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इंटरनेट का बोलबाला झूठे का मुँह... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंटरनेट टेलीफ़ोन सेवा देने वाली कंपनी स्काइप के ग्राहकों को अब बहुत संभलकर बात करने की ज़रूरत होगी क्योंकि कंपनी जल्द ही झूठ पकड़ने वाली मशीन की सुविधा भी उपलब्ध कराने जा रही है. स्काइप अपने ग्राहकों को किशकिश लाइ डिटेक्टर की सुविधा उपलब्ध कराएगी जिसे बीएटीएम नाम की कंपनी ने तैयार किया है. यह लाइ डिटेक्टर फ़ोन पर होने वाली बातचीत के ऑडियो का गहन विश्लेषण करता है और ग्राहक को बताता रहता है कि फ़ोन लाइन के दूसरी ओर बैठे व्यक्ति की बातें सच हैं या नहीं. दरअसल, यह लाइ डिटेक्टर फ़ोन पर बात करने वाले व्यक्ति की आवाज़ में छिपे तनाव और झूठ बोलते समय होने वाली असहजता जैसी बारीक़ियों को पकड़ता है. यह लाइ डिटेक्टर तत्काल विश्लेषण करने के अलावा बातचीत को बाद में गहन विश्लेषण के लिए रिकॉर्ड भी कर सकता है. दुनिया भर में स्काइप के लाखों ग्राहक हैं और जो इंटरनेट के ज़रिए सस्ती फ़ोन सेवाओं का लाभ उठाते हैं. स्काइप के वरिष्ठ अधिकारी पॉल अमरी कहते हैं, "यह बहुत ही बेहतरीन सुविधा है, हम भविष्य में ऐसी सुविधाओं को और बढ़ावा देना चाहते हैं." वे कहते हैं, "लाइ डिटेक्टर प्रीमियम एड ऑन सुविधा है जिसकी वजह से लोगों को इंटरनेट के ज़रिए फ़ोन करने का अधिक मज़ा आएगा." स्काइप ने अभी तक नहीं बताया है कि इस सुविधा के लिए ग्राहकों से कितनी रक़म ली जाएगी या कम तक यह सुविधा उपलब्ध हो जाएगी. स्काइप पहले ही अपने ग्राहकों को वायस मेल और कॉल रिकॉर्डर जैसी सुविधाएँ दे रहा है. कंपनी की योजना निकट भविष्य में ग्राहकों को और आधुनिक अतिरिक्त सुविधाएँ देने की है. इसी वर्ष इंटरनेट नीलामी के ज़रिए माल बेचने वाली कंपनी ईबे ने स्काइप को 2.6 अरब डॉलर में ख़रीदा है, स्काइप के दुनिया भर में लगभग साढ़े तेरह करोड़ ग्राहक हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें ईबे इंटरनेट कंपनी स्काइप को ख़रीदेगी12 सितंबर, 2005 | कारोबार ईबे पर अमरीकी नगर की नीलामी04 अप्रैल, 2006 | कारोबार राखी ने बढ़ाया ई-बिज़नेस का बाज़ार08 अगस्त, 2006 | पत्रिका इंटरनेट सबसे तेज़ी से बढ़ रहा है भारत में24 अगस्त, 2006 | विज्ञान मुफ़्त में किताबें प्रिंट करने की सुविधा30 अगस्त, 2006 | विज्ञान गूगल पता लगाएगा बीमारियों के बारे में10 नवंबर, 2006 | विज्ञान बाज़ी डॉट कॉम को ख़रीदेगा ईबे23 जून, 2004 | कारोबार ऑक्सफ़ोर्ड पुस्तकालय की बोली31 मई, 2006 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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