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अलग-अलग है ब्रॉडबैंड की क़ीमत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दुनिया के सबसे विकसित देशों में से 30 के इंटरनेट उपभोक्ताओं को अलग-अलग ब्रॉडबैंड स्पीड मिल रही है और इसके लिए उन्हें अलग-अलग क़ीमत भी चुकानी पड़ रही है. द ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि इसके सदस्य देशों के 60 प्रतिशत इंटरनेट उपभोक्ता अब ब्रॉडबैंड का इस्तेमाल करते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों में फ़ाइबर नेटवर्क काम कर रहा है, वहाँ के उपभोक्ताओं को कम क़ीमत पर तेज़ गति वाला ब्रॉडबैंड मिल रहा है. जापान में इंटरनेट उपभोक्ताओं को 100 मेगा बाइट प्रति सेकेंड की ब्रॉडबैंड लाइन मिल रही है. जो ओईसीडी के औसत से 10 गुना ज़्यादा है. जापान में प्रति सेकेंड प्रति मेगाबाइट के लिए मात्र 0.22 डॉलर की क़ीमत चुकानी पड़ रही है जो सबसे सस्ता है. ब्रॉडबैंड के लिए सबसे ज़्यादा क़ीमत तुर्की में उपभोक्ताओं को चुकानी पड़ रही है. अमरीका में सबसे सस्ता ब्रॉडबैंड 3.18 डालर प्रति मेगाबाइट प्रति सेकेंड में उपलब्ध है जबकि ब्रिटेन में इसके लिए उपभोक्ताओं को 3.62 डॉलर (यानी 1.18 पाउंड) देना पड़ता है. जापान में फ़ाइबर नेटवर्क का ऐसा जाल है कि उपभोक्ता जिस गति से डाउनलोड करते हैं उसी गति से अपलोड भी कर सकते हैं जो टेलीफ़ोन लाइन के माध्यम से मिलने वाले ब्रॉडबैंड में संभव नहीं. स्वीडन, कोरिया और फ़िनलैंड भी 100 मेगाबाइट प्रति सेकेंड का इंटरनेट कनेक्शन दे रहे हैं. इन चारों देशों में ऑप्टिक फ़ाइबर नेटवर्क पर ही काम होता है. ओईसीडी के सदस्य देशों में कई आर्थिक रूप से विकसित देश शामिल हैं- ऑस्ट्रेलिया से लेकर अमरीका और फ़्रांस से लेकर जापान. माध्यम रिपोर्ट में कहा गया है- फ़िक्स्ड और वायरलेस नेटवर्क पर इंटरनेट के लिए ब्रॉडबैंड आधारभूत माध्यम बनता जा रहा है. ज्यूपिटर रिसर्च टेल्कॉम के विशेषज्ञ इयन फ़ॉग का कहना है, "इन 30 देशों में तुलना करना काफ़ी मुश्किल है क्योंकि हर देश में अलग-अलग ट्रेंड हैं."
हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि ब्रॉडबैंड की क़ीमत तुलना के लिए सबसे अहम मानदंड था. उन्होंने कहा कि बाज़ार भले ही विभाजित हो लेकिन हर जगह के उपभोक्ता सस्ती क़ीमतों के बारे में ध्यान रखते हैं. रिपोर्ट के अनुसार इन 30 देशों में डीएसएल के माध्यम से मिलने वाले ब्रॉडबैंड की क़ीमत 19 फ़ीसदी गिरी है जबकि ब्रॉडबैंड की स्पीड 29 फ़ीसदी बढ़ी है. केबल से मिलने वाले ब्रॉडबैंड में इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिल रहा है. चौबीसों घंटे ब्रॉडबैंड के लिए स्वीडन के उपभोक्ताओं को सबसे कम क़ीमत देनी पड़ती है. जहाँ उन्हें इसके लिए प्रति महीने सिर्फ़ 10.79 डॉलर ही देना पड़ता है और उन्हें 256 किलोबाइट प्रति सेकेंड का इंटरनेट कनेक्शन मिलता है. जबकि मैक्सिको उपभोक्ताओं के लिए सबसे महंगा है. यहाँ एक मेगाबाइट प्रति सेकेंड ब्रॉ़डबैंड के लिए उपभोक्ताओं को प्रति महीने 52.36 डॉलर (यानी 26.18 पाउंड) देना पड़ता है. इयन फ़ॉग का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान ब्रॉडबैंड की स्पीड बढ़ी है और इसकी वजह है एडीसीएल2 तकनीक. इस तकनीक के माध्यम से ब्रॉडबैंड की गति दोगुनी हो जाती है. पश्चिमी देशों में फ़्रांस पहला ऐसा देश था, जिसने इस तकनीक का इस्तेमाल किया. लेकिन ब्रिटेन की दूरसंचार कंपनी ब्रिटिश टेल्कॉम इस तकनीक को अपनाने में काफ़ी धीमी रही है. |
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