थिएटर को OTT से नहीं कोरोना से लगता है डर

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- Author, प्रदीप सरदाना
- पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार एवं फिल्म समीक्षक, बीबीसी हिंदी के लिए
सन 2021 में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कुल लगभग 400 भारतीय फ़िल्में और वेब सीरीज़ रिलीज हुई हैं.
इनमें हिन्दी के अलावा मराठी, पंजाबी, गुजराती, तमिल, तेलुगू, मलयालम, बांग्ला, कन्नड और भोजपुरी सहित कुछ अन्य भाषाओं के ओरिजनल्स भी शामिल हैं.
ओटीटी पर इतनी बड़ी संख्या में फ़िल्मों-वेब सीरीज़ का रिलीज़ होना, दर्शाता है कि भारत में ओटीटी का कारोबार लगातार बढ़ रहा है.
ओटीटी पर हिन्दी फ़िल्मों की लगातार डिजिटल रिलीज़ के बाद तो यह तक कहा जाने लगा है कि डिजिटल रिलीज़, थिएटर रिलीज़ के लिए बड़ा ख़तरा बन गयी हैं, जो सिनेमा के फलते - फूलते कारोबार को तबाह कर देंगी.
लेकिन हम 2021 में थिएटर पर रिलीज कुछेक फ़िल्मों के आकड़ों का अध्ययन और विश्लेषण करें तो एक बड़ी बात निकलकर सामने आती है.
वह यह है कि ओटीटी का कारोबार आने वाले दिनों में चाहें और बढ़ जाये. लेकिन डिजिटल रिलीज़, थिएटर रिलीज़ के लिए कोई ख़तरा नहीं है.

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थिएटर का जादू बरकरार
मैंने अपने इस विश्लेषण में पाया कि फ़िल्मों के प्रदर्शन के लिए ओटीटी एक अतिरिक्त मंच, एक अलग माध्यम तो ज़रूर बन गया है.
लेकिन ये मंच सिनेमा या थिएटर रिलीज़ का विकल्प नहीं बन सका है. सिनेमा को थिएटर पर देखने का जुनून और जादू बरकरार है.
साल 2021 के नवंबर, दिसंबर के दो महीनों ने 'डिजिटल बनाम थिएटर रिलीज़' के, पिछले 18 महीनों से चले आ रहे युद्द की चौंका देने वाली तस्वीर पेश की है जो बताती है कि -'सौ सुनार की एक लोहार की'.
यानि डिजिटल रिलीज़ पर चाहें सालभर कितनी ही फ़िल्में ठक-ठक करके अपनी उपस्थिति दर्ज कराती रहें.
लेकिन थिएटर पर रिलीज़ सिर्फ़ दो-चार फ़िल्मों के ज़ोरदार प्रहार की गूंज, सैंकड़ों ठक ठक की आवाज़ से काफी तेज़ और काफी शक्तिशाली होती है.
देश में कोरोना के पाँव पसारने पर मार्च 2020 के बाद ही भारतीय फ़िल्मों पर भी ग्रहण का बड़ा साया पड़ा गया था.
इसलिए जब क़रीब 18 महीने पहले 12 जून 2020 को अमिताभ बच्चन की 'गुलाबो सिताबो' पहली बार ओटीटी प्लेटफॉर्म अमेज़न प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई तो भारतीय सिनेमा में एक नए युग की शुरुआत हो गई.
इसके बाद ओटीटी पर फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ का बड़ा सिलसिला चल पड़ा.
कोरोना के नए ख़तरों को देख कर ये साफ़ है कि यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा.
लेकिन इसे देख जो यह समझा जाने लगा था कि अब दर्शकों को घर बैठे सस्ते में नयी फ़िल्मों को देखने की आदत बन गयी है.
अब वे थिएटर में नहीं लौटेंगे. तो यह बात वर्ष 2021 के अंतिम महीनों ने गलत साबित कर दी है.
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'सूर्यवंशी', 'पुष्पा' और 'स्पाइडर मैन' ने बदली तस्वीर
देखा जाये तो पिछले क़रीब 21 महीनों से सिनेमाघरों पर छाए सन्नाटे को रौनक में बदलने का काम नवम्बर - दिसंबर के दो महीनों ने ही कर दिखाया है. इसमें अक्षय कुमार, कटरीना कैफ़ की 'सूर्यवंशी' ने बड़ी पहल की.
