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भारत से आउटसोर्सिंग की उल्टी गंगा! | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
ऐसे माहौल में जबकि दुनिया के विकसित देश भारत में आउटसोर्सिंग कर रहे हैं और अपने खर्चों में कटौती की बात कर रहे हैं, तब एक भारतीय कंपनी ऐसी भी है जो अमरीकी कंपनी को ठेका दे रही है. भारत की सबसे बड़ी निजी टेलीकॉम कंपनी भारती टेलीवेंचर्स ने शुक्रवार को आईबीएम के साथ एक ऐसा ही समझौता किया है. 75 करोड़ डॉलर के इस समझौते के तहत भारती टेलीवेंचर्स ने अपनी कंपनी के लिए सूचना तकनीक से जुड़े सारे उपकरण ख़रीदने और उनके रखरखाव की ज़िम्मेदारी आईबीएम को दे दी है. भारतीय टेलीवेंचर्स ने यह फ़ैसला ऐसे समय किया है जब अमरीका और ब्रिटेन में आउटसोर्सिंग पर विवाद चल रहा है और अमरीका ने हाल ही में आउटसोर्सिंग पर रोक लगाने वाला एक क़ानून बनाया है. भारती टेलीवेंचर्स के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा है कि इस समझौते से आउटसोर्सिंग को लेकर चल रहे विवादों को दूर किया जा सकेगा. समाचार एजेंसी रॉयटर के अनुसार उन्होंने कहा, ''यह सिर्फ़ आउटसोर्सिंग भर नहीं है.यह तो सेवा क्षेत्र की एक साझेदारी है.'' समझौते के तहत आईबीएम भारती के लिए सॉफ़्टवेयर और हार्डवेयर ख़रीदेगा और उनका रखरखाव भी करेगा. सुनील भारती मित्तल का कहना था कि चूंकि आईबीएम एक बड़ी कंपनी है और भारत में उसके नौ हज़ार कर्मचारी हैं इसलिए उस पर भरोसा किया जा सकता है. समझौते के तहत भारती टेलीवेंचर्स के 200 कर्मचारी आईबीएम को दिए जाएंगे और भारती ही आईबीएम को टेलीकॉम सेवाएँ देगी. इस समझौते पर अभी शेयरधारकों की मोहर लगनी बाक़ी है. |
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