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आउटसोर्सिंग रोकने पर सीनेट की मोहर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी संसद-काँग्रेस के ऊपरी सदन, सीनेट ने भारत जैसे विकासशील देशों के लोगों से कम ख़र्च में नौकरियाँ करवाने यानी "आउटसोर्सिंग" पर पाबंदी लगाने के सरकार के फ़ैसले का समर्थन किया है. सीनेट ने इस आशय के विधेयक को 26 के मुक़बले 70 वोटों से पास कर दिया है और इसके तहत उन अनुबंधों की आउटसोर्सिंग पर पाबंदी होगी जिनके लिए संघीय कोष से धन अदा किया जाता है. डेमोक्रेटिक सांसदों का कहना है कि करदाताओं का पैसा, विदेशों में नौकरियाँ भेजने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. राष्ट्रपति के सलाहकार ग्रैगरी मैनकिव की पिछले महीने तब कड़ी आलोचना की गई थी जब उन्होंने संकेत दिया था कि आउटसोर्सिंग अमरीकी अर्तव्यवस्था के लिए सहायक हो सकती है. सीनेट द्वारा प्रस्तावित नीति तब तक लागू नहीं होगी जब तक कि अमरीकी वाणिज्य मंत्रालय यह नहीं दिखा देता कि ऐसे किसी प्रतिबंध से अर्थव्यवस्था को नुक़सान नहीं पहुँचेगा या इससे और ज़्यादा नौकरियाँ ख़त्म नहीं होंगी. इसमें प्रतिरक्षा, आंतरिक सुरक्षा और गुप्तचर विभाग के उन अनुबंधों को भी शामिल नहीं किया जा रहा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक समझे जाते हों. ये नीति तब लागू होगी जब सरकार उस काम-धंधे का निजीकरण कर देगी जिसे एक समय पर संघीय कर्मचारी करते थे और जब राज्यों की सरकारें संघीय फंड को इस्तेमाल करते हुए नौकरियों के अनुबंध देने लगेंगी. डेमोक्रेट राजनीति इस विधेयक को सीनेट में पेश करने वाले कनैक्टीकट के डेमोक्रेट सीनेटर क्रिस डौड का कहना है कि आउटसोर्सिंग के लिए सरकारी अनुदान नहीं दिया जाना चाहिए. "यह तो हो सकता है कि आप ऐसा अपने ख़ुद के पैसे से कर लें लेकिन सवाल यह है कि क्या आप करदाताओं के पैसे से ऐसा कर सकते हैं?" डेमोक्रेटिक पार्टी के अन्य सीनेटर चाहते हैं कि विदेशों से अपना काम कराने वाली अमरीकी कंपनियों को करों में छूट से वंचित कर दिया जाना चाहिए या उन कर्मचारियों को संघीय मदद मिलनी चाहिए जिनकी नौकरियों की आउटसोर्सिंग कर दी जाए. डेमोक्रेटिक सांसद आउटसोर्सिंग और नौकरियों के मुद्दे को राष्ट्रपति बुश के मुक़ाबले लोगों का समर्थन जीतने के लिए अपना प्रमुख अवसर समझते हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद यह आरोप लगा रहे हैं कि राष्ट्रपति बुश की सरकार के तहत, अमरीका में लाखों लोग अपनी नौकरियों से हाथ धो बैठे हैं और यह भी कि उन्होंने सस्ते दामों पर काम-धंधे करवाने वाले चीन और भारत जैसे देशों से रोज़गार के क्षेत्र में बने ख़तरे को दूर करने के लिए आवश्यक क़दम नहीं उठाए हैं. मैनकीव ने पिछले महीने कहा था कि आउटसोर्सिंग “कुछ ऐसा है जिसके बारे में हमें यह अहसास होना चाहिए कि यह दूरकालीन नज़रिये से अमरीकी अर्थव्यवस्था के लिए फ़ायदेमंद साबित होना चाहिए.” बाद में उन्होंने कहा कि उन्हें इस पर खेद है कि उनकी टिप्पणियों की इस तरह व्याख्या की गई है. इस बीच, भारतीय सॉफ़्टवेयर संगठन नैसकॉम ने उम्मीद जताई है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था में सुधार होगा तो भारत में नौकरियों की आउटसोर्सिंग से छिड़ा विवाद शांत होने में कुछ मदद मिलेगी. |
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