भारत ने पहली बार माना, तालिबान के पास पूरे अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता -प्रेस रिव्यू

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भारत ने पहली बार स्पष्ट रूप से आधिकारिक तौर पर तालिबान को एक 'स्टेट ऐक्टर' (सरकार से जुड़ा संगठन) माना है.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार को ऑस्ट्रेलिया के साथ जारी किए संयुक्त बयान में भारत ने ये बात स्वीकार की है कि तालिबान की सत्ता पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर है.
इस बयान को भारत की अफ़ग़ान नीति की दिशा में एक क़दम आगे बढ़ाने जैसा माना जा रहा है.
लेकिन अभी तक भारत ने तालिबान के प्रशासन को अफ़ग़ानिस्तान की सरकार का दर्जा नहीं दिया है.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार का कहना है कि पिछले हफ़्ते तालिबान कैबिनेट की घोषणा के बाद काफ़ी सोच-समझकर ये बयान तैयार किया गया था.
शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑस्ट्रेलिया के साथ 2+2 स्तर की वार्ता में तालिबान का ज़िक़्र 'काबुल के निज़ाम' के तौर पर किया था.
इस बैठक में ऑस्ट्रेलिया और भारत दोनों के रक्षा और विदेश मंत्री शामिल हुए थे.

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भूपेंद्र पटेल: क्या आनंदीबेन ने बाज़ी जीत ली?
पहली बार विधायक बने भूपेंद्र पटेल को गुजरात के नए मुख्यमंत्री के रूप में चुन लिया गया. माना जा रहा है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा प्रभावशाली पाटीदार समुदाय को मनाना चाहती है.
कोलकाता से छपने वाले टेलीग्राफ़ अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, भूपेंद्र पटेल के नाम पर मुहर लगाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी भूमिका रही है. भूपेंद्र पटेल के नाम पर हुए फ़ैसले को गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और उत्तर प्रदेश की मौजूदा गवर्नर आनंदीबेन पटेल की गृह मंत्री अमित शाह पर बढ़त के तौर पर भी देखा जा रहा है.
अख़बार लिखता है कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री पद के लिए आनंदीबेन पटेल को अपना उत्तराधिकारी चुना था. लेकिन जब आनंदीबेन पटेल को पांच साल पहले इस्तीफ़ा देना पड़ा तो उस वक़्त उनकी विदाई की पटकथा तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने लिखी थी.
गुजरात बीजेपी के एक नेता ने टेलीग्राफ़ अख़बार को बताया, "आनंदीबेन ने तब नितिन पटेल को अपना समर्थन दिया था. लेकिन अमित भाई ने उसे ख़ारिज कर दिया और उन्होंने रुपाणी को चुना."
गुजरात की राजनीति में रुपाणी 'अमित शाह के भरोसेमंद' के तौर पर जाने जाते रहे हैं.
लेकिन इस बार रुपाणी के उत्तराधिकारी के तौर पर चुने गए भूपेंद्र पटेल की पहचान 'आनंदीबेन के क़रीबी सहयोगी' की रही है. वे विधानसभा में आनंदीबेन की खाली की गई सीट से चुने गए हैं. रविवार को अपने नाम पर फ़ैसला होने के बाद भूपेंद्र पटेल ने कहा, "मुझ पर आनंदीबेन का आशीर्वाद हमेशा रहा है."

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असम-मिज़ोरम के बाद आंध्र और ओडिशा के बीच सीमा विवाद
असम-मिज़ोरम सीमा विवाद का मामला अभी थमा भी नहीं था कि ओडिशा के कोरापुट ज़िले के कोटिया ग्राम पंचायत के 21 गांवों को लेकर ओडिशा और आंध्र प्रदेश राज्य के बीच चल रहे विवाद का मामला तूल पकड़ता हुआ दिख रहा है.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन गांवों में दोनों ही राज्य सरकारें अपने स्कूल चला रही हैं और बच्चों को उड़िया और तेलुगू भाषा माध्यमों के स्कूल में दाख़िला लेना पड़ा है.
इस क्षेत्र के छह गांवों में चुनाव कराने के आंध्र प्रदेश के फ़ैसले के बाद ओडिशा ने सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी. इसकी सुनवाई करते हुए 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्य सरकारों को छह हफ़्तों के भीतर राजनीतिक बातचीत के ज़रिए सीमा विवाद सुलझाने के लिए निर्देश दिया था.
अख़बार लिखता है कि अदालत के निर्देश के बावजूद ज़मीन पर हालात वैसे ही हैं. आंध्र प्रदेश ने अपनी सामाजिक योजनाओं के ज़रिए इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी दिखाने की मुहिम तेज़ कर दी है.
दो हफ़्ते पहले आंध्र प्रदेश के अधिकारियों की एक टीम ने यहां आकर आंगनवाड़ी केंद्र, आरोग्य सेंटर, किसान भवन और पंचायत कार्यालय के निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम किया. इसके एक दिन बाद ओडिशा के अधिकारी भी यहां पहुंचे.
कोटिया ग्राम पंचायत के फ़ट्टुसेनेरी में आंध्र प्रदेश बिजली मुहैया करा रहा है तो दोनों ही राज्य सरकारें पीने का पानी. यहां दोनों ही राज्य सरकारें बैनरों और होर्डिंग्स के ज़रिए अपनी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रही हैं.

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पेगासस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
पेगासस मामले की स्वतंत्र जांच के लिए दायर की गई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 13 सितंबर को सुनवाई होनी है.
द हिंदू अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार सात सितंबर को हुई सुनवाई में चीफ़ जस्टिस एनवी रमन्ना की अगुवाई वाली तीन जजों की बेंच ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए मोहलत दी थी.
सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि दूसरा हलफ़नामा फ़ाइल करने के बारे में फ़ैसला लेने के लिए वे कुछ परेशानियों के कारण संबंधित अधिकारियों से मिल नहीं पाए.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए एफ़िडेविट में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि पेगासस मामले की स्वतंत्र जांच की मांग के लिए दायर की गई याचिकाओं की बुनियाद "अटकलबाज़ी और अनुमानों या दूसरी बेबुनियाद मीडिया रिपोर्टों या अधूरे या अपुष्ट सामाग्रियों पर आधारित है."
17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को भेजी गई नोटिस में ये स्पष्ट किया था कि अदालत नहीं चाहती कि सरकार ऐसी कोई चीज़ सार्वजनिक करे जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को ख़तरा पहुंचता हो.

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असदउद्दीन ओवैसी एक वायरस हैं: राधा मोहन सिंह
बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पार्टी के उत्तर प्रदेश मामलों के प्रभारी राधा मोहन सिंह ने शुक्रवार को एआईएमआईएम के प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी को 'वायरस' करार देते हुए कहा कि उनकी पार्टी का अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ 'वो वैक्सीन है जो इसे देश भर में फैलने से रोकेगा.'
टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार बिहार के मोतिहारी में भारतीय जनता पार्टी के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ को संबोधित करते हुए राधा मोहन सिंह ने कहा, "मुसलमानों को एक करने की ओवैसी की कोशिश से देश में ध्रुवीकरण बढ़ेगा."
उन्होंने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे के साथ देश के चौतरफ़ा विकास के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं जबकि कुछ स्वार्थी तत्व समाज और देश को बांटने की कोशिश कर रहे हैं."
"राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस जैसी विपक्षी पार्टियां केवल वोट हासिल करने के लिए हिंदू-मुसलमान की बात करती हैं. बीजेपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जो अल्पसंख्यक समुदाय के लड़के-लड़कियों को रोज़गार मुहैया कराने के लिए योजनाएं चला रही है."
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