अमित शाह ने जाटों से कहा- ख़फ़ा हैं तो बालियान के साथ मेरे घर आ जाइए- प्रेस रिव्यू

अमित शाह

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दिन जैसे-जैसे क़रीब आ रहे हैं, बीजेपी सत्ता में बने रहने के लिए पूरा ज़ोर लगा रही है और कोई कोर कसर बाक़ी नहीं रख रही.

बुधवार को बीजेपी ने जाटों को आश्वस्त करने की कोशिश की. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गन्ने का भुगतान समय पर करने, नौकरियों में आरक्षण और चुनाव बाद राष्ट्रीय लोकदल से गठबंधन के लिए दरवाज़ा खुला रखने की बात कही है.

अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इस ख़बर को पहले पन्ने पर प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी सांसद परवेश साहिब सिंह वर्मा के नई दिल्ली स्थित आवास पर पंचायत और ज़िला स्तर के क़रीब 200 प्रभावी जाट नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक में अमित शाह ने कहा कि जाटों से बीजेपी का प्रेम कोई नया नहीं है. उन्होंने कहा कि जाटों ने 650 सालों तक मुग़लों से लड़ाई लड़ी थी और बीजेपी भी देश विरोधियों से लड़ रही है.

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, अमित शाह ने कहा, ''जयंत चौधरी ग़लत संगत में चले गए हैं. लेकिन चुनाव बाद दोनों के साथ आने की संभावना ख़त्म नहीं हुई है. समाज के लोग उन्हें समझाएं.'' राष्ट्रीय लोकदल प्रमुख जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी से चुनावी गठबंधन किया है.

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किसानों की मदद के लिए तैयार

द हिन्दू की रिपोर्ट के अनुसार, अमित शाह ने कहा, ''मैंने राष्ट्रीय राजनीति की शुरुआत उत्तर प्रदेश से की और तीन चुनाव लड़ा. जाटों ने बीजेपी की दिल खोलकर मदद की. ऐसा इसलिए है कि जाट बीजेपी की तरह अपने लिए नहीं सोचते हैं. दोनों राष्ट्र के लिए सोचते हैं. जाट बीजेपी की तरह राष्ट्र की सुरक्षा के लिए सोचते हैं. तीन जाट राज्यपाल हैं और नौ सांसद.''

अमित शाह ने कहा, ''उत्तर प्रदेश में हमने सत्ता में आने के बाद 36,000 करोड़ कृषि लोन जारी किया, 1,35,000 करोड़ किसानों के खाते में डाला, 1,48,000 गन्ना किसानों को दिया. अगर कोई कमी रह गई है तो हम उसकी भी भरपाई करेंगे.'' अमित शाह ने ये भी कहा कि उत्तर प्रदेश में 2014 के बाद कोई दंगा नहीं हुआ.

अमित शाह ने कहा, ''अगर आप मुझसे ख़फ़ा हैं तो संजीव बालियान के साथ मेरे घर आ जाइए, लेकिन अपने वोट को लेकर ग़लती मत कीजिए. यह ग़लती पाँच साल से पहले ठीक नहीं होगी.''

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पश्चिम उत्तर प्रदेश में 10 और 14 फ़रवरी को मतदान है. उत्तर प्रदेश की कुल 403 सीटों में से पश्चिम उत्तर प्रदेश में 130 से ज़्यादा सीटें हैं. किसान आंदोलन के कारण इस बार पश्चिम उत्तर प्रदेश में बीजेपी के लिए मुश्किल स्थिति है. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव और 2014 के अलावा 2019 के लोकसभा चुनाव में जाटों ने बीजेपी का समर्थन किया था.

चुनाव बाद आरएलडी के लिए दरवाज़ा खुला रखने वाले अमित शाह के बयान पर जयंत चौधरी ने ट्वीट कर कहा, ''न्योता मुझे नहीं, उन 700 किसान परिवारों को दो जिनके घर आपने उजाड़ दिए.''

बीजेपी सांसद परवेश वर्मा ने भी कहा है कि जाट समुदाय के लोग जयंत से बात करेंगे. वहीं केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि जाट मुज़फ़्फ़रनगर और पश्चिम उत्तर प्रदेश को भूल नहीं गए हैं. बालियान ने कहा कि जाट अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहते हैं.

