दिल्ली में बच्चों के एक अस्पताल की ऑक्सीजन की गुहार, क्या है मामला

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- Author, चिंकी सिन्हा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी को लेकर राजधानी दिल्ली लगातार ख़बरों में बनी हुई है.
रविवार सुबह दिल्ली में बच्चों के एक अस्पताल ने ऑक्सीजन की गुहार लगाई और कहा कि उसके पास मौजूद ऑक्सीजन बहुत जल्दी ख़त्म होने वाली है.
जिसके बाद आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा ने बताया कि पाँच ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पताल भेजे गए हैं.
दरअसल रविवार सुबह साढ़े 10 बजे मधुकर रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल ने एक एसओएस ट्वीट किया था कि उनके पास सिर्फ़ कुछ मिनटों की ऑक्सीजन सप्लाई बची है. चार नवजात शिशुओं समेत 50 से ज़्यादा लोग ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं.
कोविड-19 महामारी की दूसरी घातक लहर से देश बुरी तरह जूझ रहा है और इसके बोझ के तले दबा हेल्थ सिस्टम पूरी तरह चरमरा गया है. ऐसे में सोशल मीडिया एक बहुत ही अच्छा ज़रिया बन गया है जहां मदद की गुहार लगा रहे अस्पतालों और लोगों के लिए मदद जुटाई जा रही है.
एक और अस्पताल ने लगाई थी गुहार

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शनिवार सुबह, गुरुग्राम के सेक्टर 15 में स्थित केयर-न्यू बॉर्न और चाइल्ड हॉस्पिटल में ऑक्सीजन का संकट खड़ा हो गया था.
उस वक़्त इस अस्पताल में छह बच्चे एनआईसीयू, दो वेंटिलेटर और चार सीपीएसी में ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे. ख़बरों के मुताबिक़, अस्पताल में “ऑक्सीजन ख़त्म हो रही थी.”
ऑक्सीजन की क़िल्लत से जूझ रहे एनसीआर क्षेत्र के अस्पताल बार-बार ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं. गुरुग्राम के अस्पताल को शाम तक मदद मिल सकी, जब इलाक़े के एसएचओ ने ऑक्सीजन सिलेंडरों का इंतज़ाम किया.
रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल उन कई अस्पतालों में शामिल है जो अपने मरीज़ों के लिए ऑक्सीजन सप्लाई बनाए रखने के लिए रोज़ जद्दोजहद कर रहे हैं.
रविवार को दिल्ली के कालकाजी इलाक़े में एक अन्य अस्पताल ऑक्सीजन सप्लाई की गंभीर स्थिति में पहुँच गया था.
ट्राईटन अस्पताल एक तृतीयक स्तर का एनआईसीयू चलाता है जहां जन्म के समय कम वज़न वाले, वक़्त से पहले जन्में बच्चे वेंटिलेटर पर हैं. कई लोगों ने रविवार को अस्पताल की स्थिति के बारे में ट्वीट किए.
आम आदमी के विधायक ने पहुँचाई ऑक्सीजन
आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्ढा ने रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल के लिए पाँच ऑक्सीजन सिलेंडर पहुँचाएं. उन्होंने अपील के एक घंटे के अंदर मदद भेजी.
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राघव चड्ढा ने एसओएस ट्वीट के जवाब में लिखा, “हमने रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल के लिए अपनी राजघाट स्थित फ़ैसिलिटी से पाँच डी टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर का इतंज़ाम किया है. दिल्ली की ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की वजह से सरकार के पास बहुत सीमित ऑक्सीजन है, लेकिन हम किसी अप्रिय घटना को टालने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं.”
अस्पताल ने राघव चड्ढा, प्रधानमंत्री मोदी के कार्यालय, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के कार्यालय, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उपराज्यपाल अनिल बैजल को स्थिति को लेकर टैग किया था.
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शनिवार को बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी की वजह से एक डॉक्टर समेत 12 लोगों की जान चली गई थी. क़रीब एक हफ़्ते पहले, दिल्ली के जयपुर गोल्डन अस्पताल में लो ऑक्सीजन प्रेशर की वजह से 25 लोगों की मौत हो गई थी.
सरकार ने शहर का रोज़ाना का कोटा 490 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 590 मीट्रिक टन कर दिया था. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार ने 970 मीट्रिक टन की मांग की थी.
कई और एजेंसियों से भी मिली मदद

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रेनबो चिल्ड्रेन अस्पताल को आम आदमी पार्टी के पाँच सिलेंडर के अलावा एजेंसियों और अन्य अस्पतालों से 20 और सिलेंडरों की मदद मिली है.
अस्पताल के एक स्टाफ़ ने कहा कि उनका आज का काम चल जाएगा, लेकिन कल फिर संघर्ष करना होगा.
अस्पताल के स्टाफ़ ने बीबीसी से कहा, "महामारी की वजह से हमारी ज़रूरत 10 गुना बढ़ गई है और हमारे पास क़रीब 65 कोविड-19 मरीज़ हैं जिनमें बच्चे और गर्भवति महिलाएं शामिल हैं." अस्पताल में 130 बेड हैं.
आप नेता राघव चड्ढा ने कहा कि वो ऑक्सीजन की सप्लाई पूरी करने की कोशिश कर रहे हैं और उन्होंने अस्पतालों की स्थिति के बारे में पता लगाते रहने और सिलेंडर का इंतज़ाम करने के लिए टीमें बनाई हैं.
उन्होंने कहा, "हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार लोगों के लिए काम करने वाले लोगों के प्रति अधिक धर्मार्थ बनेगी."
दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को लताड़ा

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इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने शनिवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वो दिल्ली को उसके हिस्से की 490 मीट्रिक टन ऑक्सीजन आज कैसे भी उपलब्ध कराए.
जस्टिस विपिन सांघी और जस्टिस रेखा पल्ली की डिविज़न बेंच का ये आदेश कई अस्पतालों की ऑक्सीजन सप्लाई में कमी की शिकायत के बाद दिया.
कोर्ट ने साथ ही केंद्र को चेतावनी दी कि अगर दिल्ली को उसके हिस्से की ऑक्सीजन की सप्लाई नहीं हुई तो उसके ख़िलाफ़ अवमानना का मामला भी चलाया जा सकता है.
कोर्ट ने कहा, “पानी सिर के ऊपर जा चुका है. अब हमें काम से मतलब है. आप (केंद्र) अभी सब व्यवस्था करिए.”
कई अस्पतालों ने हाई कोर्ट को बताया कि उनके सप्लायर लिंडे एयर ऑक्सीजन नहीं दे रहा है.

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कोर्ट ने कहा कि बहुत हुआ और आप (सरकार) व्यवस्था करेगी.
कोर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर उसके आदेश का पालन नहीं हुआ तो अगली सुनवाई पर संबंधित प्रशासन को कोर्ट में पेश होना होगा.
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली कोई औद्योगिक राज्य नहीं है और उसके पास क्रायोजेनिक टैंकर्स नहीं हैं.
कोर्ट ने बत्रा अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण 12 मरीज़ों के मारे जाने का संज्ञान लेते हुए कहा, “दिल्ली में मरते लोगों को देखकर क्या हम अपनी आंखें बंद कर लें.”
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