योगी आदित्यनाथ या बीजेपी, यूपी में किसकी मुश्किल बढ़ा सकते हैं संजय निषाद?

उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सहयोगी निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने मांग की है कि उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में ‘उप मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जाए.’

लाइव कवरेज

  1. योगी आदित्यनाथ या बीजेपी, किसकी मुश्किल बढ़ा सकते हैं संजय निषाद?

    योगी आदित्यनाथ

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    भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश के अगले विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर किसे पेश करेगी, पार्टी के कई नेता बार-बार ये सवाल उठा रहे हैं.

    उत्तर प्रदेश सरकार में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य जैसे नेताओं के आधिकारिक बयानों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की स्वाभाविक दावेदारी पर सवालिया निशान लगाया.

    उसके पहले मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक चर्चाओं में योगी आदित्यनाथ से पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की नाराज़गी का मुद्दा भी लगातार छाया रहा.

    अभी ये सवाल पूरी तरह सुलझा भी नहीं है कि भावी उप मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर भी दावेदारी शुरू हो गई है.

    उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सहयोगी निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने मांग की है कि उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में ‘उप मुख्यमंत्री के तौर पर पेश किया जाए.’

    संजय निषाद ने दावा किया है कि भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें ‘एक कैबिनेट पोस्ट और राज्यसभा सीट देने का वादा किया था.’

    निषाद ने चेतावनी दी है कि अगर ‘वो हमें ठेस पहुंचाएंगे तो वो भी खुश नहीं रहेंगे.’

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    संजय निषाद और केशव प्रसाद मौर्य

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    हालिया दिनों में ये पहला मौका नहीं है जब संजय निषाद चर्चा में रहे हों. जब से भारतीय जनता पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई में दिक्कतों की चर्चा शुरू हुई है तब से निषाद किसी न किसी वजह से ख़बरों में रहे हैं. ख़ासकर बीजेपी के प्रमुख नेताओं से मुलाक़ात को लेकर. एक संयोग ये भी है कि हाल में निषाद की उन्हीं मुलाक़ातों की ज़्यादा चर्चा हुई है जहां वो बीजेपी ऐसे नेताओं से मिले जो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रतिद्वंद्वी के तौर पर देखे जा रहे हैं.

    निषाद ने बुधवार को उप मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी जाहिर की. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने बुधवार को ही निषाद के साथ मुलाकात की तस्वीर ट्विटर पर पोस्ट की. मौर्य ने इसे ‘शिष्टाचार मुलाक़ात’ बताया . निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात की.

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    इसके पहले 10 जून को जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मिलने के लिए दिल्ली में थे, उसी दिन हाल में बीजेपी में शामिल हुए पूर्व नौकरशाह एके शर्मा ने निषाद और उनके सांसद बेटे प्रवीण निषाद से मुलाक़ात की तस्वीरें जारी की थीं. एके शर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करीबी माना जाता है और उन्हें हाल में भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है.

    संजय निषाद राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार योगी आदित्यनाथ की मुश्किल बढ़ाकर ही चर्चा में आए थे. योगी आदित्यनाथ जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने गोरखपुर की अपनी लोकसभा सीट से इस्तीफ़ा दे दिया. इस पर हुए उप चुनाव में संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने समाजवादी पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़ा और योगी आदित्यनाथ की परंपरागत सीट हासिल करने में कामयाब रहे.

    इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए बड़ा झटका माना गया. बाद में निषाद बीजेपी के पाले में आ गए और उनके बेटे प्रवीण निषाद 2019 लोकसभा चुनाव में संत कबीर नगर से बीजेपी की टिकट पर सांसद चुने गए.

    एक बार फिर निषाद ऐसे समय में चर्चा में हैं, जब पार्टी के अंदर और बाहर योगी आदित्यनाथ को लेकर अटकलों का बाज़ार गर्म है. विरोधी दल भी इसे लेकर सवाल उठा रहे हैं.

    समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल वर्मा कहते हैं कि बीजेपी के अंदर सब ठीक नहीं है.

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    उन्होंने कहा, “उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के अंदर सब ठीक नहीं है. भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाएगी.”

    उत्तर प्रदेश में सवालों की सबसे ज़्यादा बौछार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर ही हो रही है. बीते कई हफ़्तों से वो हालात संभालने में जुटे हैं. जून के दूसरे हफ़्ते में वो दिल्ली गए और बताया कि उन्होंने ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का मार्गदर्शन लिया.’

