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मुफ़्त में किताबें प्रिंट करने की सुविधा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गूगल की नई पहल के तहत कई किताबों को मुफ़्त में डाउनलोड और प्रिंट करने की सुविधा देने के लिए गुटनबर्ग प्रोजेक्ट चल रहा है. इसके तहत लोग ऐसी किताबें डाउनलोड और प्रिंट कर सकेंगे जिनके कॉपीराइट का समय ख़त्म हो चुका है. अभी तक ऐसी किताबों को केवल स्क्रीन पर ही पढ़ा जा सकता था. इस सुविधा को उपलब्ध कराने के लिए गूगल बुक सर्च सर्विस सिस्टम एक बड़ा प्रोजेक्ट चला रहा है. इसके अंतर्गत इन किताबों को ऑनलाइन सर्च सिस्टम में डाला जा सकेगा. गूगल की इस बुक लाइब्रेरी प्रोजेक्ट में ऑक्सफ़ोर्ड, हावर्ड, स्टेनफोर्ड, मिशीगन विश्वविद्यालय, कोलंबिया विश्वविद्यालय जैसे ख्याति प्राप्त संस्थानों और न्यूयार्क पब्लिक लाइब्रेरी की मदद ली जा रही है. गुटनबर्ग नामक इस प्रोजेक्ट से कई लोग जुड़े हैं जो पिछले कई सालों से ऐसी किताबों की टेक्सट फ़ाइल बना रहे हैं जिनका कापीरॉइट समय ख़त्म हो चुका हो. टेक्सट फ़ाइल की मदद से इन किताबों को पढ़ने, प्रिंट निकालने, एडिटिंग करने जैसे काम किए जा सकेंगे. अन्य सुविधाएँ पाठकों को सुविधा हो इसलिए गूगल इन किताबों को प्रिंट रेडी रूप में निकाल रहा है. ऐसी किताबें जो अब भी कॉपीराइट के तहत आती हैं उनके कुछ हिस्से ही पढ़ने के लिए उपलब्ध होंगें. इसके साथ ही ख़बर यह भी है कि गूगल सर्च इंजन अपने दायरे को और विस्तृत करने की योजना बना रहा है. इस सप्ताह गूगल ने सॉफ़्टवेयर कंपनी बाज़ार पर अपनी पकड़ बढ़ाने की घोषणा भी की थी. फ़र्म ने कंपनियों को पेशकश की है कि वो अपनी ई-मेल, कलेंडर और दूसरी चीजे़ अपने डॉमेन पर डाल सकें. इस तरह गूगल का सीधा मुकाबला माइक्रोसॉफ़्ट जैसी बड़ी कंपनी से होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें आँकड़ों के सागर में डुबकी लगाती दुनिया31 अक्तूबर, 2003 | विज्ञान भारी होता जा रहा है सूचना का जाल14 अक्तूबर, 2003 को | विज्ञान भारत का नया सुपरकंप्यूटर01 अप्रैल, 2003 | विज्ञान इंटरनेट की सुस्ती का राज़25 जनवरी, 2003 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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