निर्माता रिलायंस एंटरटेनमेंट और निर्देशक रोहित शेट्टी की 'सूर्यवंशी' दिवाली के मौके पर बीती 5 नवंबर को थिएटर्स पर रिलीज़ हुई तो अंधेरे में घिरे थिएटर्स रोशन हो गए.
'सूर्यवंशी' ने पहले दिन ही जहां 26.29 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. वहीं तीन दिन में वीकेंड कलेक्शन 77 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया तो पूरा फ़िल्म उद्योग चहक उठा.
जबकि अब तक यह फ़िल्म 195 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर चुकी है.
इसी बीच 18 दिसंबर को रिलीज़ हुई हॉलीवुड की चर्चित फिल्म 'स्पाइडर-मैन : नो वे होम' और 17 दिसंबर को रिलीज़ हुई तेलुगू फिल्म 'पुष्पा' के हिन्दी संस्करण को तो दर्शकों ने जिस तरह का ज़बरदस्त रिस्पॉन्स दिया है. उससे दर्शकों के लिए तरस रहे थिएटर्स मालिक ही नहीं पूरा फ़िल्म उद्योग ही गदगद है.
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स्पाइडर मैन की भारी कमाई
'स्पाइडर-मैन : नो वे होम' भारत में 27 दिसंबर रात तक लगभग 179 करोड़ रुपये का बिजनेस कर बॉक्स ऑफिस को मालामाल कर चुकी है. इससे यह संभावना प्रबल हो गयी है कि यह फ़िल्म जल्द ही 200 करोड़ रुपये के पार पहुंचेगी.
साथ ही अल्लु अर्जुन और रश्मिका मंदाना की तेलुगू फ़िल्म 'पुष्पा-द राइज़' जो हिन्दी सहित कुल 5 भाषाओं में रिलीज़ हुई है उसने पहले दिन ही 52 करोड़ रुपये जुटा करके बता दिया कि पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण सभी ओर दर्शक सिनेमाघरों में लौट रहे हैं.
'पुष्पा' के हिन्दी संस्करण ने ही 27 दिसंबर तक करीब 40 करोड़ रुपये अपनी झोली में समेट लिए हैं. जबकि सभी भाषाओं में 'पुष्पा' ने भारत में ही 10 दिन में कुल 179 करोड़ रुपये कमाकर सभी को अचंभित कर दिया है.
यह फ़िल्म भी जल्द भारत में 200 करोड़ रुपये अपने ख़ाते में डाल सकती है.
इधर एक लंबे समय से थिएटर में रिलीज़ की बाट जोह रही फ़िल्म '83' भी थिएटर पर रिलीज़ होकर शुरू में अच्छा बिजनेस कर रही थी.
रिलायंस एंटरटेनमेंट के निर्देशक कबीर खान की रणवीर सिंह स्टारर फ़िल्म '83' ने पहले तीन दिन यानि वीकेंड तक 47 करोड़ रुपये का कारोबार कर लिया था.
लेकिन 27 दिसंबर से इसके कारोबार में कमी आने से यह अभी तक सिर्फ़ क़रीब 55 करोड़ रुपये ही एकत्र कर सकी है.
असल में यह बिजनेस 'सूर्यवंशी' के मुक़ाबले काफी कम है. लेकिन यहाँ यह भी ध्यान रखने की बात है कि जब गत 24 दिसंबर को यह फ़िल्म रिलीज़ हुई तो उसी दिन से कुछ शहरों में रात्रि कर्फ़्यू तो कुछ में सिनेमाघरों में फिर से 50 प्रतिशत क्षमता के साथ स्क्रीनिंग रखने की घोषणा हो गयी थी.
इसलिए ऐसे में 4 दिन में 55 करोड़ का कलेक्शन भी मायने रखता है. फिर यह बड़े बजट की फ़िल्म महानगरों और कुछ अन्य बड़े शहरों में तो पसंद की जा रही है. लेकिन छोटे शहरों में नहीं. लेकिन यह फ़िल्म तभी सफल मानी जाएगी जब यह 100 करोड़ के पार जाकर 125 या 150 करोड़ का बिजनेस करती है.
