विजय रुपाणी का इस्तीफ़ा: केंद्र और राज्यों में बदलाव, बीजेपी क्या संदेश देना चाहती है? - प्रेस रिव्यू

मोदी और रूपाणी

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पिछले कुछ महीनों में केंद्र और बीजेपी में जो चीज़ लगातार हो रही है, वो है बदलाव. ये बदलाव केंद्रीय मंत्रिमंडल में हुए हैं, राज्यों में पार्टी का नेतृत्व बदला जा रहा है.

इकोनॉमिक टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी नए चेहरों को सामने लाने की कोशिश कर रही है.

शनिवार को गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी पद से इस्तीफ़ा देकर त्रिवेंद्र सिंह रावत, सर्बानंद सोनोवाल और बीएस येदियुरप्पा की जमात में शामिल हो गए जिन्होंने अपने राज्यों में नए नेतृत्व के लिए जगह खाली की है.

अख़बार लिखता है कि नेतृत्व में बदलाव की वजह राज्यों और नेताओं के हिसाब से ज़रूर अलग-अलग है लेकिन पार्टी का संदेश स्पष्ट है. ज़्यादातर बीजेपी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व में बदलाव सत्ता विरोधी रुझान पर काबू पाने के मक़सद से किया जा रहा है.

अख़बार का कहना है कि पार्टी खुद को लोगों की राय के हिसाब से ढाल रही है.

पार्टी नेताओं के मुताबिक़ कोरोना महामारी ने आम लोगों की ज़िंदगी के हर पहलू को प्रभावित किया है और सत्ता विरोधी रुझान के कई स्तरों पर इसका साफ़ असर देखा जा रहा है. ये बात सभी पार्टियों पर लागू होती है.

विजय रूपाणी और अमित शाह

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विजय रुपाणी के बाद पटेल और मांडविया के नाम पर चर्चा

बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, विजय रुपाणी के इस्तीफ़े के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री पद के लिए रुपाणी कैबिनेट में उप-मुख्यमंत्री रहे नितिन पटेल, कृषि मंत्री आरसी फाल्दू और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और पुरुषोत्तम रूपाला के नाम की चर्चा चल रही है.

विधानसभा चुनावों के एक साल पहले रुपाणी ने शनिवार को इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने इस फ़ैसले की कोई बड़ी वजह नहीं बताई है.

एक बीजेपी नेता के हवाले से अख़बार लिखता है, "पटेल, फाल्दू, रूपाला और मांडविया के नामों पर चर्चा की जा रही है. चूंकि फ़ैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेना है, इसलिए ये कहना नामुमकिन है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री किसे बनाया जाएगा."

अगस्त, 2016 में जब आनंदीबेन पटेल ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया था तो ये चर्चा थी कि नितिन पटेल को उनका उत्तराधिकारी बनाया जा सकता है लेकिन आख़िरी मिनटों में विजय रुपाणी को मुख्यमंत्री पद के लिए चुन लिया गया.

विजय रुपाणी के इस्तीफ़े के बाद सोशल मीडिया पर नितिन पटेल को मुख्यमंत्री बनाने के लिए ट्रेंड कराया गया.

नितिन पटेल की तरह ही प्रभावशाली पाटीदार समुदाय से आने वाले मांडविया को भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ में आगे माना जा रहा है.

पाटीदार समाज के नेताओं ने हाल ही में मांग की थी कि अगला मुख्यमंत्री एक पाटीदार को बनाया जाना चाहिए.

विदेश मंत्री एस जयशंकर और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मैरिस पेन

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'अफ़ग़ानिस्तान को आंतकवादियों की पनाहगाह नहीं बनने देंगे'

भारत की चिंताओं को साझा करते हुए नई दिल्ली दौरे पर आए ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मैरिस पेन ने शनिवार को कहा कि "हम अफ़ग़ानिस्तान को फिर से आंतकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह नहीं बनने देंगे, इस बात को सुनिश्चित करने में दोनों देशों के मज़बूत साझा हित हैं."

इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के मन में चिंता व्याप्त है.

इस पर विदेश मंत्री एस जयंशकर ने कहा कि "अफ़ग़ानिस्तान को किसी भी क़ीमत पर आतंकवाद के लिए अपनी ज़मीन के इस्तेमाल की इजाज़त नहीं देनी चाहिए."

हालांकि उन्होंने तालिबान का नाम नहीं लिया लेकिन दोनों मंत्रियों ने मानवाधिकार को लेकर चिंता ज़ाहिर की.

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा कि इस बारे में दोनों देशों के बीच गहरी बातचीत हुई है.

उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 30 अगस्त को जिस प्रस्ताव संख्या 2593 को पारित किया था, हमारा रुख वैसा ही है.

बिशप मार जोसेफ़ कल्लारांगट

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'नारकोटिक्स जिहाद' वाले कमेंट पर चर्च ने दी सफ़ाई

कैथोलिक ईसाइयों की संस्था 'साइरो-मालाबार कैथोलिक चर्च' की पलाई इकाई के बिशप मार जोसेफ़ कल्लारांगट के 'नारकोटिक्स जिहाद' वाली विवादास्पद टिप्पणी की वजह से केरल की राजनीति में आया तूफ़ान थमता हुआ नहीं दिख रहा है.

दक्षिण भारत से निकलने वाले अख़बार डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी ने सीपीएम और कांग्रेस पर जिहादियों के समर्थन का आरोप लगाया है जबकि कांग्रेस ने संघ परिवार के एजेंडे के ख़िलाफ़ आगाह करते हुए कहा है कि इससे राज्य में ईसाइयों और मुसलमानों की एकता पर आंच आ सकती है.

बिशप मार जोसेफ़ कल्लारांगट के कमेंट पर 'साइरो-मालाबार कैथोलिक चर्च' ने सफ़ाई देते हुए कहा है कि बिशप का इरादा किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था और उनकी टिप्पणी किसी समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ नहीं थी.

'साइरो-मालाबार कैथोलिक चर्च' के सहायक बिशप मार जैकब मुरिकेन ने कहा, "उन्होंने समाज में जारी एक खतरनाक चलन को लेकर लोगों को केवल आगाह किया है."

उन्होंने सभी समुदायों से धर्म और धार्मिक प्रतीकों की आड़ में असामाजिक और कट्टरपंथी गतिविधियों में भाग लेने वाले तत्वों को गंभीरता से लेने की अपील की. साथ ही उन्होंने ये भी संदेश दिया कि गुमराह करने वाले सभी प्रोपेगैंडा को ख़त्म करने के लिए एक होकर आगे बढ़ेंगे.

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