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ऊँची विकास दर मगर बेरोज़गारी बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
आर्थिक सर्वेक्षण में वर्ष 2005-6 में 8.1 प्रतिशत की दर से विकास का अनुमान लगाया गया है लेकिन पिछले बरसों में बढ़ती बेरोज़गारी पर चिंता भी जताई गई है. इस सर्वेक्षण में औद्योगिक और कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी दर्शाई गई है लेकिन महँगाई और बजट घाटे में कमी के कोई संकेत नहीं हैं. बजट आने के एक दिन पहले संसद में रखी गई सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास की गति बरकरार रखने के लिए उद्योगों को भारी-भरकम टैक्स से छुटकारा दिलाना होगा और श्रम सुधार करने होंगे. वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आर्थिक सर्वेक्षण को सदन के पटल पर रखा. इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो सालों में 8.5 और 7.5 प्रतिशत की विकास दर रहने के बाद इस साल 8.1 प्रतिशत विकास दर रहने का अनुमान है. इसके संकेतों का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि पिछले बरसों में औद्योगिक क्षेत्र में विकास हुआ है और निवेश भी बढ़ा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतों में भारी बढ़ोत्तरी के बावजूद महंगाई नियंत्रण में रही है और इस साल महंगाई की दर पाँच प्रतिशत रहने की संभावना जताई गई है. ग़रीबी और बेरोज़गारी सर्वेक्षण रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में ग़रीबी लगातार घट रही है, हालांकि इसका कोई ताज़ा आंकड़ा नहीं दिया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है 1993-94 में ग़रीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों की संख्या 36 प्रतिशत थी जो 1999-2000 में घटकर 26.1 प्रतिशत रह गई थी. सरकार ने 2004-2005 के आँकड़े दिए बिना कहा है कि ग़रीबी लगातार कम रही है. लेकिन इसके साथ ही पिछले बरसों में बढ़ती बेरोज़गारी पर चिंता जताई गई है. आँकड़ों के अनुसार शहरी इलाक़ों के पुरुषों में 1993-94 में 5.6 प्रतिशत बेरोज़गारी की तुलना में 2004 में बेरोज़गारी 9 प्रतिशत तक पहुँच गई थी. इसी तरह ग्रामीण इलाक़ों में इसी अवधि में बेरोज़गारी 6.7 प्रतिशत से बढ़कर 8.1 प्रतिशत हो गई. हालांकि सरकार ने उम्मीद जताई है कि हाल ही में देश के 200 ज़िले में शुरु की गई राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना से ग़रीबी और बेरोज़गारी को कम करने में सहायता मिलेगी. श्रम सुधार आर्थिक सर्वेक्षण में आने वाले दिनों में श्रम सुधारों की आवश्यकता पर बल दिया गया है.
कुछ सर्वेक्षणों के हवाले से कहा गया है कि भारत के श्रम क़ानून श्रमिकों का संरक्षण करने वाले हैं और श्रम बाज़ार में लचीलापन नहीं है. श्रम क़ानूनों के बारे में कहा गया है कि भारत को चीन से शिक्षा लेनी होनी. वर्ष 2005-2006 में औद्योगिक विकास की दर 9 प्रतिशत तक रहने का अनुमान लगाया गया है. सर्वेक्षण रिपोर्ट में कहा गया है कि 2005 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 33.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा है. इसी तरह कृषि विकास की दर 2004-2005 के 0.7 प्रतिशत से बढ़कर 2.3 प्रतिशत हो गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें रोज़गार योजना नहीं, रोज़गार क़ानून02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत में रोज़गार गारंटी योजना लागू 02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस शहरों को बदलने की योजना03 दिसंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भारत की विकास दर में बढ़ोतरी30 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'विकास के फ़ायदे ग़रीबों तक नहीं'07 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस विकास के लक्ष्य से पीछे हैं:मनमोहन27 जून, 2005 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री का आर्थिक विकास का नारा 15 अगस्त, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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