    योगी आदित्यनाथ चार साल में पहली बार मंगलवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के घर पहुंचे. इसे सुलह की कोशिश के तौर पर देखा गया. लेकिन अब उत्तर प्रदेश में एक और सवाल सामने है. लेकिन क्या ये सवाल योगी आदित्यनाथ के लिए है या फिर इस बार जवाब बीजेपी के दूसरे नेताओं को तलाशना है.

  2. कोरोना की तीसरी लहर को रोकना है तो करने होंगे तीन काम- डॉ रणदीप गुलेरिया

    देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना महामारी की तीसरी आएगी या नहीं ये पूरी तरह से हमारे व्यवहार पर निर्भर करता है.

    उन्होंने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर न आए इसके लिए हमें तीन अहम काम करने होंगे.

    उन्होंने कहा कि सबसे पहले महामारी को रोकने के लिए कोविड के मद्देनज़र उचित व्यवहार का पालन करना होगा, यानी मास्क, सैनिटाइज़र और दो गज़ की दूरी के नियमों का पालन करना होगा और भीड़ भाड़ वाली जगहों से बचना होगा.

    इसके अलावा कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बेहतर सर्विलांस व्यवस्था चाहिए होगी और इसके साथ हमें अधिक से अधिक लोगों को जल्द से जल्द वैक्सीन देनी होगी.

    उन्होंने कहा कि ऐसा कर के हम तीसरी लहर के आने को या तो टाल सकते हैं या फिर उस थोड़ा पीछे धकेल सकते हैं. ये भी हो सकता है कि ऐसा करने पर तीसरी लहर के आने पर हमें अधिक परेशानी न हो.

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  3. रूस के लड़ाकू विमानों और जहाज़ ने ब्रिटिश जहाज़ पर लगाया निशाना

    ब्रिटिश जहाज़ एचएमएस डिफ़ेंडर

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    रूस के 20 लड़ाकू विमानों और दो कोस्टगार्ड जहाज़ों ने क्राइमिया के नज़दीक ब्रिटेन के एक लड़ाकू जहाज़ का पीछा करने लगे.

    रूसी रक्षा मंत्री ने कहा है कि ब्रिटिश जहाज़ एचएमएस डिफ़ेंडर क्राइमिया के निकट रूसी जल सीमा में चला आया था जिसके बाद एक गश्ती जहाज़ ने उसपर गोलियाँ चलाईं और एक युद्धक विमान ने उसके रास्ते में बम गिराए.

    ब्रिटेन ने रूस से आ रही इन रिपोर्टों का खंडन किया है कि उसकी सेना ने ब्लैक सी में ब्रिटेन के एक जंगी जहाज़ पर चेतावनी में गोलियाँ दाग़ीं.

    मगर ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि ना तो कोई बम गिराया गया ना ही गोलियाँ चलीं. उसने बताया कि जहाज़ यूक्रेन के जल क्षेत्र में था.

    ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने कहा, "एचएमएस डिफ़ेंडर यूक्रेन और जॉर्जिया के बीच सीधे और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रास्ते से जा रहा था."

    प्रवक्ता ने कहा कि रूस ने ब्रिटेन को पहले चेतावनी दी थी कि वो ब्लैक सी में उस रास्ते के पास अभ्यास कर रहे हैं जहाँ से ब्रिटिश जहाज़ जा रहा था.

    रूसी मीडिया में जारी रूसी रक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार ये घटना क्राइमिया के दक्षिण में केप फ़ायोलेन्ट में हुई और ब्रिटिश जहाज़ बार-बार अपने मार्ग से अलग हो रहा था.

    रूस ने 2014 में क्राइमिया का विलय कर लिया जो यूक्रेन का हिस्सा था मगर इसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है.

    रूस के विदेश मंत्रालय ने इस सिलसिले में ब्रिटेन के राजदूत को तलब किया है.

  4. बीबीसी हिन्दी का डिजिटल बुलेटिन ‘दिनभर’, 23 जून 2021, सुनिए संदीप सोनी के साथ..

  5. योग गुरू रामदेव आईएमए से विवाद मामले में पहुँचे सुप्रीम कोर्ट

    रामदेव

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    योग गुरू रामदेव ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है.

    रामदेव के एलोपैथी को लेकर एक कथित बयान के बाद उनके और आईएमए के बीच विवाद शुरू हो गया था. इस मामले में आईएमए की पटना और रायपुर शाखाओं ने रामदेव के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज कराई हैं.

    रामदेव ने सुप्रीम कोर्ट से गुजारिश की है कि उनके ख़िलाफ़ दर्ज सभी मुकदमों में कार्रवाई पर रोक लगाई जाए. उन्होंने सभी केस दिल्ली ट्रांसफर करने की अपील भी की है.

    कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान योग गुरू रामदेव का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो एलोपैथी को लेकर सवाल उठाते दिख रहे थे.

    स्वामी रामदेव ने कथित तौर पर कहा था, "एलोपैथिक दवाएँ खाने से लाखों लोगों की मौत हुई है."

    उन्होंने एलोपैथी को 'स्टुपिड और दिवालिया साइंस' भी कहा था.

    आईएमए ने उनके बयान पर आपत्ति जाहिर की और उन्हें क़ानूनी नोटिस भेजा.

    बीते 16 जून को छत्तीसगढ़ पुलिस ने उनके ख़िलाफ़ रायपुर में केस दर्ज किया. आईएमए ने रामदेव पर ग़लत जानकारी का प्रचार करने का आरोप लगाया है.

    इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने रामदेव को एक पत्र लिखा था जिसके बाद उन्होंने अपना बयान वापस ले लिया लेकिन इस पर शुरू हुआ विवाद ख़त्म नहीं हुआ.

  6. राम मंदिर ट्रस्ट पर सपा का हमला, राम गोपाल बोले-जब राम भक्त ही गुल्लक चुराकर ले जाएं...

    राम मंदिर का मॉडल

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    समाजवादी पार्टी ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर लगे रहे आरोपों की जांच कराने की मांग की है.

    पार्टी के सांसद और सीनियर नेता राम गोपाल यादव ने इन आरोपों को लेकर तीखा हमला बोला है और कहा है, “जब राम भक्त ही राम की गुल्लक चुराकर ले जाएं तो क्या किया जाए.”

    समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट पर अयोध्या में ज़मीन ख़रीद पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया है. ट्रस्ट के सचिव चंपत राय इन आरोपों को ‘राजनीति से प्रेरित’ बताते हुए ख़ारिज कर चुके हैं. चंपत राय ने कहा था कि ट्रस्ट ने बाज़ार भाव से सस्ते दर पर ज़मीन ख़रीदी है.

    हालांकि, विपक्षी पार्टियां चंपत राय की सफ़ाई आने के बाद भी इस मामले में कई सवाल खड़े कर रही हैं.

    समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने आरोप लगाया, “दस्तावेजी सबूत होने के बाद भी वो मामले को सामने लाने वाले पत्रकारों और दूसरे लोगों को धमकी दे रहे हैं. बेशर्मी की भी कोई हद होती है.”

    उन्होंने आगे कहा, “या तो उन्हें इन सबूतों को फ़र्जी बताना चाहिए या फिर इन्हें मंजूर करना चाहिए और जांच करानी चाहिए.”

    भारतीय जनता पार्टी के कई नेता इस मामले में ट्रस्ट का समर्थन करते हुए सवालों उठाने वालों को कठघरे में खड़ा चुके हैं. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और पार्टी नेता अमित मालवीय ने मामले में विपक्षी दलों पर पलटवार किया था.

    अयोध्या में ज़मीन ख़रीद का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट सचिव चंपत राय के रिश्तेदारों पर भी एक दूसरे मामले में आरोप लगे. इस मामले में चंपत राय के रिश्तेदारों ने उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पत्रकार विनीत नारायण समेत तीन लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया है.

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  7. कोविड-19 के इलाज में आइवरमैक्टिन के इस्तेमाल पर शोध करेगा यूके

    आइवरमैक्टिन

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    रेचेल श्राएर

    स्वास्थ्य संवाददताता, बीबीसी

    ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक ये जानने के लिए शोध कर रहे हैं कि जिन लोगों में कोविड के लक्षण हैं उन्हें आइवरमैक्टिन देने से क्या उन्हें अस्पताल में भर्ती होने से रोकने में मदद मिल सकती है.

    इस स्टडी में अस्पतालों में कोविड-19 का इलाज करा रहे मरीज़ों और आइवरमैक्टिन ले रहे मरीज़ों की तुलना की जाएगी और इस दवा के असर को देखा जाएगा.

    इस दवा के इस्तेमाल को लातिन अमेरिकी देशों और दक्षिण अफ्रीका में बढ़ावा दिया जा रहा है. हालांकि अब तक इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि कोविड के मरीज़ों में ये दवा कारगर साबित हो सकती है, इस कारण इस दवा के इस्तेमाल को लेकर विवाद है.

    इससे पहले आइवरमैक्टिन पर हुए शोध या तो छोटे पैमाने पर हुए हैं या फिर उनकी गुणवत्ता कम रही है.

