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रविवार, 01 मई, 2005 को 05:02 GMT तक के समाचार
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लौट के हुनरमंद घर को आए
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इनफ़ोसिस जैसी कंपनियों की सफलता ने लोगों को लौटने के लिए प्रेरित किया है
सीन नारायणन पिछले 13 वर्षों से अमरीका में रह रहे थे, उन्होंने ओकलाहामा यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद शीर्ष कंपनियों में ऊँचे पदों पर काम किया.

तीन वर्ष पहले उन्होंने वर्जीनिया का अपना शानदार मकान बेच दिया और भारत चले आए.

नारायणन कहते हैं, "भारत में आज सब कुछ है, इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी का अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं है."

वे अब कॉग्निजैंट नाम की एक कंपनी में काम करते हैं और कहते हैं कि वे अपने निर्णय से बहुत ख़ुश हैं.

 भारत में आज सब कुछ है, इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी का अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने के लिए भारत से बेहतर कोई जगह नहीं है
सीन नारायणन

इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी से जुड़े ऐसे ही एक और भारतीय पेशेवर हैं शांतनु पॉल जो अमरीका में एक दशक से अधिक समय बिताने के बाद भारत लौट आए हैं.

आईबीएम जैसे कंपनी में काम कर चुके शांतनु ने 2003 में भारत लौट आए है और हैदराबाद की एक सॉफ़्टवेयर कंपनी में जनरल मैनेजर बन गए.

शांतनु कहते हैं, "इस समय भारत एक उभरती हुई कंपनी में काम करने का मज़ा देता है जबकि पश्चिमी देश थकी हुई पुरानी कंपनी जैसे लगते हैं."

उलटी गंगा

अब से सिर्फ़ एक दशक पहले तक भारत के लोग जितनी जल्दी हो सके, किसी भी तरह से भारत से बाहर जाना चाहते थे लेकिन अब कम से कम इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी से जुड़े पेशेवर लोगों ने हवा का रूख़ बदलना शुरू कर दिया है.

नारायणन
सीन नारायणन तेरह वर्ष बाद अमरीका से लौटे

सॉफ्टवेयर कंपनियों के संगठन नैस्कॉम के मुताबिक़, पिछले चार वर्षों में लगभग 25 हज़ार भारतीय आईटी पेशेवर स्वदेश लौट चुके हैं और यह सिलसिला जारी है.

अब तक जिस 'ब्रेन ड्रेन' की बात हो रही थी अब उसकी जगह 'ब्रेन गेन' की बात हो रही है.

भारत की तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था, मालदार होने पर अपेक्षाकृत बेहतर जीवन शैली की संभावना, दोस्तों और परिवार के निकट रहने की भावनात्मक संतुष्टि और बच्चों को भारतीय संस्कार देने की ललक भी इस नए चलन के लिए ज़िम्मेदार है.

चार साल अमरीका में रहकर लौटे और अब मुंबई में एक कंपनी के उपाध्यक्ष राजेश पनिक्कर अमरीका प्रवास के बारे में कहते हैं, " अमरीका में रहना किसी फ़ाइव स्टार होटल में रहने जैसा था, वह घर तो नहीं था."

2002 में अमरीका से लौटे अर्जुन कल्याणपुर कहते हैं, "भारत में जबर्दस्त रोमांच है, पूरब और पश्चिम के बीच टेक्नॉलॉजी का अंतर मिट रहा है."

ऐसा नहीं है कि घर वापसी हर तरह से सुखद ही हो, लौटने वाले भ्रष्टाचार, बुनियादी सुविधाओं की दुर्दशा और सफ़ाई की कमी जैसी समस्याओं पर खीझते हैं लेकिन ज़्यादातर लोग मानते हैं कि भारत इन समस्याओं से जल्द ही उबर जाएगा.

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