सनी लियोनी के ‘मधुबन’ गाने को तीन दिन के अंदर हटाएगी सारेगामा कंपनी - प्रेस रिव्यू

सनी लियोनी

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मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की चेतावनी के बाद म्यूज़िक कंपनी सारेगामा ने कहा है कि वो अभिनेत्री सनी लियोनी वाले अपने म्यूज़िक वीडियो 'मधुबन' में तब्दीली करेगी.

अंग्रेज़ी अख़बार 'हिंदुस्तान टाइम्स' लिखता है कि सारेगामा का कहना है, "हालिया प्रतिक्रियाओं को देखते हुए और देश के नागरिकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए, हम मधुबन गीत का नाम और बोल दोनों बदलेंगे."

सारेगामा ने कहा, "तीन दिन के अंदर सभी प्लेटफ़ॉर्म्स पर पुराने गाने की जगह नया गाना होगा."

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अभिनेत्री सनी लियोनी और गाने के गायक को चेतावनी देते हुए कहा था कि वो वीडियो के लिए माफ़ी मांगें और तीन दिन के अंदर वीडियो हटाएं वरना कार्रवाई के लिए तैयार रहें.

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा
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इससे पहले नरोत्तम मिश्रा की चेतावनी के बाद डिज़ाइनर सब्यसाची मुखर्जी ने अपना मंगलसूत्र विज्ञापन वापस ले लिया था.

चेतावनी के तुरंत बाद कंपनी ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि वीडियो बदला जाएगा. मंत्री की चेतावनी का हवाला दिए बिना कंपनी ने कहा कि यह फ़ैसला हालिया प्रतिक्रियाओं के बाद लिया गया है.

नरोत्तम मिश्रा ने कहा था, "कुछ विधर्मी लगातार हिंदू भावनाओं को आहत कर रहे हैं. ऐसा ही एक वीडियो 'मधुबन में राधिका नाचे' निंदनीय प्रयास है. मैं सनी लियोनी जी, शारिब और तोशी जी को चेतावनी देता हूं कि वो समझ जाएं. अगर उन्होंने तीन दिन के अंदर गाना हटाकर माफ़ी नहीं मांगी तो हम उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करेंगे."

इस गाने में 1960 की फ़िल्म कोहिनूर में मोहम्मद रफ़ी के गाए गीत के कुछ बोल भी थे.

नरोत्तम मिश्रा के अलावा मथुरा के पुजारियों का कहना था कि उन्होंने वीडियो को आपत्तिजनक पाया है और अगर इसे हटाया नहीं गया तो वो कोर्ट जाएंगे.

अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पाठक ने कहा कि सनी लियोनी ने इस गाने के ज़रिए बृजभूमि की प्रतिष्ठा को 'अपमानजनक ढंग' से धूमिल किया है.

शादी

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विवाह की आयु नहीं बल्कि पर्सनल लॉ को लेकर चिंतित हैं अल्पसंख्यक समुदाय

केंद्र सरकार ने लड़कियों की शादी की न्यूनतम आयु 18 से बढ़ाकर 21 करने वाले विधेयक बाल विवाह का निषेध (संशोधन) विधेयक 2021 को संसदीय स्थायी समिति को भेज दिया है, लेकिन अल्पसंख्यक समुदाय देश में अपने पर्सनल लॉ पर असर पड़ने को लेकर चिंता जता रहे हैं.

अंग्रेज़ी अख़बार 'द इंडियन एक्सप्रेस' लिखता है कि अधिकतर अल्पसंख्यक समुदायों को शादी की उम्र बढ़ाने को लेकर नहीं बल्कि संविधान के ज़रिए मिली पर्सनल लॉ की सुरक्षा को लेकर चिंता है.

ड्राफ़्ट बिल के अनुसार जो क़ानून प्रस्तावित किया गया है वो एक बार बनने के बाद सभी समुदायों पर लागू होगा जो कि हालिया मैरिज और पर्सनल लॉ की जगह ले लेगा.

