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भारत में नया कर ढाँचा अप्रैल से | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने नए वित्त वर्ष में यानी आगामी एक अप्रैल से लागू होने वाले मूल्य संवर्धित कर यानी वैट का नया ढाँचे का विवरण जारी कर दिया है. इस नए वैट ढाँचे के लागू होने से वे बहुत से कर समाप्त हो जाएंगे जो राज्य लागू करते हैं और उनकी जगह एक ही वैट लागू होगा जिससे पूरा कर ढाँचे की पेचीदगियाँ समाप्त हो जाएंगी. वैट राज्यों के स्तर पर लागू किया जाएगा और इससे उम्मीद की जा रही है कि उद्योग निर्माण, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए मौजूदा कर ढाँचे के मुक़ाबले काफ़ी आसानी हो जाएंगी. यह भी उम्मीद की जा रही है कि कर ढाँचे में इस सुधार से वित्तीय घाटे को पूरा करने में मदद मिलेगी और कर दायरे में ज़्यादा लोगों को लाया जा सकेगा. वित्त मंत्री ने कर ढाँचे से संबंधित इस दस्तावेज़ को 'वैट पर श्वेत-पत्र' का नाम दिया. पी चिदंबरम ने कहा कि स्वतंत्र भारत में ऐसा कर सुधार अभी तक लागू नहीं हुआ है इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि हालाँकि इसे कामयाब बनाने के लिए व्यापक सहयोग और समर्थन की ज़रूरत है. इस ढाँचे के तहत दो कर रखे गए हैं - एक चार प्रतिशत और दूसरा 12.5 प्रतिशत. चार प्रतिशत कर दवाइयों, कृषि और औद्योगिक माल जैसी बुनियादी ज़रूरत की चीज़ों पर लगेगा जबकि बाक़ी उन सभी चीज़ों पर 12.5 प्रतिशत कर लगेगा जो चार प्रतिशत ढाँचे से बाहर हैं लेकिन कर के दायरे में आती हैं. हालाँकि शराब, लॉटरी टिकट, पैट्रोल, डीज़ल और कुछ अन्य वस्तुओं को वैट से बाहर रखा गया है. यह नया कर ढाँचा एक अप्रैल 2003 से लागू होना था लेकिन इसलिए स्थगित किया गया क्योंकि 29 राज्यों ने दावा किया था कि वे नए कर ढाँचे के लिए तैयार नहीं हैं. आर्थिक जानकारों का कहना है कि नए कर ढाँचे से राष्ट्रीय स्तर पर राजस्व इकट्ठा करने में मदद मिलेगी जबकि उद्योग जगत ने नए कर ढाँचे पर मिश्रित प्रतिक्रिया व्यक्त की है. भारतीय उद्योग परिसंघ ने नए कर ढाँचे से कई तरह के करों की व्यवस्था से छुटकारा मिलेगा लेकिन यह बेहतर होता कि नया वैट लगाए जाने की बजाय कुछ स्थानीय कर भी समाप्त कर दिए जाते. |
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