मार्स लैंडिंग: नासा के पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह से भेजीं ये तस्वीरें

मार्स लैंडिंग

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इमेज कैप्शन, लैंडिंग से ठीक पहले की पर्सिवियरेंस की तस्वीर
    • Author, जोनाथन अमोस
    • पदनाम, बीबीसी साइंस संवाददाता

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का अंतरिक्ष यान पर्सिवियरेंस, मंगल ग्रह की सतह पर सफलतापूर्वक उतर गया है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी ने चौंका देने वाली तस्वीरें जारी की हैं, जो उसके पर्सिवियरेंस रोवर ने मंगल ग्रह से भेजी हैं.

इसमें देखा जा सकता है कि किस तरह नासा का रोबोट पर्सिवियरेंस गुरुवार को लैंडिग के लिए नीचे उतर रहा था.

पर्सिवियरेंस की मेमोरी में बहुत सारा डेटा है, जिसे वो धीरे-धीरे धरती पर भेज रहा है.

अन्य तस्वीरों में से एक में उपग्रह से एक व्यू दिख रहा है, जिसमें रोवर नीचे उतरने के पैराशूट फेज़ में है.

वीडियो कैप्शन, मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश

इसे एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि के तौर पर भी देखा जा रहा है क्योंकि उपग्रह- मार्स रिकौनसंस ऑर्बिटर- उस वक़्त पर्सिवियरेंस से क़रीब 700 किलोमीटर दूर था और तीन किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ़्तार से ट्रैवल कर रहा था.

नासा ने कहा है कि वो आने वाले कुछ दिनों में और भी कई चीज़ें जारी करेगा, जिनमें प्रवेश, उतरने और लैंड करने के दौरान की शॉर्ट मूवी शामिल होगी, जिसमें साउंड भी होगा.

पर्सिवियरेंस, भूमध्यरेखीय मार्टियन क्रेटर पर लैंड हुआ है, जिसे जज़ैरो क्रेटर कहा जाता है. वहां वो ये पता लगाने की कोशिश करेगा कि क्या मंगल ग्रह पर अतीत में कभी जीवन था.

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पर्सिवियरेंस रोवर के मुख्य इंजीनियर एडम स्टेल्ट्ज़नर ने कहा कि नीचे की तरफ़ रोबोट को देखने वाला व्यू अंतरिक्ष की खोज के इतिहास की अहम तस्वीर बन जाएगा.

वो कहते हैं, "इस तस्वीर में रोवर पर्सिवियरेंस उतरने के चरण में नीचे की ओर झुका हुआ है, वो बाहर की तरफ निकल रहा है, मंगल की सतह की तरफ़ जा रहा है."

"आप देख सकते हैं कि इंजन धूल उड़ा रहा है. हम शायद मंगल की सतह से क़रीब दो मीटर या उससे थोड़ा अधिक ऊपर हैं."

"आप मैकेनिकल तारें देख सकते हैं, जिसने उतरते वक़्त रोवर को ऊपर से पकड़ रखा है, ये तीन सीधी लाइनें हैं, जो ऊपर से निकल रही हैं. साथ ही एक घुंघराली सी इलेक्ट्रिकल अम्बिलिकल है जो नीचे उतरने के चरण में सभी इलेक्ट्रिकल सिग्नल लेकर रोवर के अंदर मौजूद कंप्यूटर में भेज रही है. इसमें वन और ज़ीरो भी शामिल हैं जो इस इमेज को रिप्रेज़ेंट करते हैं."

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इंजीनियर्स ने बताया है कि पर्सिवियरेंस ठीक स्थिति में है, वो इसके सिस्टम को काम करने के निर्देश दे रहे हैं.

सभी हार्डवेयर की जांच करनी होगी, ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि गुरुवार को जब इसने मंगल ग्रह के वातावरण से सतह में प्रवेश किया तो इसमें कुछ टूटा तो नहीं.

