असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा- एक इंच भी ज़मीन नहीं लेने देंगे

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मिज़ोरम के साथ सीमा विवाद को लेकर हुई हिंसा के बीच असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा है कि वो एक इंच ज़मीन किसी को लेने नहीं देंगे.
सोमवार को मिज़ोरम और असम की सीमा पर हुए संघर्ष में असम पुलिस के पाँच जवान और एक आम नागरिक की मौत हो गई थी.
असम सरकार ने मारे गए पाँच पुलिसकर्मियों और एक नागरिक के सम्मान में तीन दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सिलचर जाकर मारे गए पाँचों पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी.
बाद में पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि ये घटना असम की सीमा पर हुई है, इसलिए असम पुलिस इस मामले की जाँच करेगी. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि इसकी जाँच की जाएगी कि कैसे आम नागरिकों को हथियार मिले.
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मिज़ोरम के साथ सीमा विवाद पर उन्होंने कहा, "मैं ज़मीन की एक इंच भी किसी को नहीं दे सकता, अगर कल संसद एक क़ानून बना दे कि बराक वैली को मिज़ोरम को दिया जाए, तो मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन जब तक संसद यह फ़ैसला नहीं लेती, मैं किसी भी व्यक्ति को असम की ज़मीन नहीं लेने दूँगा. हम अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं. हमारी पुलिस सीमा पर तैनात है."
आरोप-प्रत्यारोप

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दरअसल सोमवार को असम और मिज़ोरम के मुख्यमंत्रियों के बीच ट्विटर पर हुए आरोप-प्रत्यारोप से ये अंदाज़ा हो गया था कि सीमा पर तनाव है. इस बीच फ़ायरिंग की ख़बर भी आई. शाम को असम के मुख्यमंत्री ने ट्वीट पर ये जानकारी दी कि असम पुलिस के जवान हिंसा में मारे गए हैं.
ये स्थिति भी तब हुई जबकि दो दिन पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने शिलांग में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी. मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने सोमवार को ट्विटर पर इसी मीटिंग का ज़िक्र किया.
उन्होंने लिखा, "प्रिय हिमंता जी, आदरणीय श्री (गृह मंत्री) अमित शाह की बुलाई मुख्यमंत्रियों की सौहार्दपूर्ण बैठक के बाद, हैरानी है कि असम पुलिस की दो कंपनियों और आम नागरिकों ने आज मिज़ोरम के अंदर वैरेनग्टे ऑटो रिक्शा स्टैंड पर नागरिकों पर लाठीचार्ज किया और आँसू गैस छोड़ी. यहाँ तक कि वो सीआरपीएफ़ के जवानों/मिज़ोरम पुलिस पर भी चढ़ दौड़े."
मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने ये ट्वीट असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को संबोधित करते हुए किया. वो सरमा की ओर से किए गए ट्वीट का जवाब दे रहे थे. मामले में गृह मंत्री अमित शाह को दखल देना पड़ा और उन्होंने दोनों राज्यों से शांति की अपील की.
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सरमा ने अपने ट्वीट में लिखा था, "आदरणीय ज़ोरमाथांगा जी कोलासिब (मिज़ोरम) के एसपी हमसे कह रहे हैं कि जब तक हम हमारी पोस्ट से नहीं हटेंगे तब तक उनके नागरिक ना तो सुनेंगे और ना ही हिंसा बंद करेंगे. इन हालात में हम सरकार कैसे चला सकते हैं? उम्मीद है कि आप जल्दी से जल्दी इसमें हस्तक्षेप करेंगे."
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने ट्वीट में गृह मंत्री अमित शाह और पीएमओ को भी टैग किया.
राजनीतिक मुद्दा नहीं, सीमा विवाद

