|
'प्रवासन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दुनिया के विभिन्न देशों में पहुँचे प्रवासी उन देशों की अर्थव्यवस्था पर बोझ नहीं बन रहे बल्कि अर्थव्यवस्था को फ़ायदा पहुँचा रहे हैं. दुनिया में हो रहे प्रवासन से संबंधित 'कीमत और और उससे होने वाले लाभ' के एक व्यापक विश्लेषण के बाद ऐसा पता चला है. इंटरनेशनल ऑर्गनाइज़ेशन फ़ॉर माइग्रेशन यानि प्रवासन की अंतरराष्ट्रीय संस्था ने अपनी रिपोर्ट में इस तरह का पहला विश्लेषण किया है. इस रिपोर्ट के अनुसार प्रवासी उस देश के समाज और अर्थव्यवस्था से लाभ कम उठाते हैं लेकिन कर के रूप में योगदान ज़्यादा देते हैं. ये भी बताया गया है कि आम तौर पर नौकरियों का घटना, आप्रवासियों को मिलने वाले फ़ायदे और प्रवासन के नियंत्रण से बाहर होने जैसे मुद्दों पर चिंता जताई जाती है लेकिन ये तथ्यों पर आधारित नहीं है. पूरी दुनिया में लगभग 19 करोड़ प्रवासी हैं और ये संख्या विश्व की कुल जनसंख्या का केवल तीन प्रतिशत है. वर्ष 2000 में ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासियों ने कर के रूप में जो योगदान दिया वह उन पर ख़र्च होने वाले पैसे के मुकाबले में चार अरब डॉलर ज़्यादा था. रिपोर्ट के अनुसार ये कहना अनुचित है कि प्रवासी लोगों के कारण स्थानीय लोगों के लिए नौकरियों के अवसर कम हो जाते हैं. रिपोर्ट के अनुसार प्रवासी या तो ऐसी नौकरियाँ करते हैं जो उस देश के लोग करना नहीं चाहते या फिर ऐसी जिनके लिए प्रशिक्षित लोग उपलब्ध नहीं हैं. अमरीका में सबसे अधिक 3.5 करोड़ प्रवासी हैं और यूरोप में जर्मनी में सबसे ज़्यादा 70 लाख प्रवासी हैं. भारत, चीन और फ़िलिपींस से सबसे अधिक लोग विदेशों में नौकरियाँ करने के लिए जाते हैं. लेकिन ये भी माना गया है कि जिन देशों से प्रवासन होता है वहाँ से कई प्रशिक्षित लोग बाहर चले जाते हैं और उन देशों में प्रशिक्षित लोगों का अभाव हो जाता है. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||