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बाज़ी डॉट कॉम को ख़रीदेगा ईबे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इंटरनेट पर नीलामी से जुड़ी अमरीकी वेबसाइट 'ईबे' ने एशिया में पैर फैलाने की कोशिश में इसी क्षेत्र में भारत की एक प्रमुख वेबसाइट बाज़ी डॉट कॉम को ख़रीदने का फ़ैसला किया है. अमरीकी कंपनी मुंबई के बाज़ी डॉट कॉम को दो करोड़ 70 लाख पाउंड में ख़रीद रही है. बाज़ी डॉट कॉम पर 10 लाख से भी अधिक लोग रजिस्टर्ड हैं. ईबे की ही तरह बाज़ी भी वेबसाइट का इस्तेमाल करने वालों को कंप्यूटर, गहने या क़िताबें ऑनलाइन ख़रीदने या बेचने की सुविधा देता है. इस तरह ईबे की एक ऐसे क्षेत्र में दख़ल हो जाएगी जहाँ ई-कॉमर्स बहुत ही कम विकसित है मगर जहाँ विकास की क्षमता भी शायद सबसे ज़्यादा है. ये सौदा इस साल की चौथी तिमाही में किसी समय होगा मगर इससे कंपनी के इस साल के राजस्व पर कोई ख़ास फ़र्क़ नहीं पड़ेगा. बढ़ता बाज़ार भारत में इंटरनेट का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम ही है और ख़ासतौर पर शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित है. वैसे ये भविष्यवाणी की जा रही है कि इस्तेमाल करने वालों की संख्या अगले दो वर्षों में तेज़ी से बढ़ेगी और ये संख्या एक करोड़ 70 लाख से बढ़कर तीन करोड़ तक हो सकती है. ईबे के प्रमुख कार्यकारी मेग व्हिटमैन ने कहा, "भारत में हालाँकि ई-कॉमर्स अभी बहुत ही शुरुआती दौर में है मगर लगता है कि आगे चलकर इसकी संभावनाएँ काफ़ी अच्छी होंगी." ईबे एशिया में पैर फ़ैलाने की कोशिश लगातार कर रहा है. पिछले साल इसने चीन की सबसे प्रसिद्ध नीलामी वाली वेबसाइट ईचनेट को आठ करोड़ 80 लाख पाउंड में ख़रीदा था. ईबे 1995 में कैलिफ़ोर्निया में स्थापित हुई थी और अभी अमरीका से बाहर इसने 17 देशों में स्थानीय तौर पर वेबसाइट खोल रखी है. कंपनी की उम्मीदें हैं कि उसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार जल्दी ही उसके राष्ट्रीय कारोबार को पीछे छोड़ देगा. |
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