मोदी-योगी और बीजेपी क्या विपक्षी घेरेबंदी की काट खोज रहे हैं?

नरेंद्र मोदी

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शनिवार, 26 जून, 2021

  • संयुक्त मोर्चा की अपील पर देश के कई बड़े राज्यों में किसान सड़कों पर उतरे.
  • कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई और सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते को लेकर केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया.

भारतीय जनता पार्टी में भी दिल्ली से लखनऊ तक सक्रियता नज़र आई. विपक्ष और किसानों के सवालों के जवाब देने ज़्यादा फ़ोकस 'नया एजेंडा' सेट करने पर दिखा.

शनिवार सुबह उत्तर प्रदेश के अयोध्या को केंद्र में लाने की कोशिश नज़र आई. यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक साथ दिखे.

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प्रधानमंत्री की बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'अयोध्या के विकास की योजना' की समीक्षा की. वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई समीक्षा बैठक में योगी आदित्यनाथ सरकार के अहम चेहरे शामिल हुए.

प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को ही कोविड टीकाकरण की समीक्षा भी की.

दिल्ली में चर्चा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अगुवाई में हुई मीटिंग की रही. इस मीटिंग में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह समेत केंद्र सरकार के कई सीनियर मंत्रियों ने हिस्सा लिया. इस मीटिंग के पहले नड्डा ने पार्टी के सचिवों के साथ बैठक की.

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मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इन बैठकों का फ़ोकस अगले साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश समेत दूसरे राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव थे.

ये चुनाव भारतीय जनता पार्टी के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. ख़ासकर उत्तर प्रदेश का चुनावी रण पार्टी की साख के लिए बहुत मायने रखता है.

ममता बनर्जी

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मोदी को चुनौती?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भारतीय जनता पार्टी के लिए बीते कुछ महीने चुनौती भरे रहे हैं.

किसान आंदोलन, टीकाकरण की नीति और कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान महामारी से मुक़ाबले की रणनीति सवालों के घेरे में रही है.

इसके साथ पार्टी को चुनावी मोर्चे पर भी झटका लगा है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जीत हासिल करने के लिए ख़ासा ज़ोर लगाया लेकिन ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पहले से ज़्यादा सीटों के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही.

राम मंदिर का मॉडल

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योगी का दिल्ली दौरा

पश्चिम बंगाल चुनाव में हार के बाद कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर पीक पर पहुंच गई और उत्तर प्रदेश समेत बीजेपी शासित कई राज्यों में सरकार की तैयारियों पर सवालिया निशान लगने लगे.

उसी दौरान उत्तर प्रदेश सरकार में दिक्कतों की ख़बरें आने लगीं. योगी आदित्यनाथ सरकार में शामिल कई मंत्री नेतृत्व पर सवालिया निशान लगाने लगे.

संघ के कथित दखल और योगी आदित्यनाथ के दिल्ली आकर प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से 'मार्गदर्शन' लेने के बाद स्थिति थोड़ी काबू में आती दिखी, तभी अयोध्या में ज़मीन ख़रीद को लेकर आरोप सामने आने लगे.

आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी ने ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लगाए. इन आरोपों को ट्रस्ट के सचिव चंपत राय ने राजनीति से प्रेरित बताते हुए ख़ारिज किया. उनके समर्थन में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों और बीजेपी नेताओं ने भी बयान दिए लेकिन विपक्ष इसे मुद्दा बनाकर ट्रस्ट और बीजेपी पर हमला बोलता रहा.

शरद पवार

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विपक्ष-किसानों की मोर्चेबंदी

इस तमाम घटनाक्रम के बीच एनसीपी नेता शरद पवार के घर बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोधी कई नेताओं का जमावड़ा हुआ. मीटिंग में शामिल कई नेताओं ने इसे देश में 'वैकल्पिक सोच तैयार करने की कोशिश' बताया तो कुछ ने खुलकर 'धर्मनिरपेक्ष ताक़तों को एकजुट करने की कोशिश' बताया.

इस बीच किसानों ने भी अपने आंदोलन को नई धार देने की कोशिश शुरू कर दी. किसानों और केंद्र सरकार के बीच 22 जनवरी से कोई बातचीत नहीं हुई है. बातचीत शुरू करने के मुद्दे पर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वो किसानों से 'आधी रात को भी बात करने को तैयार हैं लेकिन तीन क़ानूनों को रद्द करने पर चर्चा नहीं होगी.'

पवार के घर हुई बैठक में राष्ट्रीय लोकदल और समाजवादी पार्टी के नेता मौजूद थे. राष्ट्रीय लोकदल के नेता किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं और इसे लेकर केंद्र सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं. समाजवादी पार्टी ने राष्ट्रीय लोकदल के साथ गठजोड़ किया हुआ है और वो भी अयोध्या और किसानों समेत दूसरे मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटी है.

अयोध्या पर मीटिंग

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बीजेपी की जवाबी रणनीति

शनिवार को एक के बाद एक मीटिंग के दौर को लेकर जानकारों की राय है कि बीजेपी को अंदाज़ा है कि विपक्ष की एकजुटता, अयोध्या और टीकाकरण ऐसे मुद्दे हैं, जिन्हें आगे के लिए टालकर समाधान नहीं निकाला जा सकता है.

अयोध्या में बीते साल मंदिर निर्माण के शिलान्यास के वक़्त प्रधानमंत्री मोदी ख़ुद मौजूद थे.

पार्टी के कई नेता इस मुद्दे की अहमियत से भी वाकिफ हैं और वो इस मुद्दे पर विपक्ष को हथियार मुहैया नहीं कराना चाहते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या पर समीक्षा बैठक के बाद अपने ट्विटर हैंडल पर इससे जुड़ी जानकारी साझा की.

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इसमें बताया गया, "अयोध्या का विकास आध्यात्मिक केंद्र, वैश्विक पर्यटन केंद्र और स्मार्ट सिटी के तौर पर होगा."

प्रधानमंत्री ने कहा, "हमारी संस्कृति और विकास के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण के रूप में सामने आना चाहिए."

प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना टीकाकरण की भी समीक्षा की. केंद्र सरकार ने दिसंबर तक सभी को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य तय किया है.

विपक्ष इस लक्ष्य के पूरे होने को लेकर संशय जाहिर करता रहा है. लेकिन सरकार और बीजेपी का दावा है कि ये लक्ष्य समय पर पूरा होगा.

प्रधानमंत्री कार्यकाल ने जानकारी दी है, "बीते छह दिनों में वैक्सीन की तीन करोड़ 77 लाख डोज़ दी गई हैं. ये मलेशिया, सऊदी अरब और कनाडा की कुल आबादी से ज़्यादा है."

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उधर, जेपी नड्डा की अगुवाई में हुई बैठक के बाद आई रिपोर्टों में दावा किया गया कि बैठक का फोकस आने वाले चुनावों पर था. इस मीटिंग में पार्टी और सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर ज़ोर दिया गया.

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