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असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि ये कोई राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि दो राज्यों के बीच सीमा विवाद है और ये विवाद काफ़ी लंबे समय से चल रहा है. उन्होंने कहा कि ये विवाद उस समय भी था, जब दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकारें थी. ये दो राज्यों के बीच का विवाद है, जो राजनीतिक पार्टियों का नहीं.
उन्होंने कहा, "ये एक संरक्षित जंगल है. क्या किसी संरक्षित जंगल को बस्तियों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है? ये विवाद ज़मीन का नहीं जंगल का है. असम जंगल की रक्षा करना चाहता है. असम इस क्षेत्र में बस्तियाँ नहीं बसा रहा. हम इस क्षेत्र में बस्तियाँ नहीं चाहते."
असम के मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सीमा पर फ़ायरिंग हो रही थी, उस समय उन्होंने मिज़ोरम के मुख्यमंत्री को छह बार फ़ोन किया. मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ने उन्हें सॉरी कहा और बातचीत के लिए बुलाया.
उन्होंने ये भी जानकारी दी कि असम सरकार मारे गए पुलिसकर्मियों के परिवार को 50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता देगी. जबकि घायलों को एक लाख रुपये दिए जाएँगे. असम सरकार ने संघर्ष में घायल पुलिस अधीक्षक को इलाज के लिए मुंबई भेजा है.

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इस बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में कहा कि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक़ हरियाणा-हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र-कर्नाटक, असम-अरुणाचल प्रदेश, असम-नगालैंड, असम-मेघालय और असम-मिज़ोरम के बीच सीमा को लेकर विवाद है और हर राज्यों का अपना अलग-अलग दावा है.
उन्होंने ये भी स्वीकार किया कि कई मौक़े पर विवादित सीमावर्ती इलाक़ों से प्रदर्शनों और हिंसा की ख़बरें आती रहती हैं.
दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इलाक़े में शांति स्थापित करने का पूरा प्रयास करेगी.
उन्होंने बताया, "नॉर्थ ईस्ट एमपी फ़ोरम ने मिज़ोरम और असम के सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले लोगों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है."
क्या है पूरा विवाद

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मिज़ोरम का अपने दो पड़ोसी राज्यों असम और त्रिपुरा के साथ सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. पिछले साल भी यहाँ तनाव की स्थिति बनी थी.
तब केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया था. असम में सरमा के सीएम बनने के बाद स्थिति फिर बदली हैं और बीते कुछ दिनों से तनाव बढ़ गया है. दोनों राज्यों के बीच सीमा अब तक निर्धारित नहीं हो सकी है.
बीते साल अक्तूबर में दोनों राज्यों के बीच कोविड जाँच शिविर बनाने को लेकर तनाव हुआ था. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़ तब मिज़ोरम के अधिकारियों ने असम के लैलापुर में कोविड-19 की जाँच के लिए शिविर बनाया था.
असम सरकार को इसपर आपत्ति थी. तनाव बढ़ने के बाद मिज़ोरम ने आरोप लगाया था कि असम की पुलिस ने मुख्य राजमार्ग के 'तीन पॉइंट' पर नाकेबंदी कर दी और आवश्यक वस्तुएँ लेकर आने वाले वाहनों को रोक दिया.
इसके बाद मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से फ़ोन पर बात की. तब दोनों नेताओं ने बातचीत को सार्थक बताया था.
असम के साथ मिज़ोरम की सीमा लगभग 165 किलोमीटर की है. लेकिन इसको सही तरीक़े से चिन्हित नहीं किया गया है जिसको लेकर समय-समय पर बड़े विवाद पैदा हो जाते हैं. सरकारी सूत्र कहते हैं कि सीमा को चिन्हित करने का प्रयास वर्ष 1995 से ही चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है.
असम का लैलापुर ज़िला भी इनमें से एक है, जिसके बड़े इलाक़े पर मिज़ोरम दावा करता रहा है. स्थानीय लोगों के लिए ये परेशानी का ज़रिया बन गया है क्योंकि बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो सीमा निर्धारण नहीं होने की वजह से कई सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं.
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