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मंगलवार, 25 जनवरी, 2005 को 03:38 GMT तक के समाचार
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अर्थव्यवस्था पर कहीं ख़ुशी, कहीं ग़म
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बीबीसी वर्ल्ड सर्विस की ओर से 22 देशों में 22 हज़ार लोगों के बीच करवाए गए एक सर्वेक्षण में आम लोगों से पूछा गया कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की दशा और दिशा के बारे में वो क्या सोचते हैं?

ज़्यादातर लोगों का कहना था कि हालत ख़स्ता है लेकिन चीन और भारत के लोगों का कहना है कि वे अर्थव्यवस्था से ख़ुश हैं.

इस जनमत सर्वेक्षण में लोगों से उनके परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में सवाल किए गए, विशेषकर एशिया में लोगों की राय थी कि स्थितियाँ निश्चित तौर पर बेहतर हो रही हैं.

लेकिन जब उनसे विश्व की आर्थिक स्थिति पर सवाल किए गए तो उनका कहना था कि हालात बदतर हो रहे हैं. कुल 22 देशों में किए गए इस सर्वेक्षण में से केवल छह देशों के लोगों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सुधार आ रहा है.

ज़ाहिर है, ये सभी लोग आर्थिक विशेषज्ञ नहीं हैं. ये सामान्य लोग हैं जिन्हें किसी व्यवस्थित ढंग से नहीं चुना गया है.

दुनिया के पेशेवर आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इनका विश्लेषण ठीक नहीं है. अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय दुनिया की आर्थिक स्थिति काफ़ी उत्साहजनक है.

सर्वेक्षण में शामिल हुए लोगों की राय है कि संभवतः युद्ध, आतंकवाद औऱ धार्मिक और राजनीतिक मतभेदों के चलते ये स्थिति बिगड़ रही है.

कई अर्थशास्त्री जनता की राय को काफ़ी महत्व देते हैं क्योंकि जनता अर्थव्यवस्था पर अपने विश्वास के अनुरूप ही पूंजी निवेश और व्यय करती है.

भारत-चीन

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के इस जनमत सर्वेक्षण पर चीन के लोगों ने आशावादी तस्वीर पेश की है. चीन ने पिछले दो दशकों में भारी आर्थिक प्रगति देखी है जिससे उसकी पूंजी भारी स्तर पर बढ़ी है.

 हमारे परिवार की कुल आय काफ़ी बढ़ी है. हमारी जीवन स्थितियाँ काफ़ी सुधर गईं हैं. हम लोगों ने दो मकान ख़रीदें हैं एक अपने लिए औऱ एक अपने सास-ससुर के लिए ताकि हम सब अच्छी तरह रह सकें
एक चीनी महिला

एक चीनी महिला ने कहा, “ हमारे परिवार की कुल आय काफ़ी बढ़ी है. हमारी जीवन स्थितियाँ काफ़ी सुधर गईं हैं. हम लोगों ने दो मकान ख़रीदें हैं एक अपने लिए औऱ एक अपने सास-ससुर के लिए ताकि हम सब अच्छी तरह रह सकें.”

लगभग 80 प्रतिशत चीनी मानते हैं कि कि उनके परिवार की स्थितियां सुधर रहीं हैं. सर्वेक्षण में शामिल सभी देशों में सबसे अच्छी तस्वीर चीन से उभरी है. पर आर्थिक रूप से कम समृद्ध वर्गों के अनुसार स्थिति अलग है.

इस सर्वेक्षण के दौरान सबसे बुरी स्थिति इतालवी लोगों की पाई गई, अमूमन इटली के लोगों की आर्थिक स्थिति और जीवन स्तर बेहतर ही रहता है.

इटली की आर्थिक स्थिति ठीक न होने की एक वजह वर्ष 2001 में लीरा की जगह अपनाई गई मुद्रा यूरो है. इसकी वजह से अब तनख्वाहें क़ाफ़ी घट गईं हैं.

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