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नौकरियाँ ही नहीं, मुलाज़िम भी आते हैं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी और यूरोपीय कंपनियाँ ख़र्च बचाने के लिए अपने कामकाज का केंद्र भारत को बना रही हैं लेकिन विदेशी पेशेवर लोग भी अब बेहतर अवसरों के लिए भारत का रूख़ कर रहे हैं. स्वीडन से आईं मेरी बॉमक्विस्ट कहती हैं, "यहाँ सब कुछ यूरोप से कितना अलग है, संस्कृति और लोगों का व्यवहार बहुत अच्छा है. खाना अच्छा है, लोग अच्छे हैं, सब कुछ बहुत दिलचस्प है, मुझे बहुत मज़ा आ रहा है." यह चलन तेज़ी से बढ़ रहा है और भारतीय कंपनियाँ विदेशियों को नौकरी पर रख रही हैं, मिसाल के तौर टेक्नोवेट ईसॉल्यूशन नाम की कंपनी के नौ सौ कर्मचारियों में लगभग एक सौ यूरोपीय हैं. वजह ये है कि टेक्नोवेट की सेवाएँ लेने वाली कंपनियाँ ग्यारह देशों की हैं जहाँ नौ अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती हैं.
विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति इसलिए की जा रही है क्योंकि वे अपने देश की कंपनियों को सेवाएँ दे सकें, इनमें से ज़्यादातर को भारतीय मुद्रा में ही वेतन दिया जाता है. बहुत सारे नौजवान यूरोपीय लोगों में भारत के प्रति एक आकर्षण है और वे यहाँ कुछ समय रहकर घूमना-फिरना और अनुभव हासिल करना चाहते हैं. मसलन, मेरी गोवा घूमने आई थीं लेकिन वे यहीं रूक गईं, उन्होंने अख़बार में विज्ञापन देखा और नौकरी के लिए आवेदन कर दिया. वे कहती हैं, "यह दिलचस्प अनुभव है, कंपनी भारतीय है लेकिन काम यूरोपीय कंपनियों के लिए करती है, यह बहुत अच्छा अवसर है." इसी तरह पैट्रिक स्विस नागरिक हैं, वे पिछले दस महीनों से भारत में रह रहे हैं, उन्हें भारत इतना भा रहा है कि वे और चार महीने रूकना चाहते हैं. वे बताते हैं, "मैं स्विस टीम का लीडर हूँ, यहाँ कुल 13 स्विस काम करते हैं जो जर्मन और फ्रेंच बोलते हैं." बढ़ती तादाद टेक्नोवेट कंपनी के सीईओ प्रशांत साहनी कहते हैं कि यह प्रयोग बहुत ही सफल रहा है, लोग बहुत खुशी-खुशी काम करते हैं. वे बताते हैं, "हम लोगों की नियुक्ति की प्रक्रिया में अपने ग्राहकों को भी शामिल करते हैं, यह सबके लिए बेहतर तरीक़ा है, यूरोपीय लोगों को भारत जैसे अदभुत देश में रहने और काम करने का मौक़ा मिलता है." साहनी बताते हैं कि नियुक्ति कम से कम एक साल के लिए होती है लेकिन ज़्यादातर लोग और अधिक रूकना चाहते हैं, वे कहते हैं कि वेतन भारतीय मुद्रा में मिलता है लेकिन रहने की जगह, सस्ता खाना जैसी सुविधाएँ भी दी जाती हैं. स्वीडन से आईं सिल्विया बताती हैं कि उनका काम करने की समय अवधि इस तरह तय की गई है कि वे घूम-फिर सकें. वे कहती हैं, "काम पर लाने और छोड़ने के लिए गाड़ी आती है जो स्वीडन में दुर्लभ है." इन लोगों का कहना है कि भारत में काम करने का अनुभव उन्होंने जैसा सोचा था, उससे बहुत बेहतर है. |
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