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भारत की विकास दर में बढ़ोतरी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वर्ष 2005 के पहले हिस्से में भारत की अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ी है और इसका कारण औद्योगिक निर्यात और घरेलू माँग में बढ़ोतरी को माना जा रहा है. वित्त वर्ष की शुरूआत के पहले तीन महीनों यानि जून तक भारत की अर्थव्यवस्था 8.1 प्रतिशत की दर से बढ़ी है. ये दर पिछली तिमाही की सात प्रतिशत की दर से ज़्यादा है. उत्पादन और ऑउटसोर्सिंग जैसे क्षेत्रों में काफ़ी तेज़ी से वृद्घि हुई है. अपनी औद्योगिक क्षमता के चलते भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. साल की पहली तिमाही में उत्पादन क्षेत्र के चलते विकास में तेज़ी आई है. उत्पादन क्षेत्र में सालाना 11 फ़ीसीदी से ज़्यादा की बढ़ोतरी हुई है. उत्पादों और बुनियादी सुविधाओं की माँग में भी बढ़ोतरी हुई जिसके चलते भारतीय व्यापार ऊर्जा की बढ़ती कीमत के असर को झेल पाया. उत्पादन क्षेत्र अर्थशास्त्रियों का मानना है कि गर्मियों के दौरान उत्पादन क्षेत्र में वृद्धि की गति कुछ धीमी हुई है. इसके पीछे विश्व की अर्थव्यवस्था में मंदी और उत्पादों की आपूर्ति में आई अड़चन को वजह माना जा रहा है. लेकिन उनका मानना है कि व्यापार सेवाओं की मज़बूत स्थिति और कृषि क्षेत्र की बेहतर होती स्थिति से विकास दर को बल मिलेगा. पिछले तीन महीनों में कृषि क्षेत्र के उत्पादन में सिर्फ़ दो फ़ीसीदी की वृद्धि हुई है लेकिन आने वाले महीनों में इसके बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं. विकास दर इन ताज़ा आँकड़ों के बाद कई अर्थशस्त्री पूरे साल के विकास के अपने आंकलन पर फिर से विचार करने पर सोच रहे हैं. ज़्यादातर अर्थशास्त्री सात से साढ़े सात फ़ीसीदी के बीच की विकास दर का अनुमान लगा रहे हैं हालाँकि उनमें से एक का मानना है कि आठ फ़ीसीदी से ज़्यादा की विकास दर भी संभव है.
मनमोहन सिंह की सरकार इस साल सात फ़ीसदी की विकास दर की उम्मीद कर रही है जो पिछले साल की 6.9 फ़ीसदी की दर से मामूली सी ज़्यादा है. लेकिन सरकार के प्रस्तावित आर्थिक सुधारों को लेकर पनपे असंतोष से विकास दर पर असर पड़ सकता है. पिछले 18 महीनों में देश भर में हुई पहली बड़ी हड़ताल में गुरुवार को लाखों कर्मचारियों ने हिस्सा लिया. ये कर्मचारी निजीकरण का विरोध कर रहे थे. लेकिन इसके बावजूद विशेषज्ञों को अच्छी विकास दर की उम्मीद है. मुँबई में यैस बैंक में मुख्य अर्थशास्त्री भावना जयसिंह कहती हैं कि हमें उम्मीद है कि भारत विकास की पटरी पर चलता रहेगा. एशिया के दूसरे देशों से मिल रही टक्कर के बावजूद भारत में ऑउटसोर्सिंग की वृद्धि दर लगातार बढ़ रही है और उसके कम होने के कोई आसार नहीं नज़र आ रहे. यूरोपीय देशों और अमरीका ने सूचना प्रौद्योगिकी गिकी समेत कई क्षेत्रों में अपना काम भारत में ऑउटसोर्स किया है. |
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