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सिनेमा में लौट रहे हैं दर्शक
लेकिन कुल मिलाकर 'सूर्यवंशी', 'स्पाइडर मैन', 'पुष्पा' और '83' जैसी फ़िल्मों को देखने के लिए जिस उत्साह से दर्शक सिनेमाघरों में लौटे हैं, उसे देख फ़िल्म व्यवसाय से जुड़े सभी व्यक्तियों का उत्साह बढ़ गया है.
जब हमने इस बारे में 'मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया' के अध्यक्ष कमल ज्ञानचंदानी से बात की तो वह बताते हैं- ''कोरोना की दूसरी लहर के बाद अक्तूबर, नवंबर, दिसंबर में जिस तरह सिनेमाघर फिर से खुले हैं, उसमें पूरे भारत वर्ष में फ़िल्मों ने थिएटर्स में अच्छा प्रदर्शन किया है. जिस तरह दर्शक सिनेमाघरों में लौटे हैं, उससे यह पक्का हो गया है कि थिएटर्स बिजनेस बहुत अच्छे तरीके से अपनी वापसी कर चुका है.''
ज्ञानचंदानी बताते हैं -''डर था कि जिस तरह कोविड के कारण 19 महीने से थिएटर्स बंद पड़े थे, उससे दर्शकों की थिएटर्स में फ़िल्म देखने की आदत तो नहीं बदल गयी. लेकिन अब यह डिबेट समाप्त हो गयी है. दर्शकों का थिएटर्स के प्रति लगाव कायम है, वे सिनेमा में लौट आए हैं, सिनेमा को एंजॉय कर रहे हैं.''
अब कह सकते हैं कि थिएटर्स को ओटीटी से कोई ख़तरा नहीं है और नव वर्ष को लेकर भी आप काफी उत्साहित होंगे ?
यह पूछने पर कमल ज्ञानचंदानी का जवाब था-''टीवी, ओटीटी पहले भी थे. इनके साथ हमारा सकारात्मक नाता है. दोनों एक दूसरे को आगे बढ़ाने में मदद करते हैं. इसलिए नये साल को लेकर भी हम काफ़ी उत्साहित हैं. मुझे लगता है कि 2022 में हर दो महीने में एक ब्लॉक बस्टर फ़िल्म थिएटर्स को मिलेगी.''
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पिछले तीन महीनों में और भी फ़िल्मों ने जगाई उम्मीद
इधर हम 2021 की अंतिम तिमाही में प्रदर्शित अन्य फिल्मों की ओर भी देखें तो उनमें कुछ और भी फिल्में अच्छी चली हैं. जैसे निर्देशक अभिषेक कपूर, वाणी कपूर की 'चंडीगढ़ करे आशिक़ी' जो 10 दिसंबर को प्रदर्शित हुई, इस छोटी फ़िल्म ने भी अब तक करीब 27 करोड़ रुपये एकत्र कर लिए हैं.
ऐसे ही सलमान खान और उनके जीजा आयुष शर्मा अभिनीत, निर्देशक महेश मांजरेकर की फिल्म -'अंतिम-द फ़ाइनल ट्रुथ' ने भी देश में करीब 39 करोड़ का व्यापार कर लिया है. यह फ़िल्म मराठी फिल्म 'मुल्शी पैटर्न' का रिमेक है.
यहाँ तक सुनील शेट्टी के पुत्र अहान शेट्टी की पहली फ़िल्म 'तड़प' भी अपनी कई खामियों के बावजूद करीब 27 करोड़ रुपये एकत्र कर चुकी है.
निर्माता साजिद नाड़ियाडवाला और निर्देशक मिलन लूथरा की यह फ़िल्म 2018 की एक तेलुगू फिल्म 'आरएक्स-100' का रीमेक है.
इस दौरान नवंबर में प्रदर्शित नवोदित फ़िल्मकार अनूप थापा की पहली फ़िल्म 'ये मर्द बेचारा' टिकट खिड़की पर तो कोई कमाल नहीं कर सकी. लेकिन पीवीआर द्वारा रिलीज़ यह फ़िल्म अपने विषय और कथानक को लेकर सुर्खियों में बनी रही.