    आइवरमैक्टिन का इस्तेमाल परजीवियों या मक्खियों के कारण होने वाले रिवर ब्लाइंडनेस जैसे संक्रमण में किया जाता है. लेबोरेटरी में पेट्री डिश में वायरस को मारने के लिए भी कम मात्रा में इसका इस्तेमाल होता है. लेकिन इंसानों में दवा के रूप में अधिक मात्रा में आइवरमैक्टिन दिया जाता है.

    वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने आइवरमैक्टिन को शोध के लिए चुना क्योंकि ये कई देशों में 'आसानी से उपलब्ध है' और से अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है (हालांकि अधिक मात्रा में इसका इस्तेमाल जानलेवा हो सकता है.)

    आइवरमैक्टिन

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    एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और क्रिटिकल केयर डॉक्टर ऑरोरा बलूजा कहती कई देशों में ऐसे इलाकों में जहां परजीवियों का ख़तरा रहा है, वहां लोगों को अक्सर आइवरमैक्टिन दी जाती है. ऐसे लोग जो एक ही वक्त में कोरोना वायरस के साथ-साथ किसी परजीवी के कारण संक्रमण झेल रहे हैं, उनकी स्थिति काफी बिगड़ हो सकती है, ऐसे में इस दवा के फायदे को समझा जा सकता है.

    स्टडी के मुख्य शोधकर्ताओं में से एक प्रोफ़ेसर रिचर्ड हॉब्स का कहना है कि आइवरमैक्टिन के इस्तेमाल को लेकर पहले कुछ ऑब्ज़रवेशनल स्टडी हुई हैं जिनके नतीजे 'सकारात्मक' मिले हैं लेकिन उनके आधार पर कोविड मरीज़ों को ये दवा देना 'जल्दबाज़ी' होगा.

    ऑब्ज़रवेशनल स्टडी में केवल उन लोगों पर शोध किया जाता है जो पहले से ही दवा ले रहे हैं, न कि आबादी के अनुपात के हिसाब से किसी बड़े समूह में इसके इस्तेमाल को देखा जाता है.

    ऐसे में इस तरह की स्टडी में अलग-अलग तरह के लोगों को स्टडी नहीं किया जा सकता, साथ ही वायरस के फैलने में प्रभावित करने वाले कारकों के बारे में पता नहीं चल पाता.

    आइवरमैक्टिन के इस्तेमाल को लेकर कोई सबूत न होने के बावजूद ब्राज़ील, बोलिविया, पेरू, दक्षिण अफ्रीका और अमेरिका में कई डॉक्टर और आम लोग इस दवा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

    यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स के डॉक्टर स्टीफ़न ग्रिफ़िन का कहना है, "हाइड्रॉक्सिक्लोरोक्वीन की तरह इस दवा का भी इस्तेमाल बिना पूरी जानकारी के किया जा रहा है."

    वो कहते हैं कि लेबोरेटरी में वायरस पर इस दवा के इस्तेमाल को देखा गया है लेकिन लोगों पर इसके इस्तेमाल को नहीं देखा गया है. बिना जानकारी के दवा के इस्तेमाल से धीरे-धीरे लोग इसे आम दवा मानने लगते हैं और इलाज के लिए इसका इस्तेमाल करने लगते हैं, जो ग़लत है.

    उन्होंने कहा कि इस पर स्टडी के बाद हमें ये "उत्तर मिल जाएगा" कि आइवरमैक्टिन को कोरोना वायरस के संक्रमण के मामलों में इस्तेमाल किया जा सकता है या नहीं.

  8. पश्चिम बंगाल के विधानसभा स्पीकर ने ओम बिड़ला से की गवर्नर धनखड़ की शिकायत

    जगदीप धनखड़

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    पश्चिम बंगाल के विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी ने लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला से गवर्नर की शिकायत की है.

    उन्होंने ओम बिड़ला से कहा है कि संसदीय लोकतंत्र और सदन की कार्यवाही से जुड़े मामलों में राज्य के गवर्नर जगदीप धनखड़ 'ज़रूरत से ज़्यादा हस्तक्षेप' कर रहे हैं.

    मंगलवार को देश के सभी राज्यों के विधानसभा स्पीकर्स की एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस हुई थी जिसमें बनर्जी ने ये शिकायत की.

    उन्होंने समाचार एजेंसी पीटीआई कहा, "मैंने संसदीय लोकतंत्र और सदन की कार्यवाही से जुड़े मामलों में गवर्नर की ज़रूरत से ज़्यादा दखलअंदाज़ी के बारे में लोकसभा स्पीकर को बताया."

    उन्होंने कहा, "सदन में कई बिल पर पारित हो चुके पर गवर्नर उन पर हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल के संसदीय लोकतंत्र इतिहास में ये अभूतपूर्व है. इस तरह की कोई घटना पहले कभी नहीं हुई."

