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आँकड़ों के सागर में डुबकी लगाती दुनिया
अमरीका के कुछ शोधकर्ताओं ने ये निष्कर्ष निकाला है कि किस तरह से पूरी दुनिया लगातार आँकड़ों के सागर में डूबती जा रही है. इंटरनेट, कंप्यूटर और फ़ोन के लगातार बढ़ते इस्तेमाल ने लोगों के जीवन में सूचना के अनिवार्य भंडार में भी काफ़ी बढ़ोत्तरी कर दी है. शोधकर्ताओं के अनुसार काग़ज़ों, फ़िल्मों, मैग्नेटिक और ऑप्टिकल डिस्कों में रखी जाने वाली सूचनाएं 1999 की तुलना में दोगुनी हो गईं हैं. यानी अब हर साल हर दुनिया में प्रत्येक आदमी के लिए औसतन क़रीब 800 मेगाबाइट सूचना का भंडार जमा हो जाता है.
साथ ही एक रोचक तथ्य ये सामने आया है कि किताबों और तरह तरह के दस्तावेज़ों में कागज़ के इस्तेमाल में भी पिछले तीन साल में 43 प्रतिशत वृद्दि हुई है. आँकड़ों की बाढ़ अमरीका के कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ये अध्ययन किया और इसकी तुलना 1999 में किए गए एक शोध से की. उन्होंने इस बात का पता लगाया कि अब कितनी सूचनाएं लोगों के लिए अनिवार्य बनती जा रही हैं और उन्हें रखा कहाँ जाता है? शोधकर्ताओं में शामिल एक प्रोफ़ेसर पीटर लाइमन ने पाया कि सिर्फ़ वर्ष यानी 2002 में नई सूचनाओं और जानकारियों का क़रीब 5 एक़्साबाइट हिस्सा फ़िल्मों, प्रिंट, मैगनेटिक और ऑप्टिकल प्रणाली के ज़रिए ही एकत्र हुआ. इसका सीधा सा मतलब ये है कि इस भंडार को यदि किताबों में रखना होता तो उसके लिए क़रीब पाँच लाख पुस्तकालयों की आवश्यकता पड़ती.
लेकिन जिस तेज़ी से टेलिफ़ोन, रेडियो, टेलिविज़न और इंटरनेट जैसे माध्यमों से सूचना की बाढ़ आ गई है वो पिछले तमाम सालों से अधिक है. सूचना के आँकड़ों में 1999 के बाद से हर साल प्रतिवर्ष 30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. प्रोफ़ेसर लाइमन ने ये भी कहना था, "मैं इस बात से अचंभित हूँ कि इतने सारे इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के बावजूद किताबें और क़ागज़ की लोकप्रियता बढ़ रही है." इस शोध से ये भी पता लगा है कि डिज़िटल मीडिया की लगातार बढ़ती लोकप्रियता से फ़िल्मों पर काफ़ी असर पड़ा है. पिछले अध्ययन के बाद से अब तक फ़िल्मों पर ली जाने वाली तस्वीरों में नौ प्रतिशत की गिरावट आई है. रोचक तथ्य इस शोध से एक और रोचक तथ्य ये सामने आया है कि लोग औसतन कितना समय मीडिया के विभिन्न साधनों के इस्तेमाल में लगाते हैं ? पता लगा कि एक आम अमरीकी नागरिक महीने भर में अपने समय का 16.17 घंटे फ़ोन पर, 90 घंटे रेडियो के कार्यक्रम सुनने में और 131 घंटे टेलीविज़न देखने में लगाता है. |
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