फ़िल्म हिट फिर भी वरूण दुखी क्यों

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वरूण धवन की हाल में रिलीज़ हुई 'ढिशूम' बॉक्स ऑफ़िस पर धूम मचा रही है लेकिन वो पाकिस्तान में बैन हो गई है और वरूण इससे ख़ुश नहीं हैं.
पाकिस्तान में डिस्ट्रीब्यूटर फ़िल्म को पाक विरोधी बता रहे हैं.
वरुण कहते हैं, "इस फ़िल्म में ऐसी कोई बात नहीं जो पाकिस्तान की अस्मिता को चोट पहुंचाती हो. इसे बैन नहीं होना चाहिए था."
वो आगे जोड़ते हैं, "पाकिस्तान में काफ़ी लोग होंगे, जो इस फ़िल्म को देखना चाहते हैं. फ़िल्मों को राजनैतिक मसलों से दूर ही रखा जाए तो बेहतर होगा."

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'ढिशूम' की कहानी एक भारतीय बल्लेबाज़ के इर्द-गिर्द घूमती है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैच से ठीक पहले कहीं लापता हो जाता है.
भारतीय पुलिसकर्मी बने जॉन और अरबी पुलिसकर्मी बने वरुण संयुक्त रूप से 36 घंटों का खोज अभियान चलाते हैं.
पाकिस्तान में हिंदी फ़िल्मों को बैन किया जाना अक्सर भारतीय फिल्मों के लिए एक्स्ट्रा बूस्टअप का काम करता है.

बैन फ़िल्म से हिंदुस्तानी ऑडियंस की संवेदना जुड़ जाती है जिसका असर बॉक्स ऑफ़िस पर देखने को मिलता है.
उदाहरण हैं सैफ़ अली ख़ान की "फ़ैटम", सलमान की 'एक था टाईगर' और शाहरूख़ की 'जब तक है जान'.
'ढिशूम' ने रिलीज़ के पहले ही हफ्ते में 37.32 करोड़ रुपयों की कमाई कर ली है.
पाकिस्तान में बैन के बाद उसमें शायद कुछ करोड़ और जुड़ जाएंगें.
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