    पश्चिम बंगाल में गवर्नर और तृणमूल कांग्रेस के बीच रस्साकशी की ख़बरें पहले भी कई बार सुर्खियों में रही हैं.

    इस पूरे मामले में अब तक गवर्नर की तरफ से कोई बयान नहीं आया है.

    दिलीप घोष

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    तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक तापस रॉय ने कहा है, "हम लंबे समय से यह कह रहे हैं कि मौजूदा गवर्नर एक ख़ास राजनीतिक दल के मुखपत्र की तरह काम कर रहे हैं. वो न केवल राज्य के कामकाज में हस्तक्षेप कर रहे हैं बल्कि राज्य सरकार को भी बदनाम कर रहे हैं."

    इधर पश्चिम बंगाल की बीजेपी यूनिट गवर्नर के समर्थन में उतर आई है और उसके दावा किया है कि वो सच्चाई को सभी के सामने ला रहे हैं.

    बंगाल बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है, "तृणमूल कांग्रेस गवर्नर से नाराज़ है क्योंकि उन्होंने ये सच्चाई उन्होंने सबके सामने ला दी है कि राज्य में क़ानून का शासन नहीं है. उनके ख़िलाफ़ पहले भी शिकायतें की गई हैं, लेकिन सभी शिकायतें निराधार हैं."

  9. हाफ़िज़ सईद का घर था निशाना: पाकिस्तान पुलिस

    हाफ़िज़ सईद

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    पाकिस्तान में पंजाब प्रांत की पुलिस के मुताबिक लाहौर में हुए धमाके का निशाना जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद का घर था.

    लाहौर के जौहर टाउन इलाके में बुधवार को हुए इस धमाके में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है जबकि 14 लोग घायल हुए हैं.

    पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की पुलिस के आईजी इनाम ग़नी ने बताया कि हाफ़िज़ सईद के घर के पास सुरक्षा होने की वजह से हमलावर घर तक नहीं पहुंच सके.

    पाकिस्तान में मौजूद बीबीसी संवाददाता शुमाइला जाफ़री के मुताबिक आईजी ग़नी ने मीडिया को जानकारी दी, “धमाका हाफ़िज़ सईद के घर के पास हुआ. घर के पास पुलिस होने के वजह से हमलावर वहां तक नहीं पहुंच सके.”

    आईजी ग़नी ने कहा कि ऐसा लगता है कि हमलावरों का निशाना हाफ़िज़ सईद के घर के पास बनी पोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मी थे.

    इसके पहले लाहौर के कमिश्नर कैप्टन (रिटायर्ड) उस्मान यूनिस ने दो लोगों की मौत और 14 लोगों के ज़ख़्मी होने की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि घायलों में एक पुलिसकर्मी समेत चार लोगों की स्थिति गंभीर है. उन्होंने बताया कि मौके पर विस्फोटक कैसे पहुंचे, इसकी जांच की जा रही है.

  10. लाहौर में हाफ़िज़ सईद के घर के पास धमाका, दो की मौत और 14 ज़ख़्मी

    पाकिस्तान

    पाकिस्तान में लाहौर के जौहर टाउन में हुए एक धमाके में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है और 14 लोग ज़ख़्मी हुए हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक घायलों में से चार की स्थिति गंभीर है.

    लाहौर के कमिश्नर कैप्टन (रिटायर्ड) उस्मान यूनिस ने दो लोगों की मौत और 14 लोगों के ज़ख़्मी होने की पुष्टि की है.

    कमिश्नर उस्मान यूनिस का कहना है कि जिस गली में धमाका हुआ, वहां एक गड्ढा हो गया है. मौके पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुईं एक कार और मोटरबाइक भी है.

    उन्होंने कहा कि धमाके की जगह को देखकर नहीं लगता कि ये आत्मघाती हमला होगा.

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये अब तक साफ़ नहीं है कि घटनास्थल पर विस्फोटक कार से लाए गए थे या मोटरबाइक पर.

    इससे पहले समा टीवी से बात करते हुए लाहौर के उपायुक्त मुदासिर रियाज़ ने कहा था कि धमाके में बच्चे और महिलाएं घायल हुई हैं.

    पाकिस्तान से बीबीसी संवादाता शुमाइला जाफ़री ने बताया पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अधिकारियों ने बताया कि ये धमाका लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और जमात उद दावा के प्रमुख हाफ़िज़ सईद के एक आवास के पास हुआ है.

