कोरोना संक्रमण का भारत में बढ़ रहा है पॉज़िटिविटी रेट, पीक आना अभी बाकी है?

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- Author, विजदान मोहम्मद कावूसा
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
कोविड -19 की नई लहर हर दिन संक्रमण के मामलों और मौतों का नया रिकॉर्ड बना रही है. मामले बढ़ते जा रहे हैं और पीक आता फ़िलहाल नहीं दिख रहा.
28 अप्रैल को देश में 379,000 नए मामले दर्ज किए गए. कोरोना की टेस्टिंग जितनी बढ़ रही है नए मामले भी उसी तेज़ी से बढ़ रहे हैं. लेकिन साथ ही पॉज़िटिविटी रेट भी बढ़ रहा है.
28 अप्रैल को ख़त्म हुए हफ़्ते में भारत में हर दिन क़रीब 3,49,000 संक्रमण के नए मामले दर्ज किए गए. इस हिसाब से देश का पॉज़िटिविटी रेट 20.8 प्रतिशत रहा.
इसका मतलब है कि हर पांच में से एक सैंपल पॉज़िटिव आया. 15 दिन पहले हालात अलग थे. तब पॉज़िटिविटी रेट 12.3 प्रतिशत था यानी हर आठ में से एक सैंपल पॉज़िटिव है
टेस्टिंग से साथ ही इस रेट में भी इज़ाफ़ा हुआ. एक महीने में 65 प्रतिशट टेस्टिंग बढ़ी और अप्रैल के अंत तक हर दिन क़रीब 17 लाख टेस्ट किए जाने लगे.

पॉज़िटिविटी की दर आख़िर क्यों बढ़ रही है
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ किसी ऐसे इलाके में जहां टेस्ट सही संख्या में किए जा रहे हैं, वहां पॉज़िटिविटी रेट 5 प्रतिशत से कम होना चाहिए. ऐसा अगर कम से कम दो हफ़्तों तक हो, तो माना जाता है कि संक्रमण पर नियंत्रण पा लिया गया है. भारत में ये दर बहुत अधिक है.
कोरोना संक्रमण की पहली लहर में जब भारत के मामले पीक पर पहुंचे थे, तो पॉज़िटिविटी रेट पीक पर पहुंचने के एक महीने पहले से कम होना शुरू हो गया था. इस दूसरी लहर में ये दर कम होनी नहीं शुरू हुई है. इसलिए मुमकिन है कि पीक अभी दूर है.
कई राज्यों में पॉज़िटिविटी दर पूरे देश के दर से अधिक है. दिल्ली में ये क़रीब 33 प्रतिशत है.

ज़्यादा आबादी वाले राज्यों में ये दर पूरे देश के मुक़ाबले ज़्यादा है, जैसे कि छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, केरल, राजस्थान. दिल्ली समेत इन पांच राज्यों में क़रीब 37 करोड़ लोग रहते हैं यानी देश की क़रीब एक तिहाई आबादी.
महाराष्ट्र को छोड़ कर इन सभी राज्यों में पिछले 14 दिनों में पॉज़िटिविटी की दर बढ़ी है, महाराष्ट्र में मुमकिन है कि दूसरी लहर का पीक क़रीब हो. छत्तीसगढ़ में भी इस दर में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है.

टीकाकरण के आंकड़े बहुत कम
भारत हर दिन कोरोना वायरस वैक्सीन की बीस लाख से अधिक खुराक का प्रबंध कर रहा है. आवर वर्ल्ड इन डेटा नाम की वेबसाइट के मुताबिक़ 28 अप्रैल तक 14 करोड़ से अधिक टीके दिए जा चुके थे. 10 सबसे अधिक आबादी वाले देशों में चीन और अमेरिका के बाद भारत का नंबर है.
लेकिन प्रति 100 व्यक्ति भारत में केवल 10.6 लोगों को खुराक दी है. भारत की लगभग 8.9% आबादी को टीके की कम से कम एक खुराक मिली है जबकि केवल 1.8% आबादी को दोनों डोज़ दिए गए हैं.
किसी भी टीकाकरण अभियान से उम्मीद की जाती है कि वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचे और आंकड़े फिलहाल बहुत कम हैं.
किस राज्य में कितना टीकाकरण
दस सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में गुजरात में सबसे अधिक 3.2 प्रतिशत आबादी को दो डोज़ टीके मिले हैं, उत्तर प्रदेश में ये दर सिर्फ 0.9 प्रतिशत है. इसके अलावा 4.4 प्रतिशत लोगों को ही पहली डोज़ मिली है.
इससे ये संकेत मिलते हैं कि सिर्फ टीकाकरण से इस दूसरी लहर से नहीं निबटा जा सकता. कई शोधों में ये कहा गया है कि पीक मई के मध्य तक आ सकता है.

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के अर्थशास्त्रियों की एक रिपोर्ट इसी ओर इशारा करती है. इस रिपोर्ट में भारत की तुलना उन देशों से की गई है जहां दूसरी लहर आ चुकी है. इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अक्तूबर तक देश की 15 प्रतिशत आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण हो जाएगा और संक्रमण काबू में आ सकता है.
वॉशिंगटन विश्वविद्यालय के इंस्टिट्यूय ऑफ़ हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवॉल्यूशन के मुताबिक महामारी अभी और विक्राल रूप लेगी और मई के मध्य तक पीक पर पहुंचेगी. ये देश में संक्रमण और मौत के मौजूदा दर पर आधारित है.

कुछ रिपोर्ट के अनुसार पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ एक मीटिंग में एक सदस्य ने कहा था कि मई के मध्य तक पीक आएगा और जून-जुलाई तक संक्रमण कम होने लगेगा. आईआईटी दिल्ली की एक रिपोर्ट भी इसी ओर इशारा करती है. उनके मुताबिक महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में मुमकिन है कि पीक आ चुका है.
लेकिन इसे लेकर एहतिहात बरतने की ज़रूरत है क्योंकि इस जिस गणित के मॉड्यूल का इस्तेमाल आईआईटी ने किया है, उसके नतीजे पहले ग़लत साबित हो चुके हैं. उदाहरण के लिए आईआईटी ने पहले अनुमान लगाया था कि पीक 15 अप्रैल को आ जाएगा.
एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां के प्रोफ़ेसर मनिंदर अग्रवाल ने कहा, "इस मॉड्यूल के कई पैरामीटर बदल रहे हैं. इसलिए बिल्कुल सटीक अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल है."
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