पारसी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठन जियो पारसी की निदेशक डॉक्टर शेरनाज़ कामा कहती हैं कि इस क़ानून से उनके समुदाय पर असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यहां पर 'पुरुष और महिलाएं दोनों देर से शादी करते हैं' लेकिन यह जांच करने की ज़रूरत है कि इससे पर्सनल लॉ पर कितना संभावित असर पड़ता है क्योंकि यह संविधान के ज़रिए मिले हैं.

वो कहती हैं, "व्यक्तिगत रूप से मैं सोचती हूं कि किसी व्यक्ति के वयस्क होने के बाद किसी को भी इस मुद्दे में दख़ल देने का अधिकार नहीं है कि कौन कब शादी कर सकता है और कब नहीं कर सकता है."

हरिद्वार

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हरिद्वार भड़काऊ भाषण मामले में दो और लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर

हरिद्वार में पिछले दिनों हुए 'धर्म संसद' नामक कार्यक्रम में एक समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ भड़काऊ भाषण देने के आरोप में शहर कोतवाली पुलिस ने जांच के बाद संत धर्मदास और साध्वी अन्नपूर्णा के ख़िलाफ़ भी मुक़दमा दर्ज कर लिया है.

'अमर उजाला' अख़बार के मुताबिक़, पुलिस इस मामले में पहले ही उत्तर प्रदेश के शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व चेयरमैन वसीम रिज़वी उर्फ़ जितेंद्र नारायण त्यागी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर चुकी है. दोनों अभियुक्त हरिद्वार के संत हैं.

उत्तरी हरिद्वार खड़खड़ी स्थित वेद निकेतन में 17 से 19 दिसंबर तक 'धर्म संसद' का आयोजन किया गया था. धर्म संसद में जूना अखाड़ा के महामंडलेश्वर यति नरसिम्हानंद, यूपी शिया वक़्फ़ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ़ वसीम रिज़वी, स्वामी प्रबोधानंद गिरि, धर्मदास, साध्वी अन्नपूर्णा समेत कई संत शामिल हुए थे.

धर्म संसद में एक समुदाय विशेष को लेकर दिए गए भड़काऊ भाषण के वीडियो वायरल हुए थे जिसको लेकर टीएमसी प्रवक्ता साकेत गोखले ने भी ट्वीट कर सवाल खड़े किए थे. इसके बाद देशभर में कई बड़े नेताओं और सेना से जुड़े रहे बड़े अधिकारियों ने भी इसकी आलोचना की थी.

कोरोना

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कोविड टास्क फ़ोर्स के चेयरमैन बोले- बच्चों को वैक्सीन लगाना ज़रूरी

देश में 15 से 18 साल के बच्चों को 3 जनवरी से कोरोना वैक्सीन लगाई जाएगी. सरकार ने यह फैसला नए कोरोना वेरिएंट ओमिक्रॉन के बढ़ते ख़तरे को देखते हुए लिया है.

'दैनिक भास्कर' के मुताबिक़, केंद्र सरकार की कोविड-19 टास्क फ़ोर्स के चेयरमैन डॉक्टर एनके अरोड़ा ने रविवार को कहा कि बच्चों को भी बड़ों की तरह ही 4 सप्ताह के अंतर पर वैक्सीन की दोनों डोज़ दी जाएगी.

उन्होंने इसे बेहद उचित और समय पर किया गया फ़ैसला बताया है. साथ ही इस फ़ैसले को अवैज्ञानिक बताने वालों के दावों को भी ख़ारिज कर दिया है.

दरअसल रविवार को एम्स के वरिष्ठ डॉक्टर संजय के. राय ने सरकार के इस फ़ैसले पर सवाल उठाए थे.

उन्होंने इस फ़ैसले को अवैज्ञानिक बताया था. उनका कहना है कि इस फ़ैसले पर अमल करने से पहले उन देशों के डेटा की स्टडी करनी चाहिए जहां पहले ही बच्चों को वैक्सीन लगाई जा रही है, अगर ख़तरे और फ़ायदे का आकलन करें तो पाएंगे कि बच्चों को वैक्सीन लगाने के फ़ायदे कम हैं और ख़तरे ज़्यादा हैं.

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