असम-मिज़ोरम सीमा पर संघर्ष में असम पुलिस के पांच जवान मारे गए

पुलिस

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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया है कि असम और मिज़ोरम की सीमा पर असम पुलिस के पांच जवानों की मौत हो गई है. मुख्यमंत्री सरमा के मुताबिक़ जवानों की जान राज्य की सीमा की रक्षा करते हुए गई.

मुख्यमंत्री सरमा ने ट्वटिर पर लिखा, "मैं बेहद पीड़ा के साथ जानकारी दे रहा हूँ कि असम पुलिस के छह बहादुर जवानों ने असम- मिज़ोरम सीमा पर हमारे राज्य की संवैधानिक सीमा की रक्षा करते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी है. मारे गए लोगों के परिवार के साथ मेरी संवेदनाएँ हैं. "

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असम और मिज़ोरम की सीमा पर सोमवार को सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के बीच झड़प की ख़बरें आईं थीं. रिपोर्टों के मुताबिक वहाँ फायरिंग भी हुई थी.

इसे लेकर असम के मुख्यमंत्री सरमा और मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने ट्विटर पर एक-दूसरे पर आरोप भी लगाए थे. हालांकि, बाद में दोनों मुख्यमंत्रियों ने बताया था कि उनके बीच बातचीत हुई है.

जवानों की मौत और हिंसा की ख़बरों के बीच समाचार एजेंसी पीटीआई ने बताया कि गृह मंत्री अमित शाह ने दोनों मुख्यमंत्रियों से कहा है कि वो शांति क़ायम करना सुनिश्चित करें. सरमा और ज़ोरामथांगा ने अमित शाह से दखल की मांग की थी.

हिमंत बिस्व सरमा और ज़ोरमाथांगा

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ये स्थिति भी तब हुई जबकि दो दिन पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने शिलांग में पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की थी. मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने सोमवार को ट्विटर पर इसी मीटिंग का ज़िक्र किया.

उन्होंने लिखा, "प्रिय हिमंता जी, आदरणीय श्री (गृह मंत्री) अमित शाह की बुलाई मुख्यमंत्रियों की सौहार्दपूर्ण बैठक के बाद, हैरानी है कि असम पुलिस की दो कंपनियों और आम नागरिकों ने आज मिज़ोरम के अंदर वैरेनग्टे ऑटो रिक्शा स्टैंड पर नागरिकों पर लाठीचार्ज किया और आँसू गैस छोड़ी. यहाँ तक कि वो सीआरपीएफ़ के जवानों/मिज़ोरम पुलिस पर भी चढ़ दौड़े."

मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने ये ट्वीट असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा को संबोधित करते हुए किया. वो सरमा की ओर से किए गए ट्वीट का जवाब दे रहे थे.

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सरमा ने अपने ट्वीट में लिखा था, "आदरणीय ज़ोरमाथांगा जी कोलासिब (मिज़ोरम) के एसपी हमसे कह रहे हैं कि जब तक हम हमारी पोस्ट से नहीं हटेंगे तब तक उनके नागरिक ना तो सुनेंगे और ना ही हिंसा बंद करेंगे. इन हालात में हम सरकार कैसे चला सकते हैं? उम्मीद है कि आप जल्दी से जल्दी इसमें हस्तक्षेप करेंगे."

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने अपने ट्वीट में गृह मंत्री अमित शाह और पीएमओ को भी टैग किया.

गृह मंत्री अमित शाह की बुलाई बैठक में शामिल मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा

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असम और मिज़ोरम के बीच सीमा को लेकर पुराना विवाद है.

इसे सुलझाने की कोशिशें भी हुई हैं. केंद्र सरकार ने इस मामले में हस्तक्षेप भी किया है.