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राष्ट्रीय लोकदल के वरिष्ठ नेता और छपरौली से उम्मीदवार अजय कुमार ने 'द हिन्दू' से कहा कि बीजेपी चुनाव से पहले भ्रम पैदा करने में माहिर है. अजय कुमार ने कहा कि बीजेपी ज़मीनी हक़ीक़त देख बौखला गई है.

द हिन्दू ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जयंत चौधरी पर ज़ोर डालने का मतलब यही है कि बीजेपी ने उनकी लोकप्रियता को स्वीकार कर लिया है. एक किसान नेता ने कहा, ''बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व मुसलमानों के बीच यह संदेश देना चाहता है कि आरएलडी और जाटों पर भरोसा नहीं किया जा सकता और वे चुनाव के बाद बीजेपी के साथ आ सकते हैं.''

राजा भैया

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इमेज कैप्शन, मुलायम सिंह यादव के साथ राजा भैया

समाजवादी पार्टी ने राजा भैया के ख़िलाफ़ 20 साल बाद उतारा उम्मीदवार

प्रतापगढ़ में कुंडा विधानसभा सीट पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के ख़िलाफ़ समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार उतारने के फ़ैसले को आज लगभग सभी अख़बारों ने जगह दी है.

समाजवादी पार्टी ने ऐसा क़रीब दो दशक बाद किया है. कुंडा से छह बार से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीत रहे राजा भैया के 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव से संबंध ख़राब हुए हैं.

द हिन्दू ने अपनी ख़बर में लिखा है, ''राजा भैया को समाजवादी पार्टी के सहयोगी के तौर पर देखा जाता था, लेकिन उन्होंने राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के लिए क्रॉस वोटिंग की थी. अखिलेश यादव की सरकार में राजा भैया मंत्री भी थे. अखिलेश यादव ने राजा भैया को एक झूठा विधायक और धमकीदार कहा था. उन्होंने कहा था कि राजा भैया के लिए समाजवादी पार्टी का दरवाज़ा हमेशा के लिए बंद हो गया है.

2007, 2012 और 2017 में समाजवादी पार्टी ने राजा भैया के ख़िलाफ़ कोई उम्मीदवार नहीं उतारा था. ऐसे में उनकी जीत और आसान हो जाती थी. हालांकि अब भी कुंडा में राजा भैया को हराना बहुत आसान नहीं माना जाता है. समाजवादी पार्टी ने गुलशन यादव को टिकट दिया है. गुलशन यादव नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन हैं और राजा भैया के सहयोगी रहे हैं.

ग़ुलाम नबी आज़ाद

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ग़ुलाम नबी आज़ाद के पद्म सम्मान पर कांग्रेस में कलह

हिन्दी अख़बार दैनिक जागरण ने पहले पन्ने पर ख़बर लगाई है- पद्म सम्मान के मामले में कांग्रेस के अंदर कटुता. जागरण ने अपनी ख़बर में लिखा है, कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई दिनों दिन गहरी होती जा रही है. कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल ग़ुलाम नबी आज़ाद को दिया गया पद्म भूषण सम्मान भी पार्टी को नागवार गुज़रा है.

अख़बार ने लिखा है, ''टीम राहुल के रणनीतिकार माने जाने वाले जयराम रमेश ने उन पर परोक्ष रूप से सरकार का ग़ुलाम होने का बड़ा तंज़ किया है. नाराज़ नेताओं में शामिल कपिल सिब्बल ने आश्चर्य जताया कि 'जिसकी उपलब्धियां और योगदान को देश मान्यता दे रहा है, उसकी पार्टी में कोई उपयोगिता नहीं है.'

आनंद शर्मा भी आज़ाद के साथ खड़े हुए. अब तक सिर्फ़ तीन कांग्रेस नेताओं ने ग़ुलाम नबी आज़ाद को बधाई दी है. शशि थरूर ने लिखा है कि 'दूसरे पक्ष की सरकार ने भी आपकी उपलब्धियों को पहचाना और सम्मानित किया, इसके लिए बधाई हो.'

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