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पिछले दरवाज़े से जेब कटने की आशंका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बजट से पहले ही रोटी, कपड़ा और मकान के महंगे होने के इंतजाम हो गए हैं, अब सेवा कर का दायरा बढ़ने या इसकी दरों में बढ़ोत्तरी की आशंका है. बजट दिवस यानी 28 फरवरी सामने हैं, इस बार आशंकाएं ज्यादा हैं. रोटी के आटे के भाव पिछले एक साल में करीब चालीस प्रतिशत बढ़ चुके हैं. मकान के कर्ज़ का ब्याज लगातार बढ़ रहा है. इसके चलते बजट से पहले ही घर का बजट बिगड़ चुका है. महँगाई आम गृहिणी बता देगी कि भले ही 10 फरवरी, 2007 को खत्म हुए हफ़्ते में मुद्रास्फीति की दर 6.63 प्रतिशत रही हो, पर पिछले एक साल में रसोई का ख़र्च ही करीब बीस से पच्चीस फ़ीसदी बढ़ चुका है. जिन लोगों ने बैकों से होम लोन लिया है, वे उन पत्रों को देखें, जो बैंकों ने उन्हे लिखे हैं. पिछले कुछ महीनों में उनकी अतिरिक्त देनदारी कई हज़ार रुपए बढ़ चुकी है. जो कर्ज़ दस सालों में चुकना था, वह अब बारह साल, या इससे भी ज़्यादा अवधि में चुक सकेगा. आशंकाएं गौरतलब है कि थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महँगाई के आंकड़े में वे ख़र्च शामिल नहीं होते, जो सेवाओं पर ख़र्च होते है. मसलन कोचिंग, डॉक्टर वगैरह पर ख़र्च पिछले एक साल में कितना बढ़ गया है, इस बात को थोक मूल्य सूचकांक नहीं बताता. क्योंकि इस सूचकांक में सेवाओं की कोई जगह नहीं है. पर सेवाओँ की जगह आम जिंदगी में तो है. रिक्शेवाले के पास भी अगर मोबाइल है, तो वह भी सर्विस टैक्स के लपेटे में आता है. मध्यवर्गीय जीवन में तो सर्विस टैक्स की अच्छी-खासी घुसपैठ हो चुकी है. ब्यूटी पार्लर से लेकर क्रेडिट कार्ड तक, इंटरनेट कैफे से लेकर टूर ऑपरेटर तक के दायरे में सर्विस टैक्स आता है. सर्विस टैक्स जाहिर है कि अंतत: उपभोक्ता को ही देना पड़ता है. मोबाइल सेवा के ऑपरेटरों पर जो सर्विस टैक्स लगता है, वह फोन के बिल में लगकर आ जाता है. सर्विस टैक्स इस साल बजट से पहले आसार ये हैं कि या तो सर्विस टैक्स का दायरा बढ़ाया जाएगा या फिर सर्विस टैक्स की दरों में बढ़ोत्तरी होगी या ये दोनों ही क़दम उठाए जा सकते हैं. अभी 90 से ज़्यादा सेवाओं पर 12 प्रतिशत सर्विस टैक्स लगता है. यह बढ़कर चौदह प्रतिशत हो सकता है. टैक्स के दायरे में सेवाओं की संख्या करीब 140 हो सकती है. अगर सर्विस टैक्स की दर बढ़ती है, तो मोबाइल सेवाओं से लेकर कोचिंग तक सब कुछ महँगा हो जाएगा. रेस्त्रां में खाने से लेकर क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना सब कुछ महँगा हो जाएगा. नई सेवाएं अगर कर दायरे में आईं, तो महँगाई नए स्त्रोतों से उपभोक्ता की जेब काटेगी. सर्विस टैक्स से कर वसूलना दरअसल पिछले दरवाजे से कर वसूलने जैसा है. जेब पर असर आयकर में कमी-बढ़ोत्तरी पर बावेला ज़्यादा मचता है, क्योंकि करदाता की जेब से सीधे रकम जाती है.
पर मोबाइल ऑपरेटर, ब्यूटी पार्लर, कोचिंग वाले सर्विस टैक्स के खाते में रकम वसूलते हैं, तो बहुत ज़्यादा बवाल-सवाल नहीं होते. सर्विस टैक्स का पिछला दरवाज़ा सरकार को यूँ भी रास आता है कि इस क्षेत्र की बढ़ोत्तरी की रफ्तार बहुत धुआंधार है. सेवा क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद में करीब 55 प्रतिशत का योगदान करता है. अकेले टेलीकॉम क्षेत्र की ही सकल घरेलू उत्पाद में करीब 13 प्रतिशत की भागीदारी है. हर महीने करीब 60 लाख नए मोबाइलधारक टेलीकॉम बाज़ार में आ रहे हैं. यानी यह पर्याप्त दुधारु क्षेत्र है. इसलिए बजट के बाद महँगी मोबाइल सेवाओं के लिए तैयार रहिए. रोटी, मोबाइल और मकान को अगर अब बुनियादी ज़रुरतों में मान लिया जाए, तो बजट के बाद इन पर ज्यादा ख़र्च की तैयारी कर लेनी चाहिए. रोटी और मकान तो बजट से पहले ही खर्च बढ़ा चुके हैं, मोबाइल समेत तमाम सेवाओं का नंबर बजट के बाद आने की संभावना है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारतीय अर्थव्यवस्था: एक नज़र24 फ़रवरी, 2007 | कारोबार महँगाई के चलते घट सकता है सीमा शुल्क 24 फ़रवरी, 2007 | कारोबार सेंसेक्स पर विदेशी बाज़ारों का असर30 नवंबर, 2006 | कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियाँ24 जून, 2006 | कारोबार एक लाख के नोट जारी करने का फ़ैसला01 जून, 2006 | कारोबार तेल की क़ीमतों को लेकर चिंता22 अप्रैल, 2006 | कारोबार तीन सरकारी बैंकों के ब्याज दरों में वृद्धि15 फ़रवरी, 2007 | कारोबार ऊँची विकास दर मगर बेरोज़गारी बढ़ी27 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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