देश की प्रमुख थिएटर्स चेन में से एक सिनेपोलिस इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी देवांग सम्पत बताते हैं- ''यूं इस साल की पहली तिमाही में जनवरी में भी उम्मीद की रोशनी दिखी थी. लेकिन कोरोना की दूसरी लहर से साल की अगली दो तिमाही में ज़्यादातर सिनेमा बंद होने से यह साल निराशाजनक लग रहा था. परंतु साल की अंतिम तिमाही में जो सफलता मिली है, उससे हम सभी बेहद खुश हैं.''
सम्पत यह भी बताते हैं, ''साल की अंतिम तिमाही में हिन्दी के साथ इंग्लिश और प्रादेशिक भाषा की फिल्मों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है. दक्षिण भारत की फ़िल्मों ने तो हमेशा अच्छा किया ही. फिर इस बार पंजाबी फ़िल्में भी अच्छी चलीं. हिन्दी में 'सूर्यवंशी' और '83' ने बड़ी उम्मीद जगाई हैं. उधर 'स्पाइडर मैन' तो नया इतिहास रच रही है.''
''इसलिए दो तिमाही फेल होने के बाद भी यह साल जाते जाते यह संदेश दे गया कि घर में बैठकर फ़िल्म देख रहे दर्शक थिएटर में लौट रहे हैं. थिएटर में फ़िल्म देखने का अलग मज़ा है.''
यूं इस पूरे साल में थिएटर पर कुल लगभग 50 हिन्दी फ़िल्में प्रदर्शित हुईं. जिनमें कई फ़िल्में फ़्लॉप भी रहीं. यहाँ तक कुछ बड़े बैनर और बड़े सितारों वाली फ़िल्में भी नहीं चल सकीं.
इन फ़िल्मों में सबसे ज़्यादा निराशा सलमान ख़ान की फ़िल्म 'राधे' को मिली जो ईद के मौके पर 13 मई को ओटीटी के साथ कुछ थिएटर्स पर भी प्रदर्शित हुई.
साथ ही मल्टीप्लेक्स की तर्ज पर इसे ज़ी नेटवर्क ने ज़ी 5 के साथ ही टीवी के लिए ज़ी प्लेक्स पर 'पे पर व्यू' पर भी प्रदर्शित किया. जहां इसे 249 रुपये का टिकट लेकर पूरा घर देख सकता था. लेकिन इसके बावजूद फ़िल्म 'राधे' न सफल हुई और न पसंद की गयी.
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'राधे' को मिले एक जगह पूरे दिन में सिर्फ़ 509 रुपये
उधर 'राधे' को देश के उन थिएटर्स पर भी रिलीज़ किया गया जहां उन दिनों थिएटर खुले हुए थे. लेकिन तब घोर आश्चर्य हुआ जब 'राधे' ने त्रिपुरा के एक थिएटर पर पूरे दिन में सिर्फ़ 509 रुपये का कलेक्शन किया. वहाँ दो अन्य दिनों में भी मात्र 1155 रुपये ही एकत्र हो सके. कुल मिलकर तब त्रिपुरा के तीन थिएटर्स में 'राधे' ने 8 दिन में कुल 63 हज़ार 248 रुपये का ही कलेक्शन किया.
कुछ समय बाद त्रिपुरा के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ थिएटर्स पर भी यह फ़िल्म अलग अलग किश्तों में लगती रही. लेकिन यह फिल्म थिएटर्स पर सब कुछ मिलाकार 2 लाख रुपये भी मुश्किल से एकत्र कर पाई. इसी से समझा जा सकता है कि इस फ़िल्म का क्या हश्र हुआ.
और भी कुछ फिल्मों ने किया निराश
साथ ही नवंबर में जॉन अब्राहम की 'सत्यमेव जयते-2' और यशराज बैनर की रानी मुखर्जी, सैफ़ अली ख़ान की 'बंटी और बबली-2' बुरी तरह फ्लॉप हुईं. इन फ़िल्मों को बॉक्स ऑफिस पर क्रमश 10.50 करोड़ और 11.15 करोड़ ही मिल पाये.