    बीबीसी को एक अधिकारी ने बताया कि ये धमाका जिस जगह हुआ, वहाँ के एक घर का इस्तेमाल हाफ़िज़ सईद भी करते रहे हैं. इसी घर को जाने वाले चार रास्तों में से एक में विस्फोट हुआ है. इस घर पर पुलिस हमेशा मौजूद रहती है.

    हाफ़िज़ सईद के सारे घर और ठिकाने सरकार की कस्टडी में है और उन पर दिन-रात पुलिस का पहरा रहता है.

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    राहत बचाव टीम 1122 के प्रवक्ता ने पाकिस्तानी मीडिया से बताया कि अभी ये साफ़ नहीं हो पाया है कि गैस पाइपलाइन फटी या फिर सिलिंडर.

    उन्होंने कहा कि अभी तक धमाके की वजह स्पष्ट नहीं है. लाहौर के उपायुक्त मुदासिर रियाज़ मलिक ने इस धमाके में मदद के लिए सभी राहत बचाव कार्य को मौक़े पर पहुँचने का निर्देश दिया है. उन्होंने अस्पतालों के इमर्जेंसी वॉर्ड को अलर्ट कर दिया है.

    टीवी फुटेज में दिख रहा है कि आसपास के घरों को नुक़सान हुआ है. पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री उस्मान बज़दार ने इस धमाके की जाँच का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि जिन्होंने भी इस धमाके को अंजाम दिया है उन्हें क़ानून के कठघरे में लाया जाएगा.

    पाकिस्तान
  11. माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की ज़ब्त संपत्ति का 9371 करोड़ रुपए बैंको को दिया गया: ईडी

    विजय माल्या

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    प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी (डायरेक्टोरेट ऑफ एन्फ़ोर्समेंट) ने फ़रार कारोबारी विजय माल्या, मेहुल चोकसी और नीरव मोदी की ज़ब्त की गई संपत्ति में से 9371.17 करोड़ रुपए सरकारी बैंकों को ट्रांसफर कर दिया है.

    जाँच एजेंसियों का कहना है कि इन कारोबारियों की वित्तीय धोखाधड़ी के कारण बैंकों को भारी नुक़सान हुआ है. ईडी ने इन कारोबारियों की कुल 18,170.02 करोड़ रुपए की क़ीमत की संपत्ति को अटैच किया है.

    नीरव मोदी

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    ईडी की तरफ़ से जारी बयान में कहा गया है, ''ईडी ने न केवल 18,170.02 करोड़ रुपए की संपत्ति ज़ब्त की है बल्कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी मामले में पीएमएलए के तहत 9371.17 करोड़ रुपए सरकारी बैंकों और केंद्र सरकार को दे दिया गया है.''

    ईडी का कहना है तीनों कारोबारियों की जितनी संपत्ति ज़ब्त की गई है वो बैंकों के नुक़सान का 80.45 फ़ीसदी है.

    भारत तीन फ़रार कारोबारियों को विदेशों से वापस लाने की कोशिश कर रहा है. विजय माल्या और नीरव मोदी ब्रिटेन में हैं. इस साल फ़रवरी महीने में ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने नीरव मोदी को भारत भेजने के आदेश पर हस्ताक्षर किया था.

    उसी तरह विजय माल्या को वापस लाने के लिए भी ब्रिटेन में क़ानूनी प्रक्रिया चल रही है. विजय माल्या पर 9,000 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है.

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  12. टोक्यो ओलंपिक: आयोजकों ने शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया

    टोक्यो ओलंपिक

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    टोक्यो ओलंपिक खेलों के दौरान मादक पेय पदार्थों पर प्रतिबंध रहेगा. टोक्यो-2020 की अध्यक्षा सीको हाशीमोटो ने बुधवार को इसकी घोषणा की.

    उन्होंने कहा कि खेलों के दौरान ‘सुरक्षा’ को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है.

    एक प्रेस वार्ता में हाशीमोटो ने कहा कि ओलंपिक खेलों के आयोजकों में से एक, असाही ब्रुअरीज़ ने भी इस फ़ैसले पर सहमति जताई है.

    ओलंपिक खेलों को शुरू होने में अब सिर्फ़ 30 दिन बाकी हैं और आयोजकों का सारा ध्यान खेलों को सुरक्षित ढंग से आयोजित कराने पर है.

    आयोजकों ने हालांकि स्टेडियमों के बाहर मादक पेय पदार्थों की बिक्री और उन्हें स्टेडियम के अंदर ले जाने पर रोक लगा दी है,

    जापान के कुछ वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह दलील दी थी कि मादक पेय पदार्थों की बिक्री और उसका सेवन करने से सोशल डिस्टेन्सिंग के पालन की संभावना कम होती है, इसलिए खेलों के दौरान इसपर प्रतिबंध लगाया जाये.

