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जीई ने भारत में अपनी हिस्सेदारी बेची | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी बहुराष्ट्रीय कंपनी जेनरल इलेक्ट्रिक ने भारत में आउटसोर्सिंग के अपने काम की अधिकतर हिस्सेदारी दो निजी कंपनियों को बेच दी है. कंपनी ने जीई कैपिटल इंटरनेशनल सर्विसेज़ के 60 प्रतिशत शेयर अमरीका स्थित दो कंपनियों जेनरल अटलांटिक पार्टनर्स और ओक हिल कैपिटल पार्टनर्स को बेच दिए हैं. लेकिन कंपनी ने कहा है कि वह भारत में अपना कारोबार बंद नहीं कर रही है. आउटसोर्सिंग यानी अमरीका और यूरोप की कंपनियों के कारोबार का महत्वपूर्ण अंश तीसरी दुनिया के देशों में करवाने के क्षेत्र में जीई कैपिटल इंटरनेशनल सर्विसेज़(जीसीआईएस) एक बहुत बड़ा नाम है. आउटसोर्सिंग के कारोबार में अरबों डॉलर लगे हुए हैं और जीई उन कंपनियों में गिनी जाती है जिन्होंने सबसे पहले आउटसोर्सिंग का सहारा लेना शुरू किया. स्थिति जीसीआईएस में कुल 17,000 लोग काम करते हैं जिनमें लगभग 12,000 भारत में हैं. भारत में अंग्रेज़ी बोलनेवालों की संख्या अच्छी-ख़ासी है और बहुत कम ख़र्च में ऐसे विशेषज्ञ मिल जाते हैं जो एकांउटिंग, बीमा और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में बहुराष्ट्रीय कंपनियों के काम कर सकते हैं. जीसीआईएस के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी प्रमोद भसीन ने कहा,"इस समझौते के बाद हम अपनी सेवाओं को पूरी दुनिया की नामी कंपनियों तक फैला सकते हैं". जीई इंडिया के अध्यक्ष स्कॉट बेमैन ने कहा,"जीई की रणनीति ये है कि वह भारत की बौद्धिक संपदा का लाभ उठाए और अपने औद्योगिक और वित्तीय कारोबार को स्थानीय बाज़ारों की अपेक्षा और तेज़ी से बढ़ा सके". |
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