इससे पहले सितंबर में सदा सुर्खियों में रहने वाली कंगना रानौत की 'थलावी' फ़िल्म तो सिर्फ़ 25 लाख रुपये ही अपने नाम जमा कर सकी. अमिताभ बच्चन की चर्चित फ़िल्म 'चेहरे' भी सिर्फ 3.50 करोड़ का व्यवसाय करने के कारण फ्लॉप हो गयी. यहाँ तक अक्षय कुमार की फ़िल्म 'बेल बॉटम' भी करीब 27 करोड़ रुपये ही अपने नाम लिखा सकी. जिससे यह फ़िल्म भी असफल हो गयी.
जबकि मार्च 2021 में जब कुछ थिएटर खुले तब भी 'सायना' जैसी बायोपिक मात्र 1.25 करोड़ रुपये कमाने के कारण फ्लॉप हो गयी. 'संदीप और पिंकी फरार', 'मुंबई सागा', 'मैडम चीफ मिनिस्टर' जैसी कुछ और फ़िल्में भी नाकाम रहीं.
साल की शुरुआत भी नसीरुद्दीन शाह सरीखे अभिनेता की फ़िल्म 'रामप्रसाद की तेहरवीं' जैसी सुपर फ्लॉप फ़िल्म से हुई. जिसे टिकट खिड़की पर मात्र 20 लाख रुपये मिले.
पहली तिमाही में मार्च में प्रदर्शित राज कुमार राव और जाहन्वी कपूर की एक छोटी फ़िल्म 'रूही' करीब 25 करोड़ कमाने के कारण ठीक ठाक ही रही .
इसलिए साल के पहले 9 महीने निराशाजनक रहने के कारण 2021 से संभावनाएं टूट चुकी थीं. लेकिन साल जाते जाते इतना कुछ दे गया कि फ़िल्म उद्योग के बुझे चेहरे खिल उठे.
जाते जाते साल बहुत कुछ दे गया
देश में अपनी भव्य स्क्रीन्स के लिए प्रसिद्द आईनॉक्स के एवीपी मार्केटिंग पुनीत गुप्ता भी इस सबसे काफ़ी उत्साहित हैं.
पुनीत बताते हैं- ''साल के शुरू में तमिल की 'मास्टर' जैसी फ़िल्मों ने तो दक्षिण में तो अच्छा प्रदर्शन किया था. लेकिन शेष भारत में निराशा सी ही रही. लेकिन अगस्त के बाद से थिएटर्स की रौनक लगातार बढ़ने से हम धीरे - धीरे प्री कोविड पीरियड तक पहुँचने लगे हैं.''
पुनीत थिएटर उद्योग की सफलता को लेकर दो और बड़ी बातें भी बताते हैं-''दर्शकों के थिएटर्स में लौटने से फ़िल्म से पहले और मध्यांतर में दिखाये जाने वाले विज्ञापनों का सिलसिला भी फिर से शुरू हो गया है. अब हम पहले के मुक़ाबले फिर से करीब 70 प्रतिशत राजस्व इन्हीं विज्ञापनों से प्राप्त करने लगे हैं.''
''उधर थिएटर्स में दर्शकों के आगमन से हमको फूड से भी करीब 20 प्रतिशत राजस्व मिलता है. मुझे बताते हुए खुशी है कि दर्शकों के अच्छी संख्या में आने से पॉप कॉर्न, कोल्ड ड्रिंक्स, स्नेक्स आदि का व्यवसाय भी अब फिर से चमकने लगा है. यहाँ तक कुछेक मल्टीप्लेक्स पर तो पहले से भी अधिक राजस्व हमको खान-पान से मिल रहा. यह देखते हुए हमने अपने खाद्य पदार्थों में कई नए व्यंजन भी जोड़ दिये हैं.''
इससे पुनीत गुप्ता नव वर्ष को लेकर भी काफी उत्साहित हैं.
वह बताते हैं-'' नव वर्ष में आरआरआर, गंगूबाई और केजीएफ-2 जैसी फ़िल्मों की सफलता से, सिनेमा और थिएटर के पुराने दिन लौट सकेंगे. सिनेमा आख़िर सिनेमा है. सिनेमा से ही स्टार बनते हैं. इसलिए फ़िल्में अच्छी आयें तो दर्शक अब थिएटर में खुशी खुशी आ रहे हैं.''
