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विकास के लक्ष्य से पीछे हैं:मनमोहन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने स्वीकार किया है कि दसवीं पंचवर्षीय योजना के पहले तीन वर्षों में आर्थिक विकास का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है. उन्होंने कहा कि इसकी वजह से ही दसवीं पंचवर्षीय योजना में आर्थिक विकास की जो दर निर्धारित की गई थी उसे भी हासिल नहीं किया जा सकेगा. राष्ट्रीय विकास परिषद की दो दिवसीय बैठक की शुरुआत करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्रियों से विकास का लक्ष्य हासिल करने के लिए कृषि उत्पादन को दोगुना करने की अपील की. इसके अलावा उन्होंने राज्यों से बिजली और सड़क जैसी ढाँचागत सुविधाओं के विकास पर ध्यान देने की अपील करते हुए शहरी पुनर्निर्माण अभियान शुरु करने की घोषणा भी की. प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र की यूपीए सरकार दसवीं योजना के शेष दो वर्षों में 7.8 प्रतिशत की दर से विकास चाहती है. दिल्ली में हो रही इस बैठक में मनमोहन सिंह ने पूर्ववर्ती एनडीए सरकार पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि पिछले तीन सालों में विकास की जो दर रही है उसके चलते अगले दो सालों में किसी भी तरह से दसवीं योजना के निर्धारित दर को हासिल करना कठिन होगा. उन्होंने कहा कि आठवीं योजना में 8.1 प्रतिशत का विकास दर निर्धारित था लेकिन पिछले तीन सालों में विकास की दर सिर्फ़ 6.5 प्रतिशत रही है. उन्होंने कहा, "हमें अगले दस वर्षों में अपना कृषि उत्पाद दोगुना करना होगा...मैं मुख्यमंत्रियों से अपील करता हूँ कि वे देखें कि केंद्र और राज्य मिलकर इस दिशा में क्या कर सकते हैं." उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना होगा. ढाँचागत सुविधाएँ विकास के लिए ढाँचागत सुविधाओं की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि तेज़ी से विकास के लिए सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी राज्यों के पास पर्याप्त बिजली हो. उन्होंने कहा कि राज्यों को ऐसा माहौल बनाना होगा जिससे कि सार्वजिनिक क्षेत्र और निजी क्षेत्र ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश करें. बिजली को लेकर राज्य सरकारों की नीतियों की चर्चा करते हुए कहा कि राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि वितरण में होने वाली क्षति को कम किया जाए और बिजली के बिलों का भुगतान बराबर और सही दामों पर हो. ज़ाहिर तौर पर वे बिजली की चोरी और राजनीतिक लाभ के लिए मुफ़्त बिजली देने जैसी योजनाओं का विरोध किया. उन्होंने कहा, "विकास के लिए हमें बिजली, सड़क, रेलवे, बंदरगाहों, एयरपोर्ट और टेलीकम्युनिकेशन जैसी सेवाओं में बड़ा विस्तार करना होगा." उन्होंने राज्यों से अपील की है कि राज्य सरकारें हाइवे के किनारे होने वाले अनियोजित निर्माण कार्यों को रोकें. शहरी पुनर्निर्माण मानसून पर निर्भरता कम करने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि कृषि की रणनीति को बदले जाने की ज़रुरत है. इसी तरह उन्होंने कृषि ऋण नीति को भी बदले जाने पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि वर्षा पर निर्भर रहने वाले इलाक़ों में जल संरक्षण और वाटरशेड पर कार्य करने की ज़रुरत है. मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार जल्दी ही एक शहरी पुनर्निर्माण अभियान शुरु करेगी. उन्होंने कहा कि इस अभियान से शहर अपनी क्षमताओं के अनुरुप विकास कर सकेंगे. इसी तरह उन्होंने ग्रामीण रोज़गार योजना का ज़िक्र करते हुए कहा कि इससे सभी ग़रीबों को एक सुनिश्चित स्तर तक रोज़गार मिल सकेगा. |
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