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हालाँकि सोमवार को विवाद के तूल पकड़ने पर दोनों मुख्यमंत्रियों ने एक और ट्वीट किया. हिमंत बिस्व सरमा ने जानकारी दी कि उन्होंने मिज़ोरम के मुख्यमंत्री से बात की है और बताया है कि असम 'यथास्थिति बनाए रखेगा.' मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने इसके जवाब में कहा कि जैसी 'चर्चा हुई है उसके मुताबिक असम पुलिस को हटने के निर्देश दिए जाएं.'

कैसे शुरू हुआ विवाद

दोनों मुख्यमंत्रियों के ट्वीट्स सामने आने के क़रीब दो घंटे पहले मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट किया था. ये ट्वीट गृहमंत्री अमित शाह को संबोधित था. इसमें जो वीडियो पोस्ट किया गया, उसमें लाठी लिए सुरक्षाबलों और लाठी थामे आम लोगों के बीच झड़प होती दिख रही है. उन्होंने ट्वीट में पीएमओ और असम के मुख्यमंत्री को भी टैग किया था.

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उन्होंने एक और वीडियो ट्विटर पर पोस्ट किया था. इसमें एक क्षतिग्रस्त कार में एक महिला समेत दो लोग सवार दिख रहे थे. मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा के मुताबिक इन पर "गुंडों" ने हमला किया.

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मुख्यमंत्री ज़ोरमाथांगा की इन दो वीडियो पोस्ट के बाद ही असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने उनके प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए. रिपोर्टों के मुताबिक़ इलाक़े में फायरिंग होने की ख़बरें आई हैं.

असम मिज़ोरम सीमा

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क्या है विवाद?

मिज़ोरम का अपने दो पड़ोसी राज्यों असम और त्रिपुरा के साथ सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. पिछले साल भी यहाँ तनाव की स्थिति बनी थी.

तब केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप किया था. असम में सरमा के सीएम बनने के बाद स्थिति फिर बदली हैं और बीते कुछ दिनों से तनाव बढ़ गया है. दोनों राज्यों के बीच सीमा अब तक निर्धारित नहीं हो सकी है.

बीते साल अक्तूबर में दोनों राज्यों के बीच कोविड जाँच शिविर बनाने को लेकर तनाव हुआ था. आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़ तब मिज़ोरम के अधिकारियों ने असम के लैलापुर में कोविड-19 की जाँच के लिए शिविर बनाया था.

असम सरकार को इसपर आपत्ति थी. तनाव बढ़ने के बाद मिज़ोरम ने आरोप लगाया था कि असम की पुलिस ने मुख्य राजमार्ग के 'तीन पॉइंट' पर नाकेबंदी कर दी और आवश्यक वस्तुएँ लेकर आने वाले वाहनों को रोक दिया.

इसके बाद मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरामथांगा ने असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल से फ़ोन पर बात की. तब दोनों नेताओं ने बातचीत को सार्थक बताया था.

असम के साथ मिज़ोरम की सीमा लगभग 165 किलोमीटर की है. लेकिन इसको सही तरीक़े से चिन्हित नहीं किया गया है जिसको लेकर समय-समय पर बड़े विवाद पैदा हो जाते हैं. सरकारी सूत्र कहते हैं कि सीमा को चिन्हित करने का प्रयास वर्ष 1995 से ही चल रहा है, जो अब तक पूरा नहीं हो सका है.

असम का लैलापुर ज़िला भी इनमें से एक है, जिसके बड़े इलाक़े पर मिज़ोरम दावा करता रहा है. स्थानीय लोगों के लिए ये परेशानी का ज़रिया बन गया है क्योंकि बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो सीमा निर्धारण नहीं होने की वजह से कई सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं.

असम सरकार के एक अधिकारी ने बीते साल हुए तनाव के बाद बीबीसी संवाददाता सलमान रावी को नाम नहीं लिखने की शर्त पर कहा था, "भारत में भी कई लद्दाख हैं, जहाँ सीमाओं का विवाद सदियों से चला रहा है. और, पता नहीं कब तक चलता रहेगा."

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