    इसे देखते हुए जापान के टोक्यो शहर में अधिकांश जगहों पर मादक पेय पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने की बात कही गई है.

    टोक्यो ओलंपिक के आयोजकों ने सोमवार को कहा था कि लगभग दस हज़ार घरेलू दर्शकों को स्टेडियमों में खेल देखने की अनुमति दी जायेगी. जबकि विदेशी दर्शकों पर प्रतिबंध रखा गया है.

  13. सऊदी अरब ने योग पर भारत के साथ किया अहम समझौता

    सऊदी अरब में योग

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    सऊदी अरब ने योग को प्रोत्साहित करने में सहयोग बढ़ाने के लिए भारत के साथ एक एमओयू यानी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया है.

    एमओयू पर हस्ताक्षर सऊदी अरब के खेल मंत्रालय और भारत के आयुष मंत्रालय से जुड़े मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ योग के बीच हुआ है.

    अरब न्यूज़ ने लिखा है कि इस समझौते से सऊदी अरब में योग की मान्यता और पाठ्यक्रमों की राह खुलेगी.

    एमओयू के तहत योग में रिसर्च, शिक्षा और ट्रेनिंग को लेकर भी साझेदारी बढ़ेगी. इस एमओयू पर सऊदी में भारत के राजदूत डॉ औसफ़ सईद और सऊदी खेल मंत्रालय के लीडर्स डिवेलपमेंट इंस्टिट्यूट के निदेशक अब्दुल्लाह फ़ैसल हमाद ने किए हैं.

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    इस एमओयू पर हस्ताक्षर के लिए रियाद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम का वीडियो सऊदी अरब में भारत के दूतावास की तरफ़ से ट्विटर पर पोस्ट किया गया है.

    जिस दिन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस था उसी दिन यानी 21 जून को एमओयू पर हस्ताक्षर किया गया था. अंतरराष्ट्रीय योग दिवस योग को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है. पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून, 2015 को मनाया गया था.

    सऊदी में भारत के दूतावास ने इस समझौते को लेकर ट्विटर पर लिखा है, ''इस समझौते का उद्देश्य सऊदी अरब में योग को प्रोत्साहित करना है. खाड़ी के देशों में योग को प्रोत्साहित करने के लिए इस तरह की यह पहली पहल है.''

    योग को लेकर इस्लामिक देशों में बहुत उत्साह नहीं देखा जाता है. योग को इस्लामिक देशों में कई लोग हिन्दू धर्म से भी जोड़ते हैं. ऐसे में सऊदी के साथ यह समझौता मायने रखता है. सऊदी वो देश है, जहाँ इस्लाम की सबसे पवित्र जगह मक्का और मदीना हैं.

  14. इब्राहिम रईसी की शपथ से पहले ही अमेरिका की ईरान पर बड़ी कार्रवाई

    ईरान

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    अमेरिका ने दर्जनों ईरानी न्यूज़ वेबसाइट को बंद कर दिया है. इन पर ग़लत सूचना फ़ैलाने के आरोप हैं.

    मंगलवार को कई साइटों को ऑफ़लाइन कर दिया गया. इन्हें नोटिस भेजकर कहा गया है कि यह अमेरिका की एफ़बीआई और वाणिज्य विभाग की कार्रवाई है.

    जिन वेबसाइटों का बंद किया गया है, उनमें ईरान की सरकारी प्रेस टीवी और ईरानी समर्थित हूती आंदोलन की ओर से संचालित अल-मसिराह टीवी भी शामिल हैं.

    अमेरिका ने यह क़दम तब उठाया है जब ईरान के साथ परमाणु क़रार को लेकर गतिरोध और तनाव बढ़ता जा रहा है.

    ईरान

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    समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस ने कहा है कि ईरानी इस्लामिक रेडियो और टेलीविज़न यूनियन की कुल 30 वेबसाइट के अलावा ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह चरमपंथी संगठन की तीन अन्य वेबसाइटों को बंद किया गया है.

    मंगलवार दोपहर बाद से ये वेबसाइट नहीं खुल रही हैं. प्रेस टीवी ईरान की सरकार का अंग्रेज़ी भाषा का प्रमुख सैटलाइट चैनल है.

    इसकी वेबसाइट को भी बंद कर दिया गया है. यमन में हूती विद्रोहियों को ईरान समर्थन देता है और यहाँ से भी इस बात की पुष्टि हुई है कि almasirah.net को बंद कर दिया गया है.

    हालांकि कुछ साइट तो घंटों में ही नए डोमेन के साथ फिर से ऑनलाइन हो गईं.

