल्प?
यूं तो समाजवादी पार्टी ने 87 पन्नों का वचन पत्र जारी किया है, लेकिन उनके "22 में 22 संकल्प पत्र" से पार्टी की मुख्य योजनाओं की झलक मिलती है.
इसमें किसानों के लिए सभी फ़सलों के लिए एमएसपी, गन्ना किसानों को 15 दिन में भुगतान, 2025 तक सभी किसानों को क़र्ज़ से मुक्ति, दो एकड़ से कम ज़मीन वाले किसानों को मुफ़्त में दो बोरा डीपी और पांच बोरा यूरिया, सभी किसानों को सिंचाई के लिए मुफ़्त बिजली, ब्याज मुक्त लोन, बीमा और पेंशन जैसे बड़े वादे शामिल हैं.
साथ ही किसान आंदोलन के दौरान मरने वाले किसानों के परिजनों को 25 लाख की आर्थिक मदद और मरने वाले किसानों की याद में स्मारक बनाने का वादा घोषणापात्र में मौजूद है.
सपा का यह भी वादा है कि वो सभी बीपीएल परिवारों को प्रति वर्ष 2 एलपीजी सिलेंडर मुफ़्त देगी. साथ ही दो पहिया वाहन मालिकों को प्रति माह एक लीटर मुफ़्त पेट्रोल, ऑटो चालकों को हर महीने तीन लीटर पेट्रोल या 6 किलो सीएनजी मुफ़्त देने का वादा भी सपा कर रही है.
रोज़गार के नज़रिये से वचन पत्र में मनरेगा के तर्ज पर अर्बन एम्प्लॉयमेंट गारंटी एक्ट बनाने की बात कही गई है और आईटी सेक्टर में 22 लाख लोगों को नौकरियां देने की बात की गयी है. महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने की बात भी कही गयी है.
समाजवादी पार्टी सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को बहाल करे का वादा भी कर रही है. इसके तहत 2005 से पहले, कर्मचारियों को मिलने वाली पेंशन व्यवस्था लागू करने की बात कही गयी है. पार्टी के सबसे प्रमुख घोषणाओं में समाजवादी पेंशन योजना को फिर से शुरू करना है जिसके तहत 1 करोड़ ग़रीब परिवारों को लाभ मिलने की बात कही गयी है. वचन पत्र में समाजवादी कैंटीन में 10 रुपये में थाली की व्यवस्था की बात भी कही गयी है.
समाजवादी पार्टी का दावा है कि अगर वो शासन में आएगी तो सभी थानों और तहसीलों को भ्रष्टाचार मुक्त बनाएगी और महिलाओं, अल्पसंख्यकों और दलितों के प्रति संगठित हेट क्राइम के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करेगी.
समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में लैपटॉप बाँटने वाली पहली सरकार थी और 2022 में भी पार्टी सभी 12वीं पास छात्रों को लैपटॉप देने का वादा कर रही है.
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