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'भारत में आर्थिक नेतृत्व की क्षमता' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने देश में 21 वीं शताब्दी में विश्व अर्थव्यवस्था का नेतृत्व करने की क्षमता है बशर्ते कि वह अपनी अर्थव्यवस्था को खुला रखे और आर्थिक सुधार जारी रखे. उन्होंने उम्मीद जताई है कि सूनामी लहरों से हुई तबाही और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की अस्थिर क़ीमतों के बावजूद देश के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने की संभावना है. वित्त मंत्री पी चिदंबरम दिल्ली में व्यावसायिक नेताओं की एक बैठक को संबोधित कर रहे थे. इस बैठक का आयोजन अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य संघ (आईसीसी) ने किया था. उन्होंने कहा कि भारत को विश्व अर्थव्यवस्था में बढ़त लेने के लिए ज़रूरी है कि वह मुक्त अर्थव्यवस्था की पाँच बिंदुओं वाली योजना पर अमल करे जिनमें निवेश को बढ़ावा, प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन देना और राजनीति के बजाय आर्थिक नीतियों पर ज़्यादा ध्यान देना शामिल है. चिदंबरम ने कहा कि भारत और चीन दो ऐसे देश हैं जो 21 वीं शताब्दी में आर्थिक ताक़त के रूप में उभरेंगी जो विश्व अर्थव्यवस्था की अगुआई कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि भारत और चीन दोनों साथ मिलकर भी काम कर सकते हैं और अगर ऐसा होता है तो यह एक बहुत ही मज़बूत आर्थिक साझेदारी साबित होगी. वित्त मंत्री ने कहा कि चीन की आर्थिक विकास दर भारत से इसलिए ज़्यादा है क्योंकि उसने बीस साल तक अपनी विकास दर को स्थिर रखने में कामयाबी हासिल की है जबकि भारत को महत्वपूर्ण विकास दर सिर्फ़ तीन सालों-1994 से 1997 में हासिल हुई. वित्त मंत्री ने हालाँकि इस बारे में कोई संकेत नहीं दिया कि आगामी बजट में उद्योग जगत के लिए क्या-कुछ होगा? उन्होंने इतना ही कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके जितने दोस्त अब हैं, उतने ही बजट पेश करने के बाद रहेंगे. |
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