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पर्सिवियरेंस अब अपना नेविगेशन का डंडा बाहर निकालेगा, जिस पर मुख्य वैज्ञानिक कैमरे लगे हुए हैं, इसके बाद जज़ैरो क्रेटर की सबसे विस्तृत तस्वीरें सामने आएंगी. ये तस्वीरें अगले हफ़्ते सामने आ सकती हैं.

पर्सिवियरेंस की सतह के रणनीतिक मिशन मैनेजर पॉलीन ह्वांग कहते हैं, "नेविगेशन वाला डंडा शनिवार को डिप्लॉय होगा. इस डंडे के सफलतापूर्वक बाहर आने के बाद हम कई सारी तस्वीरें लेंगे. हम रोवर का एक डेक पैनोरमा करेंगे और हम अपने आस-पास की जगह का फुल पैनोरमा करने वाले हैं."

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अंतरिक्ष में भेजा गया ये बहुत ही एडवांस रोवर है. पर्सिवियरेंस की लैंडिंग तकनीक ने इसे टारगेटेड टचडाउन ज़ोन में पहुंचा दिया, जो प्राचीन डेल्टा नदी के अवशेषों के दक्षिण पूर्वी ओर क़रीब दो किलोमीटर दूर है.

ये एक समतल ज़मीन पर रखा हुआ है, जो दो जियोलॉजिक यूनिट्स की बाउंड्री पर है. रोवर के पहियों के नीचे समतल यूनिट है जिसमें डार्क ज्वालामुखी की चट्टानें हैं और दूसरी एक खुरदुरी यूनिट है जिसकी चट्टानों में बहुत सारे खनिज ओलिविन हैं.

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डिप्टी प्रोजेक्ट साइंटिस्ट केटी स्टैक मॉर्गन ने कहा कि साइंस टीम क्रेटर के बारे में और पता करने के लिए बेताब थी.

उन्होंने पत्रकारों से कहा, बल्कि अब भी, जब कुछ पहली तस्वीरें सामने आई हैं, आकर्षक चट्टानों पर चर्चा हो रही है.

"हम विभिन्न रंगों और टोन और बनावटों को चुन रहे हैं, ताकि ये पता लगाने की कोशिश की जा सके कि ये चट्टानें क्या दर्शाती हैं और किस निक्षेपण प्रक्रिया के ज़रिए मंगल पर ये चट्टानें बनीं."

जहां पर्सिवियरेंस की लैंडिंग हुई है वो एक चतुष्कोण में है, जिसे साइंस टीम अनौपचारिक तौर पर कैन्यन डी चेल्ली कह रही है. ये नाम अमेरिका के एरिज़ोना राज्य के राष्ट्रीय स्मारक के नाम पर रखा गया है.

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1.2 किमी बाय 1.2किमो के इस इलाक़े में रोबोट जिस भी चट्टान की पड़ताल करेगा, उसे उस अमेरिकी पार्क से जुड़े नाम दिए जाएंगे, जो अपने सैंडस्टोन पत्थर के लिए प्रसिद्ध है. इन पत्थरों को स्पाइडर रॉक भी कहा जाता है.

ये रोबोट मंगल पर भेजा गया नासा का पांचवां रोवर है, इसपर 2.7 अरब डॉलर का खर्च आया है.

इसका शुरुआती मिशन एक मंगल वर्ष (लगभग दो पृथ्वी वर्ष के बराबर) तक चलेगा, हालांकि अगर सभी हार्डवेयर ठीक रहते हैं तो हो सकता है एजेंसी इस मिशन की अवधि को बढ़ा दे.

जीवन की संभावना को तलाशने के साथ-साथ पर्सिवियरेंस के अन्य मुख्य उद्देशयों में चट्टानों के सैंपल चुनकर उन्हें धरती पर भेजना शामिल है. जिनकी मदद से आगे के मिशनों के लिए लैब में रिसर्च की जाएगी.

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