    अमेरिका की यह हालिया कार्रवाई कट्टरपंथी और पश्चिम विरोधी मौलवी इब्राहिम रईसी के ईरान में राष्ट्रपति चुने जाने के कुछ दिन बाद ही लिया गया है.

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    अभी रईसी ने सत्ता भी नहीं संभाली है. अगले महीने वे राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे.

    पिछले कुछ सालों में ईरान और अमेरिका के रिश्ते ख़राब हुए हैं. 2018 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु क़रार को ख़त्म कर दिया था और कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे.

    इस परमाणु क़रार के तहत ईरान को परमाणु कार्यक्रम सीमित करना था और उसके आर्थिक पाबंदियों में छूट मिली थी. अब अमेरिका का बाइडन प्रशासन इस परमाणु क़रार को फिर से बहाल करना चाहता है लेकिन अब तक कुछ भी ठोस नहीं हो पाया है.

    रविवार को वियना में दुनिया के छह देश- अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, चीन, रूस और जर्मनी परमाणु करार बहाल करने को छठे चरण की बात कर रहे थे लेकिन वार्ता स्थगित कर दी गई है.

    ट्रंप

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  15. राजस्थान: गहलोत समर्थक निर्दलीय विधायकों की बैठक आज

    अशोक गहलोत

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    राजस्थान में अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली सरकार का समर्थन कर रहे निर्दलीय विधायकों की बैठक आज यानी बुधवार को होनी है.

    कहा जा रहा है कि ये बैठक राज्य के मौजूदा राजनीतिक हालात पर चर्चा करने के लिए बुलाई गयी है.

    इस बैठक से पहले मंगलवार को एक और निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा ने पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों पर निशाना साधते हुए कहा कि “अपनी ही सरकार गिराने का प्रयास करने वाले अब कार्यकर्ताओं के हित की बात कर रहे हैं.”

    हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस बैठक में बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायक शामिल होंगे या नहीं. पहले इन विधायकों के भी बैठक में शामिल होने की बात की जा रही थी.

    गंगानगर से निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ ने कहा, “काफ़ी दिनों से मुलाक़ात नहीं हुई थी, इसलिए ये बैठक रखी गई है. इस बहाने से सभी साथियों से मुलाक़ात होगी और चर्चा भी हो जाएगी.”

    सचिन पायलट

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    पायलट खेमे में क्या चर्चा?

    ये बैठक ऐसे समय में हो रही है जब राज्य सरकार ने हाल ही में अनेक नगरपालिकों व नगर परिषदों में बहुप्रतीक्षित राजनीतिक नियुक्तियाँ करनी शुरू की हैं और राज्य मंत्रिमंडल के विस्तार की चर्चा फिर ज़ोरों पर है.

    सचिन पायलट खेमा जहाँ राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्रिमंडल के विस्तार पर ज़ोर दे रहा है, वहीं बसपा से कांग्रेस में आये विधायकों ने हाल ही में कहा था कि आलाकमान को उन लोगों को ‘इनाम देना चाहिए जो पिछले साल के राजनीतिक संकट के समय सरकार के साथ खड़े रहे.’

    मंगलवार, 22 जून को हैशटैग ‘पायलट आ रहा है’ ट्विटर पर ट्रेंड करता रहा था. सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने उन्हें मुख्यमंत्री पद का मज़बूत दावेदार बताना शुरू किया.

    इस बीच ऐसी भी ख़बरें आईं कि राजस्थान में उनकी माँगों को मान लिया जायेगा जिसे लेकर आलाकमान चर्चा कर रही है.

    राजस्थान में कैबिनेट विस्तार पर रस्साकशी जारी है. अशोक गहलोत गुट और सचिन पायलट कैंप विस्तार को लेकर आमने-सामने हैं. पायलट कैंप की मांग है कि जल्द से जल्द कैबिनेट विस्तार किया जाए.

    राज्य में 13 निर्दलीय विधायक और छह बसपा से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक हैं.

    इस बीच, गंगापुर सिटी से निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा ने मंगलवार को सचिन पायलट व उनके समर्थक विधायकों पर आरोप लगाया कि “भाजपा के इशारे पर राज्य सरकार को अस्थिर करने का काम किया जा रहा है, लेकिन राजस्थान की जनता इस सरकार को गिरने नहीं देगी. 36 कौम के लोग इस सरकार के साथ है.”

    गहलोत के नेतृत्व में पूरा भरोसा जताते हुए उन्होंने प्रेस से कहा, “अशोक गहलोत ही राजस्थान में कांग्रेस को संभाल सकते हैं.”

  16. नमस्कार!

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