हंसी जिसने विलेन से हीरो बना दिया

- Author, संजय मिश्रा
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
अपने डांस और कॉमिक टाइमिंग के लिए मशहूर अभिनेता गोविंदा का कहना है कि मैं ज़्यादा तारीफ़ की वजह से इंडस्ट्री से आउट हो गया.
नब्बे के दशक के सफलतम अभिनेताओं में से एक गोविंदा इन दिनों फ़िल्मों में छोटी-मोटी भूमिकाओं में नज़र आ जाते हैं.
कभी इंडस्ट्री में ऊंचा मुक़ाम पाने वाले गोविंदा गुमशुदा से क्यों हो गए हैं?
गोविंदा कहते हैं, ''फ़िल्म इंडस्ट्री में जलन के चलते लोग मेरे बारे में ग़लत अफ़वाहें उड़ाते हैं. ख़ैर, सबका समय ख़राब होता है और मेरा भी हुआ.''

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उन्होंने आगे कहा, ''मैं तारीफ़ का शिकार हो गया. मेरे अच्छे काम, डांस और लुक की तारीफ़ की वजह से मैं इंडस्ट्री से आउट हो गया.''
गोविंदा कहते हैं कि उनकी फ़िल्म को डिस्ट्रीब्यूटर्स भी नहीं मिलते.
गोविंदा और निर्देशक डेविड धवन की जोड़ी ने कई सुपरहिट फ़िल्में जैसे 'राजा बाबू', 'कुली नंबर 1', 'शोला और शबनम', 'बड़े मियां छोटे मियां' और 'पार्टनर' दी हैं, लेकिन अब गोविंदा और डेविड के रिश्ते तल्ख़ हो गए हैं.
गोविंदा ने बताया कि रिश्तों में एक क़िस्से की वजह से कड़वाहट आई.

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गोविंदा ने उस क़िस्से को साझा करते हुए कहा, ''तक़रीबन छह साल पहले मैंने अपने सेक्रेटरी को काम के लिए डेविड के पास भेजा था. तब डेविड ने उससे कहा कि गोविंदा अब हीरो नहीं रहा, जो छोटा-मोटा रोल मिल रहा है वो करे.''
गोविंदा ने बताया कि वो डेविड और सेक्रेटरी के बीच हुई बात को इसलिए सुन पाए क्योंकि उन्होंने सेक्रेटरी से फ़ोन ऑन रखने को कहा था.
इंडस्ट्री में हो रही राजनीति से परेशानी जताते हुए वो कहते है, ''पता नहीं लोगों को क्यों मुझसे परेशानी हो रही है. अब किसी ने सलमान से कह दिया कि गोविंदा के साथ काम करोगे, तो अच्छा नहीं होगा.''
सलमान के बारे में गोविंदा कहते हैं, ''मैंने सलमान को कभी ब्रेक नहीं दिया, बल्कि सलमान ने मेरे कठिन समय में मेरा साथ दिया. जिन पर मेरा हक़ था, वो सामने भी नहीं आए.''

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अपने नाम से जुड़े एक दिलचस्प वाक़ये के बारे में गोविंदा बताते हैं, ''मैं और मेरा परिवार ज्योतिष और अंकशास्त्र को मानते थे. हमें विश्वास था कि नाम आपके काम के लिए बहुत मायने रखता है.''
नाम बदलने के सिलसिले में उनके कई नाम जैसे गोविंद राज, राज गोविंद, गोविंद, अरुण गोविंद और गोविंदा रखे गए.
गोविंदा ने बताया, ''इन सभी नामों में 'गोविंदा' बहुत शुभ रहा. आठ दिन के भीतर ही कई फ़िल्में साइन कर ली.''

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गोविंदा को 14 साल के कड़े संघर्ष के बाद ब्रेक मिला था. अपने संघर्ष और ब्रेक के बारे में वो कहते हैं, ''मैं जब लोगों से काम मांगने जाता था, तो लोग कहते थे कि अभी तुम जवान नहीं हुए हो.''
उन्होंने आगे कहा कि कॉलेज ख़त्म होने के बाद फिर कोशिश शुरू की. इस बार मुझे कुछ फ़िल्मों में विलेन की भूमिका के लिए साइन कर लिया गया.
लेकिन बाद में मेरे स्क्रीन टेस्ट के बाद मेरी हंसी को देख कर उन लोगों ने अपना फ़ैसला बदला और मुझे हीरो बना दिया गया. मेरी पहली फ़िल्म 'लव 86' थी.

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गोविंदा कहते हैं, ''मैं पहला स्ट्रगलर था, जो उन दिनों अपना वीडियो बना कर प्रोड्यूसर्स को देता था.''
अभिनय के साथ गोविंदा ने राजनीति में भी हाथ आजमाया. राजनीति के अपने फ़ैसले के बारे में वो कहते हैं, ''राजनीति में मैं कुछ बड़े-बुज़ुर्गों की सलाह पर आया था. उन लोगों का कहना था कि 14वीं लोकसभा है, तो शुभ रहेगा.''
राजनीति का पिच रास न आने की गोविंदा ने वजह बताई, ''शुरू में खूब सम्मान मिला, लेकिन बाद में यह अहसास हुआ कि यहां बहुत रोक-टोक है. राजनीति मुझे मेरा क्षेत्र नहीं लगा, तो मैं वहां से निकल आया.''

कभी गोविंदा के अच्छे दोस्त रहे डेविड के बेटे वरुण धवन की तुलना गोविंदा से की जाती है, तो ऐसे में वरूण के बारे में उनका क्या ख़्याल है?
गोविंदा हंसते हुए कहते हैं, ''वरुण ने बॉडी सलमान जैसी बनाई और अभिनय गोविंदा जैसा करता है. मेहनती लड़का है.''
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