इधर ओटीटी को देखें तो यहाँ भी कुछ फ़िल्मों की डिजिटल रिलीज़ की अच्छी धूम रही. पूरे वर्ष में सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर कुल 56 हिन्दी फ़िल्में प्रदर्शित हुईं.
जिनमें कृति सेनन, पंकज त्रिपाठी की 'मिमी', सिद्धार्थ मल्होत्रा की 'शेरशाह', विद्या बालन की 'शेरनी',अभिषेक बच्चन, इलायना की 'बिग बुल',विकी कौशल की 'सरदार उधम', सान्या मल्होत्रा की 'पगलैट', काजोल की 'त्रिभंगा', परेश रावल, फरहान अख्तर, मृणाल ठाकुर की 'तूफान' के साथ अभिषेक बच्चन की एक और फ़िल्म 'बॉब बिस्वास' अच्छी ख़ासी सफल होने के साथ पसंद भी की गईं.
इधर अभी ओटीटी पर फ़िल्मकार आनंद एल राय की, अक्षय कुमार, धनुष और सारा अली ख़ान की 'अतरंगी रे' भी डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर प्रदर्शित होकर सुर्खियों में है. हालांकि 'सूर्यवंशी' की सफलता के बाद अक्षय इस फिल्म को थिएटर पर रिलीज करते, लेकिन पूर्व अनुबंध के कारण यह ओटीटी पर ही आई है.
असल में देखा जाये तो 'सूर्यवंशी' 'पुष्पा' और '83' जैसी फ़िल्मों ने ओटीटी पर ना आकर थिएटर रिलीज के लिए लंबा इंतज़ार किया. उनका सब्र का फल मीठा भी रहा. लेकिन कई निर्माता आज के दौर की अनिश्चित परिस्थितियों को देखते हुए लंबे समय तक इंतज़ार न करके, अपनी फिल्मों की डिजिटल रिलीज़ को ही समझदारी मानते हैं.
ओटीटी और थिएटर के इस संबंध पर नेटफ्लिक्स इंडिया की इंटरनेशनल ओरिजिनल फ़िल्म की पूर्व निदेशक सृष्टि बहल आर्य बताती हैं- ''ओटीटी इंडस्ट्री की ग्रोथ कोरोना काल से पहले भी हो रही थी. हाँ कोरोना काल में यह निश्चय ही तेजी से बढ़ी. इसलिए ओटीटी का राजस्व यूं तो आगे भी बढ़ेगा. लेकिन फ़िल्मों की बात करें तो फ़िल्म देखने का जो अनुभव, जो आनंद थिएटर पर है, वह कहीं और नहीं.''
सृष्टि बताती हैं -''जब टीवी आया, जब वीडियो आया तब भी लोग बोलते थे थिएटर बंद हो जाएँगे. ओटीटी आने पर भी यही सब कहा जाने लगा. लेकिन थिएटर चल रहे थे, चलते रहेंगे.''
यह सब बताता है कि थिएटर को अब ओटीटी से डर नहीं लगता. लेकिन कोरोना से डर लगता है. कोरोना का डर अभी बरकरार है. यदि कोरोना की नयी लहर के चलते फिर से थिएटर बंद होने लगे, या थिएटर में दर्शकों की क्षमता फिर से आधी होने के मामले और बढ़ निकले और विभिन्न शहरों में रात्रि कालीन कर्फ़्यू लगने लगे, तो नव वर्ष में कुछ नयी फ़िल्मों का प्रदर्शन फिर से टल सकता है. इससे सभी के सिनेमा के सतरंगी सपने बिखर सकते हैं.
यूं अब यह तो साफ़ हो गया है कि दर्शक थिएटर पर फ़िल्म देखने से ज्यादा दिन दूर नहीं रह सकते. 'सूर्यवंशी', 'स्पाइडर मैन' और 'पुष्पा' को थिएटर पर देखने की दर्शकों की छटपटाहट, यह बात चीख - चीख कर बता रही है.
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